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मिड डे मील का विरोध, विद्यालय में दूसरे दिन भी नहीं हुआ शिक्षण कार्य
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फफूंद (औरैया)। भाग्यनगर ब्लाक के गांव फूटाताल के प्राथमिक विद्यालय में घटिया मिड-डे मील परोसने के विरोध में अभिभावकों ने बुधवार को तीसरे दिन भी बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। इससे स्कूल में शिक्षण कार्य ठप होने से सन्नाटा छाया रहा। वहीं, बुधवार को भी जिम्मेदार अफसरों के मौके पर न पहुंचने से आक्रोशित ग्रामीणों व अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया।
गांव फूटाताल स्थित प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को मिड-डे मील में सड़ा आलू बनाए जाने, फल और दूध का वितरण न होने का आरोप लगाते हुए ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने हंगामा कर जिम्मेदार अधिकारियों के न आने तक मिड-डे मील का बहिष्कार करने की बात कही थी। दूसरे दिन मंगलवार को भी किसी अधिकारी के न पहुंचने पर अभिभावकों ने विरोध करते हुए बच्चों को विद्यालय नहीं भेजा।
बुधवार को भी कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो आक्रोशित अभिभावकों ने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजा। बाद में विद्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। विद्यालय में बच्चों के न पहुंचने से सन्नाटा छाया रहा और शिक्षण कार्य ठप रहा। ग्राम प्रधान हरीशचंद्र राजपूत के अलावा अभिभावक विजय बहादुर, लाल सिंह, पंकज कुमार, दिनेश कुमार, भूरे, जागेश्वर दयाल, कप्तान सिंह व विनोद का कहना है कि जब तक विद्यालय में घटिया मिड-डे मील बनाए जाने व बच्चों को फल और दूध का वितरण न कराने की जांच नहीं कराई जाएगी, वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
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गांव फूटाताल स्थित प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को मिड-डे मील में सड़ा आलू बनाए जाने, फल और दूध का वितरण न होने का आरोप लगाते हुए ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने हंगामा कर जिम्मेदार अधिकारियों के न आने तक मिड-डे मील का बहिष्कार करने की बात कही थी। दूसरे दिन मंगलवार को भी किसी अधिकारी के न पहुंचने पर अभिभावकों ने विरोध करते हुए बच्चों को विद्यालय नहीं भेजा।
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बुधवार को भी कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो आक्रोशित अभिभावकों ने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजा। बाद में विद्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। विद्यालय में बच्चों के न पहुंचने से सन्नाटा छाया रहा और शिक्षण कार्य ठप रहा। ग्राम प्रधान हरीशचंद्र राजपूत के अलावा अभिभावक विजय बहादुर, लाल सिंह, पंकज कुमार, दिनेश कुमार, भूरे, जागेश्वर दयाल, कप्तान सिंह व विनोद का कहना है कि जब तक विद्यालय में घटिया मिड-डे मील बनाए जाने व बच्चों को फल और दूध का वितरण न कराने की जांच नहीं कराई जाएगी, वह अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
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