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औरैयाः दृढ़ इच्छाशक्ति से राधा ने बदली स्कूल की सूरत
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बच्चों के साथ स्कूल में जन्मदिन मनातीं राधा यादव व अन्य शिक्षक। संवाद
- फोटो : AURAIYA
फफूंद। महिलाएं किसी से कम नहीं होती, सिर्फ उनमें किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति होना जरूरी है। भाग्यनगर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय झाबर का पुरवा की प्रधानाध्यापिका राधा यादव ने अपनी इच्छाशक्ति से स्कूल की सूरत बदल दी। जिस स्कूल में बच्चे पढ़ने नहीं आते थे, वहां बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहे हैं। इतना ही नहीं राधा महिला सशक्तीकरण के सपने को साकार करने के लिए स्वावलंबन के क्षेत्र में भी महिलाओं को जागरूक कर रही हैं।
प्रधानाध्यापक राधा यादव बताती हैं कि उनकी नियुक्ति 2015 में हुई थी। उस समय विद्यालय में नामांकन तो 70 था, लेकिन आते 25-30 ही थे। इसके पीछे का कारण था कि स्कूल परिसर में जगह-जगह गड्ढे और चहारदीवारी न होना था। इसके अलावा स्कूल का रास्ता भी ऊबड़-खाबड़ था। स्कूल में उनकी तैनाती किसी चुनौती से कम नहीं थी।
एक तरफ स्कूल की दशा सुधारनी थी तो दूसरी तरफ बच्चों का भविष्य बनाने के लिए उनका पढ़ना भी जरूरी था। बताया कि सबसे पहले अपने खर्च पर सड़क के गड्ढे भरवाना शुरू किए। यह देख प्रधान ने हाथ बढ़ाया और देखते ही देखते सड़क बन गई।
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इसके बाद बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए स्कूल के अन्य शिक्षकों के साथ घर-घर संपर्क कर छात्र संख्या बढ़ानी शुरू की। आज स्कूल में छात्रों की संख्या 113 है और बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बताया कि वहीं महिला सशक्तीकरण के लिए सिंह वाहिनी संगठन के जरिए तमाम कार्यक्रमों के आयोजन में सहयोग करती हैं। इसके अलावा स्वावलंबन के लिए ग्रामीण महिलाओं को जागरूक भी करती हैं।
गेल व एनटीपीसी से लिया सहयोग
राधा बताती हैं कि स्कूल का कायाकल्प के लिए उन्होंने गेल व एनटीपीसी से सहयोग मांगा। गेल द्वारा उनके स्कूल को टिन शेड दिया गया। उन्होंने मेहनत कर स्कूल में बेहतरीन टीएलएम (टीचर लर्निंग मैटेरियल) के साथ सजावट की। अब स्कूल में कान्वेंट जैसा माहौल है।
बच्चों का मनाती हैं जन्मदिन
स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चों का राधा अपने स्कूल के शिक्षकों के साथ जन्मदिन मनाती है। इससे बच्चों में पढ़ने आने के लिए उत्साह भी रहता है। इस दौरान वह खुद स्कूल की सजावट करती है। बताया कि उनका एक ही लक्ष्य है कि उनके स्कूल से बच्चे नवोदय में प्रवेश लें। इसके लिए वह अपने स्टाफ के साथ मिलकर अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाती हैं।
मिल चुका स्वच्छता पुरस्कार
कुछ दिन पहले ही स्वच्छता पुरस्कार के लिए उनका स्कूल चयनित हुआ था। इसके लिए जिलाधिकारी पीसी श्रीवास्तव उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं।
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प्रधानाध्यापक राधा यादव बताती हैं कि उनकी नियुक्ति 2015 में हुई थी। उस समय विद्यालय में नामांकन तो 70 था, लेकिन आते 25-30 ही थे। इसके पीछे का कारण था कि स्कूल परिसर में जगह-जगह गड्ढे और चहारदीवारी न होना था। इसके अलावा स्कूल का रास्ता भी ऊबड़-खाबड़ था। स्कूल में उनकी तैनाती किसी चुनौती से कम नहीं थी।
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एक तरफ स्कूल की दशा सुधारनी थी तो दूसरी तरफ बच्चों का भविष्य बनाने के लिए उनका पढ़ना भी जरूरी था। बताया कि सबसे पहले अपने खर्च पर सड़क के गड्ढे भरवाना शुरू किए। यह देख प्रधान ने हाथ बढ़ाया और देखते ही देखते सड़क बन गई।
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इसके बाद बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए स्कूल के अन्य शिक्षकों के साथ घर-घर संपर्क कर छात्र संख्या बढ़ानी शुरू की। आज स्कूल में छात्रों की संख्या 113 है और बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बताया कि वहीं महिला सशक्तीकरण के लिए सिंह वाहिनी संगठन के जरिए तमाम कार्यक्रमों के आयोजन में सहयोग करती हैं। इसके अलावा स्वावलंबन के लिए ग्रामीण महिलाओं को जागरूक भी करती हैं।
गेल व एनटीपीसी से लिया सहयोग
राधा बताती हैं कि स्कूल का कायाकल्प के लिए उन्होंने गेल व एनटीपीसी से सहयोग मांगा। गेल द्वारा उनके स्कूल को टिन शेड दिया गया। उन्होंने मेहनत कर स्कूल में बेहतरीन टीएलएम (टीचर लर्निंग मैटेरियल) के साथ सजावट की। अब स्कूल में कान्वेंट जैसा माहौल है।
बच्चों का मनाती हैं जन्मदिन
स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चों का राधा अपने स्कूल के शिक्षकों के साथ जन्मदिन मनाती है। इससे बच्चों में पढ़ने आने के लिए उत्साह भी रहता है। इस दौरान वह खुद स्कूल की सजावट करती है। बताया कि उनका एक ही लक्ष्य है कि उनके स्कूल से बच्चे नवोदय में प्रवेश लें। इसके लिए वह अपने स्टाफ के साथ मिलकर अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाती हैं।
मिल चुका स्वच्छता पुरस्कार
कुछ दिन पहले ही स्वच्छता पुरस्कार के लिए उनका स्कूल चयनित हुआ था। इसके लिए जिलाधिकारी पीसी श्रीवास्तव उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं।

टीएलएम मैटेरियल दिखाती राधा यादव। संवाद- फोटो : AURAIYA