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सरसों का हमलावर मक्खी और माहू

Wed, 17 Feb 2016 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Wed, 17 Feb 2016 11:04 PM IST
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Mustard bombers fly and aphids
मौसम में नमी बढ़ने से कीटों ने फसलों पर हमला शुरू कर दिया है। अगर सरसों की फसल की बात करें तो आरा मक्खी और माहू उन पर हमलावर हो गए है। यह कीट सरसों के तना, पत्ती और फूल के रस को चूस पौधे को बेजान कर रहे हैं। किसान फसलों को कीटों से बचाने के लिए परेशान हैं। उनका कहना है कि पानी और सूखे की मार से किसी प्रकार बचे तो कीटों की मार फसलों को बर्बाद कर रही है। दो बार दवा का छिड़काव भी कर चुके लेकिन दूसरे खेतों का असर आ जाता है।
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क्रांति और पूसा मस्टर्ड का जलवा
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि वैसे तो सरसों में कई प्रजातियां हैं, लेकिन औरैया, इटावा, कानपुर देहात, कन्नौज, जालौन आदि स्थानों पर मौसम के अनुसार क्रांति, पूसा मस्टर्ड-21, 27, एनआरसी एचवी 506, पीएसी 432 प्रजातियां ही बेहतर साबित हो रही हैं। किसान भाई किसी भी प्रजाति के बीज का प्रयोग करें। लेकिन खेतों में हमेशा उपचारित बीज ही डालें।
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माहू रोग का लक्षण व उपाय
कृषि वैज्ञानिक डा. राजेश राय बताते हैं कि सरसों में माहू का हमला होता है। यह कीट हल्के स्लेटी रंग का होता है। सरसों की पौध में यह कोमल तनों, पत्तियों, फूलों व नई फलियों पर हमला करता है। उसके रस को चूसकर उसे बेजान कर देता है। इस दौरान कीट के प्रकोप से पत्तियां काले कवक का शिकार हो जाती हैं। यह कीट फरवरी व मार्च माह में अपना असर दिखाता है। माहू कीट से सरसों की फसल को बचाने के लिए सबसे पहले किसान भाई संक्रमित पौधे को अलग कर दें। अधिक मात्रा में कीटों का हमला हो तो डाईमिथोएट या मोनोक्रोटोफास की एक लीटर  मात्रा को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। दोबारा कीट का हमला होने पर 15 दिन में फिर से छिड़काव करें।
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काला धब्बा व आरा मक्खी का हमला
लाही पर आरा मक्खी भी बुरा प्रभाव डालती है। यह पौधे से रस को चूसती है। इसके साथ ही फूल को संक्रमित कर उड़ जाती है। अक्सर पुष्प क्रम के प्रमुख भाग को यह मक्खी चट कर जाती है। जिससे पौधे की बाढ़ रुक जाती है और पौधा खेत में शोपीस बना रहता है। पौधे में फल आदि नहीं होते है। ऐसी मक्खियों से सरसों की रक्षा करनी चाहिए। डा.राजेश राय ने बताया कि आरा मक्खी जैसे कीट की रोकथाम के लिए मेलाथियान की 50 ईसी मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। आवश्यकता पडने पर दोबारा छिड़काव करें। वहीं काला धब्बा जैसे लक्षण दिखाई देने पर आईप्रोडियान, मैकोंजेब फफूंदीनाशक का 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 15-15 दिन के अंतराल पर करते रहना चाहिए।
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