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Auraiya News: बिना परमिट, फिटनेस चल रहे 71 स्कूली वाहनों को नोटिस
Tue, 25 Apr 2023 12:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 25 Apr 2023 12:05 AM IST
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औरैया। जिले में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही देखने को मिल रही है। यहां करीब 100 स्कूली वाहन ब्लैक लिस्टेड होने के बाद भी बिना किसी रोक टोक के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। हादसों से सबक लेते हुए विभाग ने 71 स्कूली वाहनों को बिना परमिट व फिटनेस के संचालित होते पाया है। जो नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे है। अब ऐसे वाहनों को नोटिस जारी की जा रही है।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक चार सैकड़ा से अधिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन स्कूलों के 300 वाहन पंजीकृत है। इसमें से औरैया शहर के अलावा, बेला, अछल्दा, बिधूना, दिबियापुर, अजीतमल क्षेत्र के स्कूलों के 71 वाहनों का परमिट और फिटनेस नहीं है। कई वाहनों के पंजीकरण की वैधता भी पूरी हो गई है। अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के बाद भी स्कूल संचालक गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं और अनफिट वाहनों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। ऐसे में घर से स्कूल और स्कूल से घर तक बच्चों को खतरे के बीच सफर तय करना पड़ रहा हैं। नए सत्र में सभी स्कूल पूरी क्षमता के साथ संचालित किए जाने लगे हैं लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उक्त वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं लिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन कतई संचालित नहीं होंगे और इन पर विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
अनदेखी में चली गई थी मासूम की जान
सदर कोतवाली क्षेत्र के ध्रुव एकेडमी में पढ़ने वाली कक्षा एक की छात्रा नैना (6) पुत्री दुर्गेश कुमार निवासी उद्यमपुर की 18 अप्रैल को स्कूल बस से उतरते समय कुचल कर मौत हो गई थी। हादसे के बाद बड़ी लापरवाही सामने आई। जांच पड़ताल में पता चला था कि बस में सिर्फ चालक था। हेल्पर व कोई स्कूल का कर्मचारी, शिक्षक नहीं था। बच्ची अकेले उतर रही थी और हादसे का शिकार हो गई। तब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बस कब्जे में ली थी।
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स्कूलों में मनमानी, नहीं होती निगरानी
- जिले के ज्यादातर स्कूलों में प्रबंधन मनमानी करते हुए वाहनों में निर्धारित सीट से ज्यादा बच्चों को बैठाते हैं। आधे से ज्यादा बच्चे बैठने की बजाय खड़े रहते हैं। इसके अलावा स्कूली बच्चों के लिए प्रतिबंधित ऑटो, मैजिक, विक्रम समेत अन्य छोटे वाहनों में भी बच्चे आते हैं।
यह हैं स्कूली वाहनों के मानक
- स्कूल वाहन की खिड़कियों पर ग्रिल और जाली लगी हो। आग से बचाव के लिए वाहन में अग्निशमन यंत्र लगा हो। बस के पीछे स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा हो। दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह हो। चालक के पास कम से कम पांच साल का अनुभव, लाइसेंस और ट्रांसपोर्ट परमिट अवश्य हो। स्कूल वाहन पीले रंग का हो, आपातकालीन निकासी द्वार हो। बस या स्कूल वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स हो। बस में प्रेशर हार्न या मल्टीटोन हार्न नहीं हो। सभी सीटों पर सीट बेल्ट हो। लोकेशन ट्रेसिंग डिवाइस और सीसीटीवी कैमरा, स्पीड गवर्नर लगा हो। चालक के अलावा हेल्पर, अटेंडेंट होना जरूरी है।
अब होगी कड़ी कार्रवाई
मानकों की अनदेखी कर चलने वाले स्कूली वाहन, अनफिट स्कूली बसों की रिपोर्ट बनाई गई है। कई बार चेताने के बाद भी सुधार न करने वाले 71 वाहनों के संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा अन्य वाहनों के मानक चेक किए जा रहे है। स्कूल वाहनों में नियमों की अनदेखी पाए जाने पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। - रेहाना बानो, एआरटीओ प्रवर्तन
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शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक चार सैकड़ा से अधिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन स्कूलों के 300 वाहन पंजीकृत है। इसमें से औरैया शहर के अलावा, बेला, अछल्दा, बिधूना, दिबियापुर, अजीतमल क्षेत्र के स्कूलों के 71 वाहनों का परमिट और फिटनेस नहीं है। कई वाहनों के पंजीकरण की वैधता भी पूरी हो गई है। अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के बाद भी स्कूल संचालक गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं और अनफिट वाहनों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। ऐसे में घर से स्कूल और स्कूल से घर तक बच्चों को खतरे के बीच सफर तय करना पड़ रहा हैं। नए सत्र में सभी स्कूल पूरी क्षमता के साथ संचालित किए जाने लगे हैं लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उक्त वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं लिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन कतई संचालित नहीं होंगे और इन पर विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
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अनदेखी में चली गई थी मासूम की जान
सदर कोतवाली क्षेत्र के ध्रुव एकेडमी में पढ़ने वाली कक्षा एक की छात्रा नैना (6) पुत्री दुर्गेश कुमार निवासी उद्यमपुर की 18 अप्रैल को स्कूल बस से उतरते समय कुचल कर मौत हो गई थी। हादसे के बाद बड़ी लापरवाही सामने आई। जांच पड़ताल में पता चला था कि बस में सिर्फ चालक था। हेल्पर व कोई स्कूल का कर्मचारी, शिक्षक नहीं था। बच्ची अकेले उतर रही थी और हादसे का शिकार हो गई। तब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बस कब्जे में ली थी।
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स्कूलों में मनमानी, नहीं होती निगरानी
- जिले के ज्यादातर स्कूलों में प्रबंधन मनमानी करते हुए वाहनों में निर्धारित सीट से ज्यादा बच्चों को बैठाते हैं। आधे से ज्यादा बच्चे बैठने की बजाय खड़े रहते हैं। इसके अलावा स्कूली बच्चों के लिए प्रतिबंधित ऑटो, मैजिक, विक्रम समेत अन्य छोटे वाहनों में भी बच्चे आते हैं।
यह हैं स्कूली वाहनों के मानक
- स्कूल वाहन की खिड़कियों पर ग्रिल और जाली लगी हो। आग से बचाव के लिए वाहन में अग्निशमन यंत्र लगा हो। बस के पीछे स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा हो। दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह हो। चालक के पास कम से कम पांच साल का अनुभव, लाइसेंस और ट्रांसपोर्ट परमिट अवश्य हो। स्कूल वाहन पीले रंग का हो, आपातकालीन निकासी द्वार हो। बस या स्कूल वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स हो। बस में प्रेशर हार्न या मल्टीटोन हार्न नहीं हो। सभी सीटों पर सीट बेल्ट हो। लोकेशन ट्रेसिंग डिवाइस और सीसीटीवी कैमरा, स्पीड गवर्नर लगा हो। चालक के अलावा हेल्पर, अटेंडेंट होना जरूरी है।
अब होगी कड़ी कार्रवाई
मानकों की अनदेखी कर चलने वाले स्कूली वाहन, अनफिट स्कूली बसों की रिपोर्ट बनाई गई है। कई बार चेताने के बाद भी सुधार न करने वाले 71 वाहनों के संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा अन्य वाहनों के मानक चेक किए जा रहे है। स्कूल वाहनों में नियमों की अनदेखी पाए जाने पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। - रेहाना बानो, एआरटीओ प्रवर्तन