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गर्दिश में धान खरीद की प्रगति
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Wed, 16 Dec 2015 11:46 PM IST
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मौसम की मार और पंचायत चुनाव की व्यस्तता ने धान किसान के लक्ष्य को काफी पीछे धकेल दिया है। कर्मचारियों के मस्त और अधिकारियों के व्यस्त होने से ढाई माह में लक्ष्य के सापेक्ष 35.10 फीसदी ही धान खरीद हो सकी है। बचे हुए 43 दिनों में 12817 एमटी धान खरीद अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक के लिए चुनौती बनी है।
सत्र 2015-16 की धान खरीद पर नजर डालें तो शासन से जिले को प्राप्त हुए 19750 लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सात क्रय एजेसियों को नामित किया गया है। इस लक्ष्य को क्रय एजेंसीवार निर्धारित करते हुए जिले भर में 16 सरकारी धान खरीद केंद्र संचालित हैं।
इनमें खाद्य विभाग ने 5000 एमटी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तीन, 2250 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष पीसीएफ ने चार, 1500 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष यूपीएसएस ने एक, 1000 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष यूपी एग्रो ने एक, 3000 एमटी लक्ष्य की प्राप्ति को एफसीआई ने एक, 3000 एमटी लक्ष्य के लिए कर्मचारी कल्याण निगम ने दो तथा एमसीसीएफ ने 4000 एमटी लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिले में गत् एक अक्तूबर से चार केंद्र खोल रखे हैं।
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मौसम की मार से बिगड़ी धान खरीद की गुणवत्ता और धान खरीद के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से चुनावी व्यस्तता के चलते बरती गई ढिलाई से धान खरीद सत्र के लिए शासन की ओर से निर्धारित 1410 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य तक किसानों की पहुंच नहीं हो सकी है।
समय से क्रय केंद्रों का न खुलना भी जिले में धान खरीद प्रगति पिछडने का प्रमुख कारण उभर कर सामने आया है। 19750 मीट्रिक टन लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिछले ढाई माह से संचालित क्रय केंद्रों से अब तक महज 6933 एमटी ही धान की खरीद हो सकी है, जो जिले की धान खरीद प्रगति के सितारे को गर्दिश में ले जाने में सहायक साबित हो रही है।
इनसेट
निजी आढ़तों पर अंबार
औरैया। सरकारी क्रय क्रेंद्रों में मानकों में नुक्स निकाल रिजेक्ट किए जा रहे धान की निजी आढ़तों में आवक होने से जिले की कृषि उत्पादन मंडी समितियों में धान के अंबार लगे हैं। हां इतना जरूर है कि मजबूरीवश निजी आढ़तों की ओर रूख कर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत मिलने पर भी किसान संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं।
कोट --
चुनावी व्यस्तता के चलते जिले में धान खरीद की प्रगति अपेक्षित नहीं हो सकी है। खरीद प्रगति बढ़ाने के लिए क्रय एजेसियों को निर्देशित किया गया है। सत्र समाप्ति तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
दिलीप कुमार
प्रभारी डिप्टी आरएमओ
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सत्र 2015-16 की धान खरीद पर नजर डालें तो शासन से जिले को प्राप्त हुए 19750 लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सात क्रय एजेसियों को नामित किया गया है। इस लक्ष्य को क्रय एजेंसीवार निर्धारित करते हुए जिले भर में 16 सरकारी धान खरीद केंद्र संचालित हैं।
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इनमें खाद्य विभाग ने 5000 एमटी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तीन, 2250 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष पीसीएफ ने चार, 1500 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष यूपीएसएस ने एक, 1000 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष यूपी एग्रो ने एक, 3000 एमटी लक्ष्य की प्राप्ति को एफसीआई ने एक, 3000 एमटी लक्ष्य के लिए कर्मचारी कल्याण निगम ने दो तथा एमसीसीएफ ने 4000 एमटी लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिले में गत् एक अक्तूबर से चार केंद्र खोल रखे हैं।
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मौसम की मार से बिगड़ी धान खरीद की गुणवत्ता और धान खरीद के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से चुनावी व्यस्तता के चलते बरती गई ढिलाई से धान खरीद सत्र के लिए शासन की ओर से निर्धारित 1410 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य तक किसानों की पहुंच नहीं हो सकी है।
समय से क्रय केंद्रों का न खुलना भी जिले में धान खरीद प्रगति पिछडने का प्रमुख कारण उभर कर सामने आया है। 19750 मीट्रिक टन लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिछले ढाई माह से संचालित क्रय केंद्रों से अब तक महज 6933 एमटी ही धान की खरीद हो सकी है, जो जिले की धान खरीद प्रगति के सितारे को गर्दिश में ले जाने में सहायक साबित हो रही है।
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निजी आढ़तों पर अंबार
औरैया। सरकारी क्रय क्रेंद्रों में मानकों में नुक्स निकाल रिजेक्ट किए जा रहे धान की निजी आढ़तों में आवक होने से जिले की कृषि उत्पादन मंडी समितियों में धान के अंबार लगे हैं। हां इतना जरूर है कि मजबूरीवश निजी आढ़तों की ओर रूख कर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत मिलने पर भी किसान संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं।
कोट --
चुनावी व्यस्तता के चलते जिले में धान खरीद की प्रगति अपेक्षित नहीं हो सकी है। खरीद प्रगति बढ़ाने के लिए क्रय एजेसियों को निर्देशित किया गया है। सत्र समाप्ति तक लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
दिलीप कुमार
प्रभारी डिप्टी आरएमओ