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कोहरे की दस्तक से धीमी हुई वाहनों की रफ्तार
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फोटो 05एयूआरपी29- शनिवार की सुबह छाए कोहरे का नजारा
- फोटो : AURAIYA
बेला (औरैया)। जिले में कोहरे ने दस्तक दे दी है। इससे सुबह वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई। शुक्रवार की रात से कोहरे की चादर देखने को मिली और शनिवार की सुबह घनी कोहरे की चादर छाई रही। कोहरे का अधिक असर तिलहन और दलहन की फसलों पर पड़ेगा, तो वहीं आलू की फसल भी प्रभावित होगी।
घने कोहरे के चलते सड़कों पर वाहन लाइट जलाकर रेंगते नजर आए। कोहरे से हादसों का खतरा बढ़ा है। दोपहर 12 बजे के बाद धूप देखने को मिली। तब लोगों ने राहत महसूसी की। कस्बे में जिला प्रशासन ने अभी तक ठंड से बचने के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। न तो अलाव जले हैं और न ही बेसहारा लोगों को सर्दी से बचाने के लिए कंबल का इंतजाम किया गया है।
कोहरा छाने से आलू में पाला लगने का डर किसानों को सताने लगा है। किसान परमात्मा, संजय, लालता, राजबहादुर, रामप्रकाश, शिवबहादुर, राधेश्याम, आशीष, प्रकाश, मुकेश प्रताप, राममिलन, श्रीप्रकाश यादव, लालमन सिंह, मनोज बयादव, जगदीश यजादव, संतोष नायक, भूपेंद्र सिंह चौहान आदि ने कहा यदि मौसम साफ नहीं हुआ तो आलू की फसल को नुकसान होगा। वहीं गेहूं की बुवाई की रफ्तार कोहरे के कारण रुक गई है। जिन खेतों की जुताई करके पानी भरा गया है, उसमें बुवाई करने से बीज के खराब होने के आसार हैं।
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किसानों ने बताया कि 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक का समय गेहूं की बुवाई का होता है। रामविलास सिंह ने कहा कि पिछेती धान की फसल खेतों में खड़ी है। मजदूरों की समस्या से धान नहीं कट सका। ऐसे में गेहूं की बुवाई का पिछड़ना तय है।
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घने कोहरे के चलते सड़कों पर वाहन लाइट जलाकर रेंगते नजर आए। कोहरे से हादसों का खतरा बढ़ा है। दोपहर 12 बजे के बाद धूप देखने को मिली। तब लोगों ने राहत महसूसी की। कस्बे में जिला प्रशासन ने अभी तक ठंड से बचने के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। न तो अलाव जले हैं और न ही बेसहारा लोगों को सर्दी से बचाने के लिए कंबल का इंतजाम किया गया है।
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कोहरा छाने से आलू में पाला लगने का डर किसानों को सताने लगा है। किसान परमात्मा, संजय, लालता, राजबहादुर, रामप्रकाश, शिवबहादुर, राधेश्याम, आशीष, प्रकाश, मुकेश प्रताप, राममिलन, श्रीप्रकाश यादव, लालमन सिंह, मनोज बयादव, जगदीश यजादव, संतोष नायक, भूपेंद्र सिंह चौहान आदि ने कहा यदि मौसम साफ नहीं हुआ तो आलू की फसल को नुकसान होगा। वहीं गेहूं की बुवाई की रफ्तार कोहरे के कारण रुक गई है। जिन खेतों की जुताई करके पानी भरा गया है, उसमें बुवाई करने से बीज के खराब होने के आसार हैं।
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किसानों ने बताया कि 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक का समय गेहूं की बुवाई का होता है। रामविलास सिंह ने कहा कि पिछेती धान की फसल खेतों में खड़ी है। मजदूरों की समस्या से धान नहीं कट सका। ऐसे में गेहूं की बुवाई का पिछड़ना तय है।