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बीमारी से परेशान अधेड़ ने दी जान
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Thu, 02 Jun 2016 12:25 AM IST
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मृतक के शव के रोती विलखती महिलाएं
- फोटो : amar ujala beuro
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मोहल्ला श्याम नगर निवासी अधेड़ ने बीमारी से परेशान होकर फांसी लगाकर जान दे दी। सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक मजदूरी करके जीवन यापन करता था। आर्थिक तंगी के कारण वह अपना इलाज भी नहीं करा पा रहा था। पुलिस ने शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
श्यामनगर मोहल्ला निवासी सोनेलाल कुशवाहा (55) मजदूरी करके जीवन यापन कर रहा था। कई साल से उसको लीवर की बीमारी थी। बीमारी के कारण सोनेलाल काफी तनाव में रहने लगा था। वहीं आर्थिक तंगी से घर का खर्च चलाने में दिक्कत हो रही थी। विकलांग बेटे का बोझ भी उस पर था। बुधवार सुबह सोनेलाल शौच के लिए गया था। वहीं पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
काफी देर तक जब सोनेलाल घर वापस नही लौटे तो परिजनों को चिंता हुई। विकलांग पुत्र मनीष पिता की तलाश में निकला तो लोगों ने घटना की जानकारी दी। आनन फानन में मनीष अपनी मां के साथ मौके पर पहुंचा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव का उतरवाकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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बीमारी में प्लाट भी बेंच दिया
मृतक के विकलांग पुत्र मनीष ने बताया कि वह लोग भूमिहीन हैं। पिता के इलाज के लिए उसने प्लाट भी बेंच दिया था। इसके बाद भी बीमारी ठीक नही हो रही थी। इसलिए घर के गुजर बसर के लिए वह परेशान थे। बीमार होते हुए भी सोनेलाल मजदूरी करके घर का खर्चा चला रहे थे। उनकी मौत के बाद अब परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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श्यामनगर मोहल्ला निवासी सोनेलाल कुशवाहा (55) मजदूरी करके जीवन यापन कर रहा था। कई साल से उसको लीवर की बीमारी थी। बीमारी के कारण सोनेलाल काफी तनाव में रहने लगा था। वहीं आर्थिक तंगी से घर का खर्च चलाने में दिक्कत हो रही थी। विकलांग बेटे का बोझ भी उस पर था। बुधवार सुबह सोनेलाल शौच के लिए गया था। वहीं पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
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काफी देर तक जब सोनेलाल घर वापस नही लौटे तो परिजनों को चिंता हुई। विकलांग पुत्र मनीष पिता की तलाश में निकला तो लोगों ने घटना की जानकारी दी। आनन फानन में मनीष अपनी मां के साथ मौके पर पहुंचा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव का उतरवाकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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बीमारी में प्लाट भी बेंच दिया
मृतक के विकलांग पुत्र मनीष ने बताया कि वह लोग भूमिहीन हैं। पिता के इलाज के लिए उसने प्लाट भी बेंच दिया था। इसके बाद भी बीमारी ठीक नही हो रही थी। इसलिए घर के गुजर बसर के लिए वह परेशान थे। बीमार होते हुए भी सोनेलाल मजदूरी करके घर का खर्चा चला रहे थे। उनकी मौत के बाद अब परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।