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कूड़ा की समस्या का नहीं हो सका समाधान, जलभराव से लोग परेशान
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औरैया। मच्छरजनित डेंगू, मलेरिया व वायरल बुखार की महामारी जानलेवा साबित हो रहीं, इसके बावजूद कूड़ा निस्तारण और स्वच्छता को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। इसकी बानगी बीते करीब छह माह से गांव सौंधेमऊ में कूड़ा निस्तारण केंद्र (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) से मिल जाती है। बनकर तैयार होने के बावजूद यह केंद्र मशीनें न लगने से आज तक संचालित नहीं हो सका है। इसके चलते शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे दिखते हैं। जलभराव से निजात दिलाने की योजना भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। पालिका की ओर से 20 करोड़ की लागत से नाला निर्माण का प्रस्ताव भी फाइलों में बंद है।
शासन ने लगभग 45 लाख रुपये की लागत से एमआरएम सेंटर तैयार करवाया है। सेंटर की इमारत तो तैयार कर दी गई, लेकिन इसमें मशीनें अब तक नहीं लगाई गई हैं। निस्तारण न होने से कूड़े की समस्या गंभीर हो गई है। जालौन रोड पर देवस्थलों को जाने वाले मार्ग के किनारे दोनों तरफ कूड़े के लगे ढेर से उठती सड़ांध श्रद्धालुओं को विचलित कर देती है। बावजूद इसके केंद्र के संचालन का कोई स्थाई समाधान नजर नहीं आ रहा है। दूसरी ओर नगर पालिका प्रशासन की ओर से लगभग दो साल पहले तैयार 20 करोड़ रुपये का नाला का प्रस्ताव आज तक अधर में है। लोगों को बरसात के दिनों में जलभराव के संकट का सामना करना पड़ता है।
लोगों की बात
मोहल्ला पढ़ीन दरवाजा निवासी रिंकू चतुर्वेदी ने कहा कि जलभराव की समस्या गंभीर है। बरसात में तो हालात बद से बदतर हो जाते हैं। मच्छरों के कारण बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।
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पढ़ीन दरवाजा वार्ड निवासी रोहित गुप्ता बताते हैं कि साफ-सफाई न होने से काफी समस्या होती है। पालिका प्रशासन की ओर से सफाई कर्मी कभी-कभी ही आता है। नाले-नालियां बजबजा रही हैैं। मोहल्ले के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही हैै।
मोहल्ला नरायनपुर निवासी पंकज ने कहा कि मोहल्ले में बना तालाब चारों तरफ से बंद हो जाने से बरसात में उसमें गिरने वाले नालों का पानी सड़कों पर भर जाता है। इससे सड़कें तालाब में बदल जाती हैं। आज तक पालिका प्रशासन ने इस तालाब की बदसूरत हालात को दुरुस्त कराने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
वार्ड बघाकटरा के सभासद रवि चतुर्वेदी ने कहा कि आधे से ज्यादा नगर वासियों का पानी बघाकटरा वार्ड में भरता है। इससे किसानों की जमीन जलमग्न पड़ी हुई हैं। सालों से इनकी जमीन पर अन्न नहीं उगाया जा सका। समस्या निदान को पालिका की ओर से भेजा गया नाला निर्माण का 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। नाले-नालियां भरी रहती हैं। इससे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है।
अधिकारी की बात
पानी का निकास पूर्व से ही गलत दिशा में बना हुआ है। जल निगम के माध्यम से 20 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर जुलाई 2020 में शासन को भेजा है। अंडरग्राउंड बनाए जाने वाले इस नाला निर्माण को संस्तुति मिल जाती है तो इसके निर्माण से शहर की जल निकासी की समस्या दूर हो जाएगी। वहीं एमआरएफ सेंटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। मशीन लगनी है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही उसका संचालन शुरू किया जा सकेगा। बलवीर सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद
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शासन ने लगभग 45 लाख रुपये की लागत से एमआरएम सेंटर तैयार करवाया है। सेंटर की इमारत तो तैयार कर दी गई, लेकिन इसमें मशीनें अब तक नहीं लगाई गई हैं। निस्तारण न होने से कूड़े की समस्या गंभीर हो गई है। जालौन रोड पर देवस्थलों को जाने वाले मार्ग के किनारे दोनों तरफ कूड़े के लगे ढेर से उठती सड़ांध श्रद्धालुओं को विचलित कर देती है। बावजूद इसके केंद्र के संचालन का कोई स्थाई समाधान नजर नहीं आ रहा है। दूसरी ओर नगर पालिका प्रशासन की ओर से लगभग दो साल पहले तैयार 20 करोड़ रुपये का नाला का प्रस्ताव आज तक अधर में है। लोगों को बरसात के दिनों में जलभराव के संकट का सामना करना पड़ता है।
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लोगों की बात
मोहल्ला पढ़ीन दरवाजा निवासी रिंकू चतुर्वेदी ने कहा कि जलभराव की समस्या गंभीर है। बरसात में तो हालात बद से बदतर हो जाते हैं। मच्छरों के कारण बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।
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पढ़ीन दरवाजा वार्ड निवासी रोहित गुप्ता बताते हैं कि साफ-सफाई न होने से काफी समस्या होती है। पालिका प्रशासन की ओर से सफाई कर्मी कभी-कभी ही आता है। नाले-नालियां बजबजा रही हैैं। मोहल्ले के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही हैै।
मोहल्ला नरायनपुर निवासी पंकज ने कहा कि मोहल्ले में बना तालाब चारों तरफ से बंद हो जाने से बरसात में उसमें गिरने वाले नालों का पानी सड़कों पर भर जाता है। इससे सड़कें तालाब में बदल जाती हैं। आज तक पालिका प्रशासन ने इस तालाब की बदसूरत हालात को दुरुस्त कराने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
वार्ड बघाकटरा के सभासद रवि चतुर्वेदी ने कहा कि आधे से ज्यादा नगर वासियों का पानी बघाकटरा वार्ड में भरता है। इससे किसानों की जमीन जलमग्न पड़ी हुई हैं। सालों से इनकी जमीन पर अन्न नहीं उगाया जा सका। समस्या निदान को पालिका की ओर से भेजा गया नाला निर्माण का 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। नाले-नालियां भरी रहती हैं। इससे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है।
अधिकारी की बात
पानी का निकास पूर्व से ही गलत दिशा में बना हुआ है। जल निगम के माध्यम से 20 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर जुलाई 2020 में शासन को भेजा है। अंडरग्राउंड बनाए जाने वाले इस नाला निर्माण को संस्तुति मिल जाती है तो इसके निर्माण से शहर की जल निकासी की समस्या दूर हो जाएगी। वहीं एमआरएफ सेंटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। मशीन लगनी है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही उसका संचालन शुरू किया जा सकेगा। बलवीर सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद