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औरैयाः पर्यावरण संरक्षण पर नवयुगल ने लिया आठवां वचन
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पीपल का वृक्ष लगाते नवदंपति
- फोटो : AURAIYA
औरैया। अजीतमल ब्लॉक के गांव हैदरपुर निवासी शिक्षक ऋतुराज के विवाह के दौरान वधू दीपिका ने लग्न मंडप में मंत्रोच्चारण के बीच सात वचन के बाद आठवें वचन के रूप में पर्यावरण संरक्षण को महत्व दिया। वधू की इस इच्छा को दूल्हा बने ऋतुराज ने सहज ही स्वीकार कर लिया। शादी के दूसरे दिन ही नवदंपति ने पीपल का पौधा रोपकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत की।
ब्लॉक अजीतमल के हैदरपुर के रहने वाले शिक्षक ऋतुराज की शादी 19 फरवरी को थी। बारात माधौगढ़ जालौन गई थी। शादी के दौरान वधू शिक्षक दीपिका ने ऋतुराज के सामने आठवें वचन के रूप में पर्यावरण संरक्षण का वचन लिया। दोनों ने प्रण लिया कि दांपत्य जीवन की शुरुआत पौधरोपण से करेंगे।
दुल्हन को विदा कराकर बरात वापस हैदरपुर पहुंची तो अन्य रस्मों से पहले 20 फरवरी को नवदंपति ने पौधा रोपा। दीपिका ने पति के साथ पीपल का पौधा इस उम्मीद से लगाया कि वसंत में दोनों इसे पल्लवित होते देखेंगे। ऋतुराज का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा उन्हें बिरूहुनी पौधशाला के संस्थापक स्व. बीएस विश्नोई व अपने समाजसेवी पिता धर्मेंद्र नाथ दत्त दुबे से मिली।
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आरएसएस में सक्रिय ऋतुराज के पिता प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वे लोकप्रिय परशुराम अभिनेता भी रहे। उन्होंने ग्रामीण अंचलों में पौधरोपण के जरिये पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाई। ऋतुराज के बाबा सत्यनारायण दत्त दुबे ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी की थी और औरैया के प्रथम विधायक के तौर पर पर्यावरण के क्षेत्र में व्यापक कार्य कराए थे। नवदंपति की इस पहल की क्षेत्रीय लोग सराहना कर रहे हैं।
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ब्लॉक अजीतमल के हैदरपुर के रहने वाले शिक्षक ऋतुराज की शादी 19 फरवरी को थी। बारात माधौगढ़ जालौन गई थी। शादी के दौरान वधू शिक्षक दीपिका ने ऋतुराज के सामने आठवें वचन के रूप में पर्यावरण संरक्षण का वचन लिया। दोनों ने प्रण लिया कि दांपत्य जीवन की शुरुआत पौधरोपण से करेंगे।
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दुल्हन को विदा कराकर बरात वापस हैदरपुर पहुंची तो अन्य रस्मों से पहले 20 फरवरी को नवदंपति ने पौधा रोपा। दीपिका ने पति के साथ पीपल का पौधा इस उम्मीद से लगाया कि वसंत में दोनों इसे पल्लवित होते देखेंगे। ऋतुराज का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा उन्हें बिरूहुनी पौधशाला के संस्थापक स्व. बीएस विश्नोई व अपने समाजसेवी पिता धर्मेंद्र नाथ दत्त दुबे से मिली।
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आरएसएस में सक्रिय ऋतुराज के पिता प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वे लोकप्रिय परशुराम अभिनेता भी रहे। उन्होंने ग्रामीण अंचलों में पौधरोपण के जरिये पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाई। ऋतुराज के बाबा सत्यनारायण दत्त दुबे ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी की थी और औरैया के प्रथम विधायक के तौर पर पर्यावरण के क्षेत्र में व्यापक कार्य कराए थे। नवदंपति की इस पहल की क्षेत्रीय लोग सराहना कर रहे हैं।