{"_id":"698f6c8d362f71f39e03e783","slug":"rabi-crops-at-risk-due-to-heat-in-february-auraiya-news-c-211-1-aur1008-139576-2026-02-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: फरवरी में गर्मी से रबी की फसलों को खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: फरवरी में गर्मी से रबी की फसलों को खतरा
Fri, 13 Feb 2026 11:55 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Fri, 13 Feb 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
फोटो-12-खेतों में खड़ी गेहूं की फसल।संवाद
- फोटो : ग्राम पंचायत धवरपारा में बना सामुदायिक शौचालय दुर्दशा का शिकार ।
बिधूना। फरवरी माह में बढ़ती गर्माहट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. रामपलट ने बताया कि इस समय तापमान का सामान्य से अधिक रहना रबी की फसलों लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
शुक्रवार को क्षेत्र में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 10 डिग्री दर्ज किया गया। हवा की रफ्तार लगभग नौ किलोमीटर प्रति घंटा रही। कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो फसलों की पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। बताया कि फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
इस समय फसल के दाने भरने या दूधिया अवस्था में होते हैं। अधिक तापमान के कारण फसल समय से पहले पकने लगती है। इससे दानों की नमी जल्दी सूख जाती है और दाने छोटे होकर सिकुड़े रह जाते हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा सरसों की फलियों में दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसमें तेल की मात्रा कम हो सकती है। डॉ. रामपलट ने बताया कि चना और मटर में अधिक तापमान के कारण फूल झड़ने लगते हैं और फलियां समय से पहले सूख सकती हैं। टमाटर में झुलसा रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है।
किसानों के लिए सुझाव
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि सुबह जल्दी या शाम के समय हल्की सिंचाई करें, ताकि खेत की नमी बनी रहे और तापमान नियंत्रित रहे। एक प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करने से फसल को गर्मी सहन करने की क्षमता मिलती है।
विज्ञापन
शुक्रवार को क्षेत्र में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 10 डिग्री दर्ज किया गया। हवा की रफ्तार लगभग नौ किलोमीटर प्रति घंटा रही। कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो फसलों की पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। बताया कि फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
विज्ञापन
इस समय फसल के दाने भरने या दूधिया अवस्था में होते हैं। अधिक तापमान के कारण फसल समय से पहले पकने लगती है। इससे दानों की नमी जल्दी सूख जाती है और दाने छोटे होकर सिकुड़े रह जाते हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा सरसों की फलियों में दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसमें तेल की मात्रा कम हो सकती है। डॉ. रामपलट ने बताया कि चना और मटर में अधिक तापमान के कारण फूल झड़ने लगते हैं और फलियां समय से पहले सूख सकती हैं। टमाटर में झुलसा रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है।
किसानों के लिए सुझाव
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि सुबह जल्दी या शाम के समय हल्की सिंचाई करें, ताकि खेत की नमी बनी रहे और तापमान नियंत्रित रहे। एक प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करने से फसल को गर्मी सहन करने की क्षमता मिलती है।