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Auraiya News: हाईड्रोजन के उपयोग के लिए एनटीपीसी संयंत्र की डिजाइन में होगा बदलाव
Mon, 24 Apr 2023 12:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 24 Apr 2023 12:06 AM IST
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दिबियापुर (औरैया)। एनटीपीसी में न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन करते हुए सस्ती बिजली उत्पादन के लिए तैयारी हो रही है। छह माह पहले देश की महारत्न कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड का जापान की मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज और एमपीआई लिमिटेड के साथ औरैया गैस विद्युत संयंत्र में हाइड्रोजन को- फायरिंग की व्यवहार्यता प्रदर्शन के लिए समझौता हुआ था। अब कई दौर की बैठकों के बाद संयंत्र की डिजाइन में आवश्यक बदलाव के लिए जापानी कंपनी विश्लेषण कर रही है।
दिबियापुर स्थित एनटीपीसी औरैया में इस समय गैस और नेफ्था आधारित 664 मेगावाट बिजली उत्पादन का संयंत्र लगा है। प्रारंभिक ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस और गैस की अनुपलब्धता पर नेफ्था का प्रयोग होता है। प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन नहीं होता है। जबकि गैस टरबाइन में हाइड्रोजन को-फायरिंग प्रक्रिया कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अक्टूबर 2022 में हुए समझौता के तहत दोनों कंपनियां अध्ययन करने के लिए सहभागिता करेंगी।
यह अध्ययन हाइड्रोजन के विभिन्न हिस्सों के लिए को-फायरिंग की प्रमुख क्रियाओं की पहचान करेगा। कंपनियां एनटीपीसी औरैया गैस आधारित संयुक्त चक्रीय विद्युत संयंत्र में हाइड्रोजन को-फायरिंग शुरू करने को लेकर अध्ययन करने और प्रमुख कार्यों को चिन्हित करने के लिए सहभागिता करेंगी। यह अध्ययन हाइड्रोजन के विभिन्न हिस्सों जैसे कि पांच फीसदी, 15 फीसदी, 30 फीसदी, 50 फीसदी और 100 फीसदी के संबंध में को-फायरिंग के लिए महत्वपूर्ण कार्योंं को चिन्हित करेगा। एनटीपीसी इस परियोजना के लिए जरूरी हाइड्रोजन की आपूर्ति करेगी। (संवाद)
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प्रदेश का तालाब पर तैरता पहला संयंत्र एनटीपीसी में लगा
एनटीपीसी अब तक 40 मेगावाट सोलर संयंत्र लगा चुकी है। इसमें 20 मेगावाट का सोलर संयंत्र जमीन पर लगा है। जबकि 20 मेगावाट का सोलर संयंत्र तालाब पर तैरता हुआ लगाया गया है। यह प्रदेश का पहला तालाब पर तैरता बिजली संयंत्र है।
बिजली उत्पादन में लागत कम आएगी
एनटीपीसी के अपर महाप्रबंधक संजय बाल्यान के अनुसार बिजली उत्पादन के लिए गैस टरबाइन में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है। प्राकृतिक गैस की कीमतें अत्यधिक होने के कारण उत्पादित होने वाली बिजली काफी महंगी होती है। हाइड्रोजन गैस पानी से मिल जाती है। प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन को विभिन्न मात्रा में मिलाकर टरबाइन चलाने से बिजली के उत्पादन में लागत कम आएगी और हमें सस्ती बिजली मिल सकेगी। इसके साथ ही प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन मिलने से कार्बन उत्सर्जन भी न्यूनतम हो जाएगा। इससे देश में वर्ष 2070 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के लक्ष्य को भी आसानी से पाया जा सकेगा। बताया कि जापानी कंपनी के साथ एनटीपीसी औरैया संयंत्र में हाईड्रोजन को-फायरिंग की तकनीक अपनाने के लिए करार हुआ है। इसके लिए प्लांट से संबंधित आवश्यक डाटा जापानी कंपनी को शेयर किया गया है। बैठक और डाटा विश्लेषण के बाद प्लांट की डिजाइन में आवश्यक परिवर्तन किया जाना है। तय किया जाएगा कि किस प्वाइंट पर कितने प्रेशर से हाईड्रोजन मिक्स होगी।
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दिबियापुर स्थित एनटीपीसी औरैया में इस समय गैस और नेफ्था आधारित 664 मेगावाट बिजली उत्पादन का संयंत्र लगा है। प्रारंभिक ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस और गैस की अनुपलब्धता पर नेफ्था का प्रयोग होता है। प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन नहीं होता है। जबकि गैस टरबाइन में हाइड्रोजन को-फायरिंग प्रक्रिया कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अक्टूबर 2022 में हुए समझौता के तहत दोनों कंपनियां अध्ययन करने के लिए सहभागिता करेंगी।
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यह अध्ययन हाइड्रोजन के विभिन्न हिस्सों के लिए को-फायरिंग की प्रमुख क्रियाओं की पहचान करेगा। कंपनियां एनटीपीसी औरैया गैस आधारित संयुक्त चक्रीय विद्युत संयंत्र में हाइड्रोजन को-फायरिंग शुरू करने को लेकर अध्ययन करने और प्रमुख कार्यों को चिन्हित करने के लिए सहभागिता करेंगी। यह अध्ययन हाइड्रोजन के विभिन्न हिस्सों जैसे कि पांच फीसदी, 15 फीसदी, 30 फीसदी, 50 फीसदी और 100 फीसदी के संबंध में को-फायरिंग के लिए महत्वपूर्ण कार्योंं को चिन्हित करेगा। एनटीपीसी इस परियोजना के लिए जरूरी हाइड्रोजन की आपूर्ति करेगी। (संवाद)
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प्रदेश का तालाब पर तैरता पहला संयंत्र एनटीपीसी में लगा
एनटीपीसी अब तक 40 मेगावाट सोलर संयंत्र लगा चुकी है। इसमें 20 मेगावाट का सोलर संयंत्र जमीन पर लगा है। जबकि 20 मेगावाट का सोलर संयंत्र तालाब पर तैरता हुआ लगाया गया है। यह प्रदेश का पहला तालाब पर तैरता बिजली संयंत्र है।
बिजली उत्पादन में लागत कम आएगी
एनटीपीसी के अपर महाप्रबंधक संजय बाल्यान के अनुसार बिजली उत्पादन के लिए गैस टरबाइन में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है। प्राकृतिक गैस की कीमतें अत्यधिक होने के कारण उत्पादित होने वाली बिजली काफी महंगी होती है। हाइड्रोजन गैस पानी से मिल जाती है। प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन को विभिन्न मात्रा में मिलाकर टरबाइन चलाने से बिजली के उत्पादन में लागत कम आएगी और हमें सस्ती बिजली मिल सकेगी। इसके साथ ही प्राकृतिक गैस में हाइड्रोजन मिलने से कार्बन उत्सर्जन भी न्यूनतम हो जाएगा। इससे देश में वर्ष 2070 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के लक्ष्य को भी आसानी से पाया जा सकेगा। बताया कि जापानी कंपनी के साथ एनटीपीसी औरैया संयंत्र में हाईड्रोजन को-फायरिंग की तकनीक अपनाने के लिए करार हुआ है। इसके लिए प्लांट से संबंधित आवश्यक डाटा जापानी कंपनी को शेयर किया गया है। बैठक और डाटा विश्लेषण के बाद प्लांट की डिजाइन में आवश्यक परिवर्तन किया जाना है। तय किया जाएगा कि किस प्वाइंट पर कितने प्रेशर से हाईड्रोजन मिक्स होगी।