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बसों में सुरक्षा के नहीं इंतजाम, खतरे में यात्रियों की जान
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फोटो 04 एयूआरपी 16 - बस में स्टेरिंग के पास खुले तार से शार्ट सर्किट होने का खतरा। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। मथुरा में रोडवेज बस में आग लगने की घटना से विभाग सबक नहीं ले सका है। आज भी परिवहन विभाग की जर्जर बसें सड़कों पर दौड़ रहीं हैं। बसों में आधुनिक संसाधन तो दूर बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। चालकों ने कई बार समस्याओं का दुखड़ा रोया, लेकिन किए गए सुधार नाकाफी हैं। मजबूरन चालक खतरों के बीच सफर तय कर रहे हैं। यात्रियों की जान भी जोखिम में रहती है।
औरैया डिपो की पड़ताल की गई तो बसों के अंदर की जर्जर व्यवस्था सामने आई। शुक्रवार को डिपो में कई बसें इटावा और दिल्ली से आकर खड़ी थीं। कई बसों में अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड किट नहीं थे। स्टीयरिंग और गियर बाक्स के पास की स्थिति जर्जर दिखी। बसों में खुली और कई जगह लटकती हुई वायरिंग मिली। कई बसों में इंजन का तेल रिसता नजर आया। जर्जर तार और रिसते तेल से शार्ट सर्किट से आग लगने की आशंका रहती है।
बता दें कि औरैया डिपों में 66 बसें है, इन बसों में प्रतिदिन हजारों लोग सफर करते हैं। डिपों में मौजूद कुछ चालकों और परिचालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बसों की हालत स्वयं देखकर सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। चालकों ने बताया कि करीब 10 से 12 बसों के हालत इसी तरह के हैं। कई बार समस्याएं अधिकारियों को बताई जा चुकी हैं।
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वर्कशॉप में चल रहा था मरम्मत का काम
डिपो स्थित वर्कशॉप में बसों की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। शुक्रवार को पांच-छह बसों की डेंटिंग-पेंटिंग के साथ इंजन में तकनीकी कार्य कराया जा रहा था। कुछ बसें काफी दिनों से खराब खड़ी हैं। कर्मचारियों ने बताया कि उनके पुर्जे मंगवाए गए हैं, जल्द ही इन्हें ठीक किया जाएगा।
जर्जर बसों में सफर मजबूरी
आजमगढ़ जा रहे उमेश ने बताया कि सरकारी बसों की स्थिति खराब है। सीटों से लेकर खिड़की तक जर्जर हैं। अन्य तकनीकी खामियां भी हैं। किराया पर्याप्त होने के बाद भी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। विभाग को यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
बस में सुरक्षा के नहीं इंतजाम
इटावा जा रहे सुरजीत कुमार ने बताया कि वह कानपुर से जिस बस में सवार हुए थे, उस बस अग्निशमन यंत्र, मेडिकल किट जैसे इंतजाम नहीं थे। रास्ते में किसी तरह की समस्या हो तो संसाधन जुटाना मुश्किल होगा। यात्रियों की जान जोखिम में रहती है।
यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रतिदिन चालकों और कर्मचारियों की काउंसलिंग की जाती है। बसों का तकनीकी टीम निरीक्षण भी करती है। जिन बसों में खामियां है, उन्हें दुरुस्त कराया जा रहा है।-आरएस चौधरी, एआरएम
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औरैया डिपो की पड़ताल की गई तो बसों के अंदर की जर्जर व्यवस्था सामने आई। शुक्रवार को डिपो में कई बसें इटावा और दिल्ली से आकर खड़ी थीं। कई बसों में अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड किट नहीं थे। स्टीयरिंग और गियर बाक्स के पास की स्थिति जर्जर दिखी। बसों में खुली और कई जगह लटकती हुई वायरिंग मिली। कई बसों में इंजन का तेल रिसता नजर आया। जर्जर तार और रिसते तेल से शार्ट सर्किट से आग लगने की आशंका रहती है।
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बता दें कि औरैया डिपों में 66 बसें है, इन बसों में प्रतिदिन हजारों लोग सफर करते हैं। डिपों में मौजूद कुछ चालकों और परिचालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बसों की हालत स्वयं देखकर सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। चालकों ने बताया कि करीब 10 से 12 बसों के हालत इसी तरह के हैं। कई बार समस्याएं अधिकारियों को बताई जा चुकी हैं।
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वर्कशॉप में चल रहा था मरम्मत का काम
डिपो स्थित वर्कशॉप में बसों की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। शुक्रवार को पांच-छह बसों की डेंटिंग-पेंटिंग के साथ इंजन में तकनीकी कार्य कराया जा रहा था। कुछ बसें काफी दिनों से खराब खड़ी हैं। कर्मचारियों ने बताया कि उनके पुर्जे मंगवाए गए हैं, जल्द ही इन्हें ठीक किया जाएगा।
जर्जर बसों में सफर मजबूरी
आजमगढ़ जा रहे उमेश ने बताया कि सरकारी बसों की स्थिति खराब है। सीटों से लेकर खिड़की तक जर्जर हैं। अन्य तकनीकी खामियां भी हैं। किराया पर्याप्त होने के बाद भी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। विभाग को यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
बस में सुरक्षा के नहीं इंतजाम
इटावा जा रहे सुरजीत कुमार ने बताया कि वह कानपुर से जिस बस में सवार हुए थे, उस बस अग्निशमन यंत्र, मेडिकल किट जैसे इंतजाम नहीं थे। रास्ते में किसी तरह की समस्या हो तो संसाधन जुटाना मुश्किल होगा। यात्रियों की जान जोखिम में रहती है।
यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रतिदिन चालकों और कर्मचारियों की काउंसलिंग की जाती है। बसों का तकनीकी टीम निरीक्षण भी करती है। जिन बसों में खामियां है, उन्हें दुरुस्त कराया जा रहा है।-आरएस चौधरी, एआरएम