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चुनाव भर गूंजे बीहड़ में विकास के बोल

Tue, 21 Feb 2017 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया।
अमर उजाला ब्यूरो औरैया। Updated Tue, 21 Feb 2017 11:26 PM IST
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Speaking of the development of the rugged Gunje
नगला नंदन में चौपाल में छिड़ी बीहड़ के लोगों की चर्चा। - फोटो : अमर उजाला

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बीहड़ का भूगोल जितना अजीब है, वहां की सियासत भी उतनी अनूठी। कभी डाकुओं के फरमान पर यहां सियासत चलती रही और विकास के मुद्दे हमेशा दफन होते रहे। इस चुनाव में भी विकास के बोल गूंजते रहे, मगर आगे क्या होगा पता नहीं। अब बीहड़ में जीत व हार की चर्चा जातियों के भंवर में फंसी है।

अजीतमल क्षेत्र के जगनपुर की तरफ पहुंचे तो बबूल के पेड़ों के बीच से होते हुए सड़क मिल गई। कुछ साल पहले तक यह सड़क चलने भी लायक नहीं थी। कुछ बदलाव आंखों को अच्छा लगा। गांव में बिजली थी, मगर आती कम है। नीचे यमुना बह रही है और ऊपर गांव की आबादी। यहां युवा जितेंद्र, विमल व विकास का कहना है हमें विकास चाहिए। चुनाव में समस्याओं का सवाल उठाया तो किसी ने कोई फिक्र नहीं दिखाई। कुछ आगे बढ़े। जगनपुर होते हुए नगला नंदन पहुंचे।
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यहां एक जगह चुनावी चर्चा में कुछ लोग मशगूल थे, थोड़ा कुरेदा तो कहने लगे साइकिल दौड़ रही हैं। इतने में एक ने टोक दिया, कहने लगे हम लोग क्यों खुलासा करें, हमें नहीं पता साहब कौन जीत रहा है। वहां कुछ अन्य लोगों से रूबरू हुए तो पता चला कि दावे करने वाले जातियों के ताने-बाने में उलझे थे। मुद्दे तो थे बीहड़ के विकास और रोजगार के। यहां 95 साल के हुकुम सिंह का कहना था कि कई चुनाव आए और चले गए, मगर बीहड़ वैसा ही है।
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प्रताप सिंह से पूछा कि क्या बदलाव है, तो कहने लगे साहब हम तो कल भी वहीं करते थे और आज भी। एक युवा जितेंद्र बोला आज भी जातपात की बात हो रही है तो क्या बदला है? तारिक के इसी सवाल को हमने आगे बढ़कर बुजुर्ग हाकिम सिंह के सामने रखा तो एक पल के लिए चुप हो गए, फिर कहने लगे लोकतंत्र का असर यहां कहां? जनता विकास और सुविधाओं की बात करती है और नेता सुनते नहीं। मजबूरन वोट तो किसी न किसी को डालना ही पड़ता है।


सियासी हवाओं के रुख पर कुरेदने पर कहा कि लड़ाई तो तीनों के ही बीच है। चुपचाप बैठे बुजुर्ग रमेश ने धीरे से कह दिया, यहां सब जातीय सोच वाले हैं, जो जिस जाति का है उसके ही जीतने की बात करेगा।
 
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