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पानी की किल्लत, राशन को भटक रहे प्रवासी श्रमिक
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बेला (औरैया)। ग्राम पंचायत बरुर्कुलासर के मजरा ढिपारा में पानी की टंकी पांच माह से खराब पड़ी हुई है। गांव मे लगे छह सरकारी हैंडपंप भी खराब हैं। कुछ लोगों के घरों में नलों से गंदा पानी निकलता है। जिससे ग्रामीण दूषित पानी पीने को विवश है। कोरोना महामारी में अन्य प्रदेशों से आए प्रवासी श्रमिक रोजगार और राशन तक के लिए भटक रहे हैं।
बिधूना विकास खंड के ग्राम पंचायत बरुर्कुलासर के मजरा ढिपारा की हालत दयनीय है। गांव की कुल आबादी लगभग 1500 है, जिसमें 400 लोग मतदाता हैं। यहां स्वच्छ पेयजल आपूर्ति करने के लिए 2005 में जल निगम ने पानी की टंकी का निर्माण कराया था। मजरा ढिपारा व बरुर्कुलासर में पाइपलाइन बिछाई गई थी। देखरेख के अभाव में पाइप लाइन लीकेज हो गई। जिससे पेय जलापूर्ति बाधित है। टंकी आपरेटर अजीत सिंह ने बताया कि
लगभग पांच माह से सबमर्सिबल खराब होने के कारण आपूर्ति बंद है । समस्या से ग्राम प्रधान व सचिव को अवगत कराने के बाद भी अभी तक निदान नहीं हो सका। गांव में राधेश्याम के घर के सामने, आंबेडकर मूर्ति के पास समेत 6 इंडिया मार्का हैंडपंप से पानी नहीं निकलता है। ग्रामीण लाखन सिंह, उदयराम, बांकेलाल, श्रीराम, रामनारायण ने बताया कि बाशिंदे दूषित पानी पीने को विवश हैं। दूषित पानी से तमाम संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है ।
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गांव निवासी छुन्नी देवी पत्नी स्व. रक्षपाल ने बताया कि उसके तीन पुत्र बादशाह , नंदराम व शिवम है। उसके पास मात्र दो बीघा जमीन है। पक्का मकान नहीं है। झोपड़ी बनाकर पुत्रों के साथ रहती हूं। पुत्र मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। कई बार ग्राम प्रधान अभिमन्यु सिंह व सचिव अरविंद दोहरे से एक आवास व शौचालय की मांग की, किंतु पात्र होने के बावजूद सरकारी योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल सका ।
लॉकडाउन से गांव निवासी राघवेंद्र, नीरज, देवेंद्र, आलोक, रामकुमार, दयाशंकर, महावीर, अवनीश, विपिन, सहित लगभग 65 प्रवासी श्रमिक अन्य प्रदेशों से नौकरी छोड़ कर वापस अपने गांव आ गए थे। तकरीबन 50 मजदूर गांव में कोई काम न मिलने के कारण वापस नौकरी की तलाश में चले गए। मौके पर मौजूद प्रवासी श्रमिकों ने बताया कि न तो मनरेगा के तहत कोई काम दिया और न ही उनके खाने पीने के लिए राशन मुहैया कराया। खुशी गेस्ट हाउस व गांव के स्कूल में क्वारंटीन रहे थे। राशन कार्ड न होने के कारण कोटेदार ने राशन देने से मना कर दिया। भुखमरी के कगार पर हैं। सरकारी आदेश फाइलों तक ही सीमित रह गए हैं।
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बिधूना विकास खंड के ग्राम पंचायत बरुर्कुलासर के मजरा ढिपारा की हालत दयनीय है। गांव की कुल आबादी लगभग 1500 है, जिसमें 400 लोग मतदाता हैं। यहां स्वच्छ पेयजल आपूर्ति करने के लिए 2005 में जल निगम ने पानी की टंकी का निर्माण कराया था। मजरा ढिपारा व बरुर्कुलासर में पाइपलाइन बिछाई गई थी। देखरेख के अभाव में पाइप लाइन लीकेज हो गई। जिससे पेय जलापूर्ति बाधित है। टंकी आपरेटर अजीत सिंह ने बताया कि
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लगभग पांच माह से सबमर्सिबल खराब होने के कारण आपूर्ति बंद है । समस्या से ग्राम प्रधान व सचिव को अवगत कराने के बाद भी अभी तक निदान नहीं हो सका। गांव में राधेश्याम के घर के सामने, आंबेडकर मूर्ति के पास समेत 6 इंडिया मार्का हैंडपंप से पानी नहीं निकलता है। ग्रामीण लाखन सिंह, उदयराम, बांकेलाल, श्रीराम, रामनारायण ने बताया कि बाशिंदे दूषित पानी पीने को विवश हैं। दूषित पानी से तमाम संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है ।
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गांव निवासी छुन्नी देवी पत्नी स्व. रक्षपाल ने बताया कि उसके तीन पुत्र बादशाह , नंदराम व शिवम है। उसके पास मात्र दो बीघा जमीन है। पक्का मकान नहीं है। झोपड़ी बनाकर पुत्रों के साथ रहती हूं। पुत्र मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। कई बार ग्राम प्रधान अभिमन्यु सिंह व सचिव अरविंद दोहरे से एक आवास व शौचालय की मांग की, किंतु पात्र होने के बावजूद सरकारी योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल सका ।
लॉकडाउन से गांव निवासी राघवेंद्र, नीरज, देवेंद्र, आलोक, रामकुमार, दयाशंकर, महावीर, अवनीश, विपिन, सहित लगभग 65 प्रवासी श्रमिक अन्य प्रदेशों से नौकरी छोड़ कर वापस अपने गांव आ गए थे। तकरीबन 50 मजदूर गांव में कोई काम न मिलने के कारण वापस नौकरी की तलाश में चले गए। मौके पर मौजूद प्रवासी श्रमिकों ने बताया कि न तो मनरेगा के तहत कोई काम दिया और न ही उनके खाने पीने के लिए राशन मुहैया कराया। खुशी गेस्ट हाउस व गांव के स्कूल में क्वारंटीन रहे थे। राशन कार्ड न होने के कारण कोटेदार ने राशन देने से मना कर दिया। भुखमरी के कगार पर हैं। सरकारी आदेश फाइलों तक ही सीमित रह गए हैं।