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बिन बजट, कैसे होगा टीकाकरण
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Fri, 26 Jun 2015 12:29 AM IST
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पशुपालन को बढ़ावा देने वाली सरकारी मशीनरी की कार्यशैली पशुपालकों पर भारी पड़ने वाली है। बरसात में पशुओं में पनपने वाले रोगों से बचाव को राष्ट्रीय मुंहपका-खुरपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम की पशुधन सुरक्षा से पहले ही बजट व साम्रगी के अभाव में हवा निकलती दिखाई दे रही है।
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2007 की पशु गणना के अनुसार जिले में गौजातीय (देशी) तीन वर्ष से अधिक आयु के नर 17943 व तीन वर्ष से अधिक की मादा 35810, बछड़ा व बछिया जाति के 9054 पशु हैं। वहीं गौजातीय क्रास ब्रीड के 2.576, मादा 3449 तथा बछड़ा व बछिया 2665 पशु हैं। जिले में 3.40 लाख गौवंशी तथा भैंसवंशी पशु हैं।
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बरसात में पशुओं को गलाघोंटू, खुरपका, मुंहपका जानलेवा बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। इस कारण बारिश शुरू होने से पहले तथा मध्य में पशुओं का टीकाकरण जरूरी है। केंद्र सरकार से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय खुरपका, मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम संचालित होता है।
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इस कार्यक्रम को लेकर सरकारी मशीनरी की ढिलाई का नतीजा है कि कार्यक्रम की अब तक शुरूआत नहीं हो सकी है।
केंद्र सरकार के इस कार्यक्रम को लेकर अब तक 3.40 लाख पशु के सापेक्ष 3.60 लाख खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव हेतु वैक्सीन उपलब्ध कराईं हैं, जबकि पशु टीकाकरण कार्य शुरू करने को पशुपालन विभाग को निडिल, सीरिंज, पैरावेस्ट के मानदेय, आने-जाने के लिए वाहन किराया आदि में व्यय होने वाले बजट का इंतजार है।
तिथि का भी नहीं हुआ निर्धारण- औरैया। यूं तो राष्ट्रीय खुरपका, मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम बरसात का मौसम शुरू होने के 15 दिन पहले शुरू किया जाना अनिवार्य है। इस बार शासन से टीकाकरण अभियान की तिथि का भी निर्धारण नहीं किया जा सकेगा।
...तो क्या बरसात बाद तक लगते रहेंगे टीके- औरैया। राष्ट्रीय खुरपका, मुंहपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम को पूरा करने में पशुपालन विभाग की 21 टीमों को जनपद में पशुओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण कार्य करने में 24 दिन लगेंगे। जून माह बीतने को है और अगस्त माह के बाद बारिश का जोर धीमा हो जाता है।
कार्यक्रम को लेकर बरती जा रही ढिलाई को देखते हुए बरसात के मौसम में टीकाकरण समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है।
हमारी ओर से तैयारियां पूरी हैं। पशुओं के टीकाकरण हेतु प्रति ब्लाक तीन टीमें गठित की गई हैं। बजट प्राप्त होते ही कार्यक्रम के टीकाकरण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। डा. जेपी वर्मा, डिप्टी सीवीओ