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Auraiya News: पानी में गए एक करोड़, मरम्मत के बाद भी यमुना पुल पर रोका यातायात
Mon, 17 Jun 2024 11:10 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 17 Jun 2024 11:10 PM IST
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औरैया। बिलराया-पनवाड़ी मार्ग पर शेरगढ़ घाट में यमुना नदी पर बना पुल एक बार विवादों में घिर गया है। पीडब्ल्यूडी की ओर से दो माह तक कराई गई मरम्मत के बाद अक्तूबर 2023 से इसे लोगों के लिए खोला गया था। अब इसे एक बार फिर यात्री वाहनों व डंपर के लिए बंद कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि पुल का लोड बियरिंग टेस्ट होना है।
यमुना नदी स्थित शेरगढ़ घाट पुल पर वाहनों के आवागमन के दौरान कंपन अधिक होता था। पुल के ज्वाइंटर में कमी और बियरिंग जाम होने की जानकारी सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी ने विशाखापट्टनम से इंजीनियरों की टीम बुलवा कर इसकी मरम्मत करवाई। इसके लिए लगभग दो माह तक पुल को बंदरखना पड़। अब सभी प्रकार के वाहनों को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से गुजरने को मजबूर होना पड़ा।
जिससे उनको भारी भरकम टोल भी भरना पड़ा। मरम्मत के बाद पुल को खोला गया। लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने पुल के अस्तित्व पर खतरा बताते हुए उसके लोड बियरिंग की जांच कराए जाने तक 30 टन से अधिक वजन के वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी। 11 नवंबर 2023 से यह रोक आज भी लागू है।
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अब सवाल यह कि जब पुल की मरम्मत पर एक करोड़ 13 लाख रुपये खर्च कर बियरिंग, ज्वाइंटर, सड़क सब कुछ दुरुस्त किया गया था। तो अब पुल पर वाहनों का आवागमन क्यों रोका गया। वह भी तब जब मरम्मत के लगभग दो माह से बिना किसी बाधा के पुल से वाहनों का आवागमन हो रहा था। लोगों का कहना है कि इस पूरी साजिश के पीछे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल को तो फायदा पहुंचाना की कोशिश है।
रोज गुजरते हैं 1200 से ज्यादा वाहन
यमुना नदी पुल से प्रति दिन लगभग 1200 से अधिक वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में इन वाहनों के बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से गुजरने पर प्रतिदिन एक्सप्रेसवे के टोल को लगभग पांच से सात लाख रुपये की आमदनी होगी। इससे वाहन स्वामियों का शोषण हो रहा है। इसके साथ ही मौरंग, गिट्टी, मिट्टी लेकर आने-जाने वाले डंपर, ट्रकों पर लगने वाला टोल टैक्स का असर भवन निर्माण कराने वालों पर भारी पड़ेगा।
इनसेट-- -
1994 में हुआ था पुल का उद्घाटन
इस पुल का निर्माण 1994 में हुआ था। इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था। तब दावा किया गया था कि इसे बहुत कम समय में पूरा कर लिया गया है। लेकिन बाद में पुल में उपयोग की गई सामग्री पर सवाल उठने लगे। अब एक बार फिर आवागमन बंद होने से कहा जा रहा है कि आखिर पुल निर्माण में भविष्य का ध्यान क्यों नहीं रखा गया।
बोले जिम्मेदार-- -
एक्सपर्ट की टीम ने पिछले दिनों पुल की जांच की थी। इसमें सात नंबर पिलर बेयरिंग में गड़बड़ी होने की आशंका जताई गई है। अब जांच टीम रिपोर्ट मुख्यालय भेजेगी। वहां से जो निर्णय लिया जाएगा। उसी आधार पर वाहनों को अनुमति दी जाएगी।
एसके तिवारी, एई, पीडब्ल्यूडी, औरैया।
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यमुना नदी स्थित शेरगढ़ घाट पुल पर वाहनों के आवागमन के दौरान कंपन अधिक होता था। पुल के ज्वाइंटर में कमी और बियरिंग जाम होने की जानकारी सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी ने विशाखापट्टनम से इंजीनियरों की टीम बुलवा कर इसकी मरम्मत करवाई। इसके लिए लगभग दो माह तक पुल को बंदरखना पड़। अब सभी प्रकार के वाहनों को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से गुजरने को मजबूर होना पड़ा।
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जिससे उनको भारी भरकम टोल भी भरना पड़ा। मरम्मत के बाद पुल को खोला गया। लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने पुल के अस्तित्व पर खतरा बताते हुए उसके लोड बियरिंग की जांच कराए जाने तक 30 टन से अधिक वजन के वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी। 11 नवंबर 2023 से यह रोक आज भी लागू है।
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अब सवाल यह कि जब पुल की मरम्मत पर एक करोड़ 13 लाख रुपये खर्च कर बियरिंग, ज्वाइंटर, सड़क सब कुछ दुरुस्त किया गया था। तो अब पुल पर वाहनों का आवागमन क्यों रोका गया। वह भी तब जब मरम्मत के लगभग दो माह से बिना किसी बाधा के पुल से वाहनों का आवागमन हो रहा था। लोगों का कहना है कि इस पूरी साजिश के पीछे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल को तो फायदा पहुंचाना की कोशिश है।
रोज गुजरते हैं 1200 से ज्यादा वाहन
यमुना नदी पुल से प्रति दिन लगभग 1200 से अधिक वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में इन वाहनों के बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से गुजरने पर प्रतिदिन एक्सप्रेसवे के टोल को लगभग पांच से सात लाख रुपये की आमदनी होगी। इससे वाहन स्वामियों का शोषण हो रहा है। इसके साथ ही मौरंग, गिट्टी, मिट्टी लेकर आने-जाने वाले डंपर, ट्रकों पर लगने वाला टोल टैक्स का असर भवन निर्माण कराने वालों पर भारी पड़ेगा।
इनसेट
1994 में हुआ था पुल का उद्घाटन
इस पुल का निर्माण 1994 में हुआ था। इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था। तब दावा किया गया था कि इसे बहुत कम समय में पूरा कर लिया गया है। लेकिन बाद में पुल में उपयोग की गई सामग्री पर सवाल उठने लगे। अब एक बार फिर आवागमन बंद होने से कहा जा रहा है कि आखिर पुल निर्माण में भविष्य का ध्यान क्यों नहीं रखा गया।
बोले जिम्मेदार
एक्सपर्ट की टीम ने पिछले दिनों पुल की जांच की थी। इसमें सात नंबर पिलर बेयरिंग में गड़बड़ी होने की आशंका जताई गई है। अब जांच टीम रिपोर्ट मुख्यालय भेजेगी। वहां से जो निर्णय लिया जाएगा। उसी आधार पर वाहनों को अनुमति दी जाएगी।
एसके तिवारी, एई, पीडब्ल्यूडी, औरैया।