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आखिरी अशरे की पांच ताक रातों में करें लैलतुल कद्र की तलाश: हाफिज असरार
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संवाद न्यूज एजेंसी
फफूंद। इस्लाम धर्म में रमजानुल मुबारक का मुकद्दस महीना बड़ी ही रहमतों और बरकतों वाला महीना है। रमजानुल मुबारक महीने का तीसरा और आखिरी अशरा आग से निजात पाने का है। इस अशरे में एक ऐसी रात आती है जो हजार महीनों से भी बढ़कर है।
कुरान पाक में अल्लाह ने इस रात को लैलतुल कद्र फरमाया है। रविवार को 20 रोज़े पूरे होने के बाद शाम को 20वें रोज़े के अफ्तार के बाद सोमवार (आज) से रमजान का तीसरा अशरा शुरू हो गया है।
फफूंद की तरीन स्थित मदीना मस्जिद के इमाम हाफिज असरार ने रमजानुल मुबारक महीने के आखिरी अशरे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि रमजान का आखिरी अशरा दोजख की आग से निजात पाने का है। इस अशरे में पांच ताक रातों 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रातों में एक रात ऐसी है जिसको अल्लाह ने कुरान मजीद में लैलतुल कद्र फरमाया है।
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इसे शबे कद्र भी कहते हैं। इस रात में अल्लाह की तरफ से अपने मोमिन बंदों के लिए बहुत रहमतें और बरकतें नाज़िल होती हैं और इस रात को जिब्राइल अलैहे सलाम फरिश्तों को लेकर आते हैं और इबादत कर रहे अल्लाह के नेक बंदों से मुसाफा करते हैं। रिवायतों में है कि इस रात को कोई इंसान ऐसे ही जाग रहा होता है तो उससे फरिश्ते मुसाफा करते हैं और कोई इबादत कर रहा हो तो उससे जिब्राइल अमीन मुसाफा करते हैं।
अगर कोई नमाज पढ़ रहा हो तो उस नमाज पढ़ने वाले पर अल्लाह पाक सलाम भेजते हैं। यह इस उम्मत की खुशनसीबी है कि नबी करीम ने उम्मत के लिए दुआएं की हैं। बताया कि इस अशरे में अल्लाह के नेक बंदे मस्जिदों में 10 दिन के लिए एतिकाफ पर भी बैठते हैं। इस अशरे में ऐतिकाफ पर भी बैठना जरूरी है। हर मोहल्ले, कस्बे और शहर की मस्जिदों में लोग ज्यादा से ज्यादा एतिकाफ में बैठकर लैलतुल कदर की तलाश करें और अल्लाह को राजी कर लें।
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फफूंद। इस्लाम धर्म में रमजानुल मुबारक का मुकद्दस महीना बड़ी ही रहमतों और बरकतों वाला महीना है। रमजानुल मुबारक महीने का तीसरा और आखिरी अशरा आग से निजात पाने का है। इस अशरे में एक ऐसी रात आती है जो हजार महीनों से भी बढ़कर है।
कुरान पाक में अल्लाह ने इस रात को लैलतुल कद्र फरमाया है। रविवार को 20 रोज़े पूरे होने के बाद शाम को 20वें रोज़े के अफ्तार के बाद सोमवार (आज) से रमजान का तीसरा अशरा शुरू हो गया है।
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फफूंद की तरीन स्थित मदीना मस्जिद के इमाम हाफिज असरार ने रमजानुल मुबारक महीने के आखिरी अशरे के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि रमजान का आखिरी अशरा दोजख की आग से निजात पाने का है। इस अशरे में पांच ताक रातों 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रातों में एक रात ऐसी है जिसको अल्लाह ने कुरान मजीद में लैलतुल कद्र फरमाया है।
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इसे शबे कद्र भी कहते हैं। इस रात में अल्लाह की तरफ से अपने मोमिन बंदों के लिए बहुत रहमतें और बरकतें नाज़िल होती हैं और इस रात को जिब्राइल अलैहे सलाम फरिश्तों को लेकर आते हैं और इबादत कर रहे अल्लाह के नेक बंदों से मुसाफा करते हैं। रिवायतों में है कि इस रात को कोई इंसान ऐसे ही जाग रहा होता है तो उससे फरिश्ते मुसाफा करते हैं और कोई इबादत कर रहा हो तो उससे जिब्राइल अमीन मुसाफा करते हैं।
अगर कोई नमाज पढ़ रहा हो तो उस नमाज पढ़ने वाले पर अल्लाह पाक सलाम भेजते हैं। यह इस उम्मत की खुशनसीबी है कि नबी करीम ने उम्मत के लिए दुआएं की हैं। बताया कि इस अशरे में अल्लाह के नेक बंदे मस्जिदों में 10 दिन के लिए एतिकाफ पर भी बैठते हैं। इस अशरे में ऐतिकाफ पर भी बैठना जरूरी है। हर मोहल्ले, कस्बे और शहर की मस्जिदों में लोग ज्यादा से ज्यादा एतिकाफ में बैठकर लैलतुल कदर की तलाश करें और अल्लाह को राजी कर लें।