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कई सरकारें आईं और चलीं गईं: अधूरा है औरैया में प्लास्टिक सिटी का सपना, 2012 में हुआ था एसपीवी का गठन

Sun, 30 Jan 2022 08:21 PM IST
प्रशांत कुमार गोपाल शंकर पोरवाल, दिबियापुर (औरैया)
गोपाल शंकर पोरवाल, दिबियापुर (औरैया) Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 30 Jan 2022 08:21 PM IST
सार

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पास में ही प्लास्टिक सिटी में प्लास्टिक संबंधी संयंत्रों की स्थापना हो जाए तो क्षेत्र और जिले के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े।

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Plastic industries have not yet been established in proposed Plastic City in Auraiya for years
Auraiya Plastic City - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कई सरकारें आईं और चलीं गईं लेकिन दिबियापुर औरैया वर्षों से प्रस्तावित प्लास्टिक सिटी में प्लास्टिक उद्योगों की स्थापना अभी तक नहीं हो पाई है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि प्लास्टिक सिटी की स्थापना होने पर जिले के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा।

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गेल में उत्पादित कच्चे माल की आपूर्ति आसानी से मिलने के कारण कंचौसी मोड़ के समीप प्लास्टिक के उद्योगों की स्थापना का सपना देखा गया था। दिबियापुर विधानसभा में कंचौसी मोड़ के समीप प्लास्टिक सिटी की स्थापना की गई। यहां पर लगभग 300 एकड़ भूमि प्लास्टिक सिटी के लिए है। यहां पर कई प्लास्टिक उद्योगों की स्थापना की जानी है। यहां पर औद्योगिक, आवासीय टाउनशिप, बाजार, बैंक, स्कूल, छात्रावास, पार्क आदि बनना प्रस्तावित है।
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कौशल विकास केंद्र, टूल रूम, ट्रीटमेंट प्लांट, वेयरहाउस जैसी सुविधाएं भी मिलनीं हैं। प्लास्टिक के कच्चे माल की आपूर्ति के लिए गेल के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए जा चुके हैं। औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया तेजी के साथ चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पास में ही प्लास्टिक सिटी में प्लास्टिक संबंधी संयंत्रों की स्थापना हो जाए तो क्षेत्र और जिले के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े। अभी क्षेत्र के युवाओं को नौकरी के लिए बाहर भटकना पड़ता है। समीप के गांव लुखरपुरा में अलाव के आसपास आग सेंक रहे ग्रामीणों गंगा सिंह, संदीप सिंह, छोटा सिंह, सौरभ सिंह, रूप सिंह एवं युवती संतोषी आदि भी प्लास्टिक सिटी के बनने को लेकर चर्चा करते दिखे।
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वर्ष 2012 में एसपीवी का हुआ था गठन

यूपी प्लास्टिक सिटी डेवलेपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एसपीवी)का गठन किया गया। वर्ष 2012 के अंत में प्लास्टिक उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को ड्राफ्ट के रूप में 5 हजार रुपए जमा करके पंजीकरण कराने के लिए कहा गया था। एसपीवी पार्टनर बनने वालों को इंडस्ट्रीज लगाने के लिए प्लाट आवंटित करने की बात कही गई। आशाओं, आकांक्षाओं एवं उम्मीदों से लबरेज सैकड़ों स्थानीय लोगों ने 5 हजार रुपए ड्राफ्ट के रूप में जमा करके पंजीकरण भी कराए। लोगों के उत्साह को कैश कराने के लिए प्लांट लगाने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट सबमिट भी कराई गई। 19 अप्रैल 2013 को अखबारों में विज्ञप्ति देकर बताया गया कि एसपीवी में सदस्यता शुल्क जमा करने वाले लोग भूखंड की प्रीमियम दर 1200 रुपए प्रति वर्ग मीटर की 10 फीसदी धनराशि जमा कराएं। इसके लिए 12 अगस्त 2013 को साक्षात्कार के लिए भी बुलाया गया। परंतु प्लास्टिक सिटी अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी। एसपीवी में पंजीकरण कराने वाले अधिकतर लोग प्लास्टिक सिटी बननेे की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं। तो कई ऐसे हैं जो अपना पंजीकरण का रुपया वापस पाने के लिए जोड़ तोड़ लगा रहे हैं।

274.4 एकड़ पर स्थापित होगी इंडस्ट्रीज

उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट अथारिटी की वेबसाइट के अनुसार गेल, एनटीपीसी, सीपेट, एमएसएमई-डीआई एवं फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट (हुडको, सिडबी, नाबार्ड एवं अन्य) के सहयोग से दिबियापुर का प्लास्टिक पार्क स्थापित होना है। 274.4 एकड़ भूमि पर इंडस्ट्रियल यूनिट एवं 84.93 एकड़ भूमि पर रेजीडेंशियल यूनिट एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट होना है। कंचौसी एवं फफूंद रेलवे स्टेशनों से गुजरा रेलवे का ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्लास्टिक सिटी को रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए मुंबई में हुआ था रोड शो

अखिलेश सरकार में औरैया के प्लास्टिक सिटी बसाने के लिए काफी प्रयास किए गए। परंतु प्लास्टिक सिटी बस नहीं पाई। यहां तक कि इसके लिए मुंबई में रोड शो आयोजित कर बड़े उद्योगपतियों को आकर्षित करने का भी प्रयास किया गया था। पिछले महीनों में डीएम औरैया ने यहां पर कब्जा वाली भूमि को खाली कराया था। यूपीसीडा का गेल के साथ हुए अनुबंध के बाद प्लास्टिक सिटी में प्लाट, निवेश मित्र पोर्टल के जरिए दिए जा रहे हैं।

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