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साधारण मौत पर भी कोरोना ग्रसित होने की आशंका जता लोग फैला रहे भ्रम
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कोरोना संक्रमण को लेकर लोगों में इस कदर दहशत है कि अब साधारण मौत को भी कोरोना से जोड़कर देखने लगे हैं।
इसको लेकर स्वास्थ्य महकमे पर मृतक की जांच कराने के लिए सैंपल लेने का दबाव बनाना शुरू कर देते हैं। अब तक ऐसे तीन मामलों में गांव वालों के दबाव के चलते स्वास्थ्य महकमे ने मृतकों के सैंपल जांच को भेजे, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई हे।
ऐसे में इस तरह लोगों की आशंकाओं से जहां मृतक के परिजनों को सैंपल रिपोर्ट आने तक शव का अंतिम संस्कार न कर पाने का मलाल हो रहा है, तो वहीं पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के लिए भी यह परेशानी का सबब बन रहा है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव बहादुरपुर इंगुठिया में एक महीने पहले सूरत से आए मुन्ना (40) पुत्र उदयनारायण की 26 मई को सुबह बीमारी के चलते मौत हो गई। क्षेत्र के लोगों ने मौत कोरोना से होने आशंका जताकर पुलिस प्रशासन से सैंपल भेजकर जांच कराने की मांग की।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से जानकारी करने के बाद सैंपल भेजने से इंकार कर दिया, लेकिन गांव वालों के दबाव में सैंपल भेजना पड़ा। गुरुवार को इसकी निगेटिव रिपोर्ट आई।
मंगलवार की रात गांव पाता की मड़ैया निवासी रामचंद्र की पुत्री गोल्डी (22) घर के कमरे के अंदर संदिग्ध अवस्था में मृत पाई गई थी। इसकी जानकारी जैसे ही गांव वालों को हुई तो युवती की मौत पर कोरोना की आशंका जताते हुए सैंपल भेजने की मांग उठाई।
इस पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वहां डॉक्टरों ने मृतका का सैंपल जांच के लिए सैफई भेजा। गुरुवार को आई रिपोर्ट में युवती की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई।
फफूंद थाना क्षेत्र के गांव जगजीवनपुर में बुखार के चलते जूली पत्नी ब्रजमोहन दोहरे की मौत होने पर गांव वालों ने कोरोना की आशंका जता जिला प्रशासन से सैंपल की जांच कराने की मांग की थी। जिसमें 14 मई को मृतका की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली थी।
प्राय: देखा जा रहा है कि साधारण मौत को भी लोग कोरोना से जोड़कर देख रहे हैं और मृतक की जांच करने के लिए सैंपल लेने का दबाव बनाते हैं, यह गलत है। स्वास्थ्य विभाग खुद तय करेगा कि किसका सैंपल लिया जाना है और किसका नहीं। -सुनीति, एसपी, औरैया
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इसको लेकर स्वास्थ्य महकमे पर मृतक की जांच कराने के लिए सैंपल लेने का दबाव बनाना शुरू कर देते हैं। अब तक ऐसे तीन मामलों में गांव वालों के दबाव के चलते स्वास्थ्य महकमे ने मृतकों के सैंपल जांच को भेजे, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई हे।
ऐसे में इस तरह लोगों की आशंकाओं से जहां मृतक के परिजनों को सैंपल रिपोर्ट आने तक शव का अंतिम संस्कार न कर पाने का मलाल हो रहा है, तो वहीं पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के लिए भी यह परेशानी का सबब बन रहा है।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव बहादुरपुर इंगुठिया में एक महीने पहले सूरत से आए मुन्ना (40) पुत्र उदयनारायण की 26 मई को सुबह बीमारी के चलते मौत हो गई। क्षेत्र के लोगों ने मौत कोरोना से होने आशंका जताकर पुलिस प्रशासन से सैंपल भेजकर जांच कराने की मांग की।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से जानकारी करने के बाद सैंपल भेजने से इंकार कर दिया, लेकिन गांव वालों के दबाव में सैंपल भेजना पड़ा। गुरुवार को इसकी निगेटिव रिपोर्ट आई।
मंगलवार की रात गांव पाता की मड़ैया निवासी रामचंद्र की पुत्री गोल्डी (22) घर के कमरे के अंदर संदिग्ध अवस्था में मृत पाई गई थी। इसकी जानकारी जैसे ही गांव वालों को हुई तो युवती की मौत पर कोरोना की आशंका जताते हुए सैंपल भेजने की मांग उठाई।
इस पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वहां डॉक्टरों ने मृतका का सैंपल जांच के लिए सैफई भेजा। गुरुवार को आई रिपोर्ट में युवती की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई।
फफूंद थाना क्षेत्र के गांव जगजीवनपुर में बुखार के चलते जूली पत्नी ब्रजमोहन दोहरे की मौत होने पर गांव वालों ने कोरोना की आशंका जता जिला प्रशासन से सैंपल की जांच कराने की मांग की थी। जिसमें 14 मई को मृतका की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली थी।
प्राय: देखा जा रहा है कि साधारण मौत को भी लोग कोरोना से जोड़कर देख रहे हैं और मृतक की जांच करने के लिए सैंपल लेने का दबाव बनाते हैं, यह गलत है। स्वास्थ्य विभाग खुद तय करेगा कि किसका सैंपल लिया जाना है और किसका नहीं। -सुनीति, एसपी, औरैया