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धनुष टूटते ही श्रीराम का जयघोष
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फोटो 08एयूआरपी18- लक्ष्मण-परशुराम संवाद करते कलाकार
- फोटो : AURAIYA
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अजीतमल (औरैया)। सौनासी गांव में मां दुर्गा रामलीला समिति ने धनुष यज्ञ महोत्सव का आयोजन किया। शनिवार की रात हुए मंचन में सीता स्वयंवर में पहुंचे भगवान श्रीराम के धनुष तोड़ते ही पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
धनुष यज्ञ कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सोवरन सिंह महाविद्यालय के प्रबंधक संजीव यादव ने भगवान राम दरबर की आरती कर किया। उन्होंने कहा कि भगवान के जीवन से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है। इसके बाद कलाकारों ने रामलीला मंचन किया। परशुराम को देखकर सभी भयभीत हो जाते हैं तब श्रीराम आगे आते हैं। कहते हैं कि मैं आपका दास हूं। विनती करते हैं कि मेरे लिए जो आज्ञा हो बताएं।
क्रोधित परशुराम कहते हैं कि सेवक सेवा करता है, शत्रुता करने वाले से सिर्फ लड़ाई की जाती है। मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण जी मुस्कुराए और बोले गोसाईं बचपन में हमने बहुत से धनुष को तोड़े हैं। दोनों की वार्ता सुन दर्शक दीर्घा में तालियां बजने लगती है। लक्ष्मण-परशुराम संवाद पूरी रात हुआ। मंचन से पहले कार्यक्रम संयोजकों ने मुख्य अतिथि का माला पहनाकर स्वागत किया।
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धनुष यज्ञ कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सोवरन सिंह महाविद्यालय के प्रबंधक संजीव यादव ने भगवान राम दरबर की आरती कर किया। उन्होंने कहा कि भगवान के जीवन से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है। इसके बाद कलाकारों ने रामलीला मंचन किया। परशुराम को देखकर सभी भयभीत हो जाते हैं तब श्रीराम आगे आते हैं। कहते हैं कि मैं आपका दास हूं। विनती करते हैं कि मेरे लिए जो आज्ञा हो बताएं।
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क्रोधित परशुराम कहते हैं कि सेवक सेवा करता है, शत्रुता करने वाले से सिर्फ लड़ाई की जाती है। मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण जी मुस्कुराए और बोले गोसाईं बचपन में हमने बहुत से धनुष को तोड़े हैं। दोनों की वार्ता सुन दर्शक दीर्घा में तालियां बजने लगती है। लक्ष्मण-परशुराम संवाद पूरी रात हुआ। मंचन से पहले कार्यक्रम संयोजकों ने मुख्य अतिथि का माला पहनाकर स्वागत किया।
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