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औरैयाः क्रांतिकारी अहमक फफूंदवी ने हिला दी थी अंग्रेजों की हुकूमत

Mon, 15 Aug 2022 12:51 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 15 Aug 2022 12:51 AM IST
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Revolutionary Ahamak Phandavi shook the British rule
प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई अहमक फफूंदवी की लिखी किताब हिंदी शब्द कोष दिखाते उनके पौत्र आरिफ ? - फोटो : AURAIYA
फफूंद(औरैया)। आजादी की क्रांति से सराबोर शायरी से समाज को जागरूक करने और लगातार जेल में रहकर भी अंग्रेजों की चूलें हिला देने वाले आजादी के नायक अहमद मुस्तफा खान उर्फ अहमक फफूंदवी के योगदान को कस्बे से लेकर देश भर में याद किया जाता है। इसके बावजूद तमाम कोशिशों के बाद भी आज तक उनके परिजन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का लाभ नहीं ले पाए और आजादी के 76 वर्ष बीतने के बाद भी उनके नाम पर एक स्मारक के लिए तरस रहे हैं।
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फर्रुखाबाद के शमसाबाद में रहने वाले उनके दादा इमाम खान क्रांतिकारी थे और 1857 की क्रांति में भाग लेने के कारण अंग्रेजों ने उन्हें फांसी पर लटका दिया था। इसके बाद उनके पुत्र अब्दुल्ला खान फफूंद के मोहल्ला महाजनांन में आकर बस गए। 26 अप्रैल 1895 में उनके पुत्र मुस्तफा खान मददाह का जन्म हुआ। बड़े होने पर पिता ने यूनानी चिकित्सा हासिल करने के लिए दिल्ली भेज दिया।
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वहां आजादी के आंदोलन को देखा तो यहीं से वह क्रांतिकारी बनकर 1921 में महात्मा गांधी व कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों में शामिल होने लगे और अहमक फफूंदवी के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनको कई बार आगरा, लखनऊ और इटावा की जेल में डाला गया। उन्होंने अपनी शायरी लिखकर अंग्रेज जेलर की नाक में दम कर दिया था। उन्होंने एक शेर लिखा-तौक गर्दन में गुलामी का न होना चाहिए।
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जेल प्रवास के दौरान उन्होंने जिंदाने-हिमाकत, संगो खिश्त, नक्शो हिकमत व जोशो अमल नामक कविताओं का संग्रह लिखा। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी उन्हें कई प्रशस्ति पत्रों और तमगों और ताम्रपत्रों से नवाजा था। जो आज उनके परिवार से गुम हो चुके हैं। अपने आखिरी वक्त में उन्होंने हिंदी उर्दू शब्दकोश लिखकर समाज को बड़ी उपलब्धि प्रदान की थी। जिसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित किया गया था। आठ अगस्त 1957 को क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी अहमक फफूंदवी का निधन हो गया। तिराहा चमनगंज के तकिए वाली मस्जिद के कब्रिस्तान में उनको सुपुर्दे खाक किया गया।

स्मारक नहीं बनने का परिजनों को मलाल
क्रांतिकारी शायर अहमक फफूंदवी के चार बेटे व एक बेटी थी। उनके सबसे बड़े बेटे मुक्तदा खां जेलर थे। दूसरे नंबर के बेटे होम्योपैथी के डॉक्टर स्व. मुब्तदा खां थे। वर्तमान में अहमक फफूंदवी के साहित्य की देखरेख उनके पौत्र खान मोहम्मद व आरिफ खान कर रहे हैं। तीसरे नंबर के पुत्र मोहतदा खां प्रोफेसर और छोटे बेटे इस्तिफा खां पावर कारपोरेशन में इंजीनियर थे। छोटी बेटी माजदा खातून थी। अहमक फफूंदवी के पौत्र और पौत्रियों को दो पीढ़ी गुजरने के बाद भी स्वतंत्रता सेनानी परिवार का दर्जा हासिल नहीं हुआ। बड़े पौत्र खान मोहम्मद ने सरकार और प्रशासन से स्वतंत्रता सेनानी दादा अहमक फफूंदवी के नाम से कस्बे में एक स्मारक बनवाए जाने की मांग की है।

अहमक फफूंदवी। संवाद

अहमक फफूंदवी। संवाद- फोटो : AURAIYA

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