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बिजली बनीं बैरन, कहां से आए दुल्हन
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Sun, 08 Feb 2015 12:19 AM IST
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इटावा के सांसद अशोक दोहरे की जन्मस्थली हैदरपुर ग्राम पंचायत के मजरा महाराजपुर के युवाओं के लिए बिजली बैरन बनी हैं। यहां तमाम युवक शादी के इंतजार में हैं, लेकिन जो भी रिश्ते हैं, गांव की दुर्दशा उन्हें वापस भेज देती है।
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अशोक दोहरे के सांसद बनने के बाद इन ग्रामीणों को भरोसा था कि विकास के छींटे उनके गांव में भी पड़ेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। स्थित यह है कि वर्षों पहले जिन लोगों को शादी में उपहार स्वरूप कूलर पंखे मिले, वह भूसे की कोठरी में पडे हैं। पेश है राजीव दुबे/सुवीर त्रिपाठी की आंखों देखी रिपोर्ट
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भूसे की कोठरी में रखे हैं कूलर- मुरादगंज कस्बे से फफूंद मार्ग में छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित महाराजपुर गांव में तकरीबन 700 की आबादी हैं। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए गांव के 200 पुरुष तथा 150 महिलाएं अपना योगदान भी दे रहीं हैं।
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गांव के लोगों के बेसिक शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए एक प्राथमिक विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम मौजूद हैं। गांव के पेयजल संसाधनों की बात करें तो मौजूदा इटावा सांसद अशोक दोहरे के पैतृक गांव रमपुरा में स्थापित ओवरहैड टैंक की पाइप लाइन गांव के मुहाने तक आकर बदबूदार नाली की शक्ल में तब्दील दिखाई दी।
गांव के परिषदीय विद्यालय में लगा सरकारी हैंडपंप भी खराब मिला। गांव की आधी आबादी के लोगों के पास अपना स्वच्छ शौचालय भी नहीं दिखाई दिया। गांव की इन सभी आधी-अधूरी सुविधाओं से बड़ी टीस यहां के लोगों की गांव का विद्युतीकरणविहीन होना है।
बिन बिजली सब सून होने की कहावत वृद्ध हो या नवविवाहिता, छात्र वर्ग हो अथवा युवा सभी के चेहरों पर इसका मलाल स्पष्ट झलकता दिखाई दिया। अमर उजाला टीम की ओर से गांव में बिजली की बात छेड़ी गई तो ऐसा प्रतीत हुआ कि मानों यहां के लोगों की दुखती रग पर हाथ रख दिया गया हो।
विद्युतीकरण न होने से यहां के लोगों के सारे काम लालटेन की रोशनी से पूरे होते हैं। जबकि गांव के संपन्न लोग डीसी बिजली का वैकल्पिक इंतजाम किए हुए भी मिले, पर उन्हें बैटरी चार्ज करने के लिए सांसद के गांव तक की दौड़ लगानी पड़ रही है।
गांव में चक्की और तेल पिराई के लिए स्पेलर तो है नहीं इसके लिए भी लोगों को कस्बे तक जाने की मुसीबत उठानी पड़ रही है। सड़क के किनारे गांव बसा होने से कठिनाई से ही सही पर शादी-ब्याह भी देर से हो रहे हैं। यही वजह है कि महारजपुर गांव में 175 युवा ऐसे हैं जिनकी उम्र 30 वर्ष और उससे पार हो चुकी है।
बिजली के अभाव में लोगों की दिनचर्या जानने को अमर उजाला की टीम जब गांव के देव सिंह राजपूत के घर पहुंची तो घर की दीवारों में बनाए गए आले (छोटी अलमारी) की ऊपरी सतह तक काली दिखाई दी।
पूछा तो बताया कि यहां पर ढिबरी रखकर जलाते हैं। इतना ही घर के कोठरे में रखे भूसे के ढेर में बेटे पुष्पेंद्र की पिछले साल हुई शादी में मिला कूलर रखा हुआ दिखाई दिया।
आजादी के पहले जैसा ही है गांव-इन बुढ़ी आंखों ने अंग्रेजी हुकूमत भी देखी जब पड़ोसी गांव हैदरपुर में नील की कोठियां होती थी। जमींदार की हवेली भी देखी, जहां पर हम बापू के साथ काम करने जाते थे और इन्ही आंखों ने देश को तिरंगे की शान में लिपटे आजादी की सांस लेते भी देखा।
अब तो सब कुछ बदल गया लला, पर हमारे गांव की दशा आज भी आजादी के पहले जैसी ही है। अब तो कमजोर आंखें अपने घर को जगमग होता देखना चाहती हैं।
काश, हम भी शरबतिया की तरह देखते टीबी- गांव माहराजपुर के पड़ताल दौरान अमर उजाला टीम को खोतों से वापस लौट रही एक महिला दिखाई दी। पूछने पर नाम सुनीता देवी बताया। जब उससे देश के प्रधानमंत्री का नाम पूंछा गया तो वह नहीं बता पाई।
शाम होते ही होने लगती ऊब- पीहर के दूधिए बल्ब की रोशनी से जगमगाने वाले लोहिया ग्राम चौकी में मायके से शादी के बाद ससुराल महाराजपुर में रह रही नवविवाहिता श्रीमती माला तिवारी से जब बिजली के बारे में पूंछा तो उसने बस इतना ही कहा कि पीहर में शाम होते चारों तरफ रोशनी का माहौल हो जाता था पर यहां ऐसा कुछ नहीं।
ग्राम प्रधान हैदरपुर मुलायम सिंह दोहरे जो रिश्ते में सांसद अशोक दोहरे के सगे चाचा भी हैं, कहते हैं भतीजे के सांसद बनने से पहले भी विद्युतीकरणविहीन गांव महाराजपुर गांव में विद्युतीकरण कराने के प्रयास किया। विधान सभा चुनाव में भी मौजूदा विधायक मदन सिंह गौतम ने बिजली का वादा किया था, जो कि पूरा नहीं कर सके।