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Auraiya News: बाढ़ से निपटने के लिए जुटाने लगे संसाधन
Sun, 09 Jul 2023 12:51 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 09 Jul 2023 12:51 AM IST
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औरैया। कई दिनों से हो रही बारिश से यमुना नदी का जल स्तर बढ़ना शुरू हो गया। शनिवार को सुबह नौ बजे यमुना का पानी 101.98 मीटर पर पहुंच गया। ऐसे में बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों की चिंताए भी बढ़ गई है। पिछले वर्ष बाढ़ का शिकार हुए 24 गांव के लोग अभी से दहशत में नजर आ रहे हैं। प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम न किए जाने व आश्वासन के बाद ऊंचाई पर न बसाए जाने के बाद अब लोग स्वयं से व्यवस्थाएं संभालने में जुट गए हैं।
शनिवार को बाढ़ प्रभावित गांव आस्ता व नौरी की स्थिति जांचने के लिए पड़ताल की गई तो लोगों का दर्द छलक आया। कई लोग अपने को सुरक्षित करने के लिए आशियाने का जुगाड़ करते दिखे तो कुछ बाढ़ से निपटने के लिए व्यवस्थाएं जुटाने नजर आए। उन्हें सरकारी व्यवस्था को लेकर रोष भी दिखा। अस्ता गांव पहुंचने पर गांव निवासी बृजकिशोर अपनी पत्नी गुंजन देवी के साथ बाढ़ आने से पहले ही ऊंचाई पर रहने की व्यवस्था बनाते दिखे। उन्होंने बताया कि हर बार पानी आने पर जब तक प्रशासन के इंतजाम होते थे, तब तक काफी सामान भींग जाता था। इसलिए इस बार प्रशासन के इंतजामों से पहले ही खुद अपने सामान व परिवार को सुरक्षित करने के लिए ऊंचाई पर टिनशेड डाल रहे हैं। जिससे कोई दिक्कत न हो। गांव के सुनील अपने सहयोगी विमल के साथ नाव तैयार करते दिखे। बताया कि गांव में इस बार लगभग 35 से 40 नाव हो गईं हैं। इससे ग्रामीणों को जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सकेगा। हर बार जिला प्रशासन एक-दो नाव को बाढ़ आने पर लोगों को इधर से उधर लाने-ले जाने के लिए लगाता है। जिससे देरी के चलते ग्रामीणों को बहुत दिक्कत होती है।
अस्ता गांव निवासी रामजीवन ने बताया कि पिछले दो सालों से लगातार बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। हर साल जिला प्रशासन व प्रतिनिधि ऊंचाई पर बसाने का सपना दिखाकर चले जाते हैं, लेकिन होता कुछ भी नहीं है। इस बार भी बारिश के मिल रहे अलर्ट से हालात कुछ अच्छे होते नहीं दिखे रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई इंतजाम नहीं दिख रहे हैं।
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नौरी गांव निवासी मोहब्बत सिंह कहते हैं कि बाढ़ आने पर इधर-उधर भटकने को मजबूर होते हैं। हर बार हजारों रुपये का गृहस्थी का सामान बर्बाद हो जाता है। उनके मोहल्ले में तो पेयजल के भी कोई इंतजाम नहीं है। मोहल्ले में एक पुराना कुआं है जिसका पानी बहुत ही बदबूदार है। पर कोई साधन न होने से उसी कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान यह कुआं भी पानी में समा जाता है, तब बहुत दिक्कत होती है। शिकायत की पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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ये हैं बाढ़ प्रभावित गांव-- -
अस्ता, नौरी, सिकरोड़ी, मई, मढ़ापुर, क्योंटरा, गोहानी कला, गोहानी खुर्द, गूंज, ततारपुर, जाजपुर, असेवटा, असेबा, जुहीखा, बझेरा, बबाईन, नगला चिंताई, भूरेपुर कला, सड़रापुर, बीझलपुर, फरिया, कैथोली, मिश्रपुर मानिकचंद्र आदि गांव शामिल हैं।
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बनाई गई बाढ़ चौकियां-
अजीतमल तहसील- अमावता इंटर कॉलेज, प्राथमिक स्कूल बड़ेरा, जूनियर हाईस्कूल बल्लापुर, प्राथमिक विद्यालय रहमापुर, प्राथमिक स्कूल ऊंचा, प्राथमिक स्कूल बबाइन, प्राथमिक स्कूल बीझलपुर, प्राथमिक स्कूल हनुमान गढ़ी।
आैरैया तहसील- अस्ता स्थित अस्वथामा मंदिर परिसर, क्योटरा में माध्यमिक विद्यालय
बोले जिम्मेदार-- -
बाढ़ प्रभावित गांवों में बाढ़ चौकियां बनाई दी गई हैं, साथ ही लेखपालों को निगरानी की जिम्मेदारी भी दे दी गई है। समय-समय पर जिला प्रशासन के अधिकारी भी बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर वहां के हालातों की जानकारी कर रहे हैं। बाढ़ से निपटने के सभी इंतजाम कर लिए गए हैं। बाढ़ के दौरान जो भी सामान की जरूरत पड़ती है उनका इंतजाम भी किया जा चुका है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। यदि बाढ़ की स्थिति बनती है तो सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। - एमपी सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त, औरैया।
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शनिवार को बाढ़ प्रभावित गांव आस्ता व नौरी की स्थिति जांचने के लिए पड़ताल की गई तो लोगों का दर्द छलक आया। कई लोग अपने को सुरक्षित करने के लिए आशियाने का जुगाड़ करते दिखे तो कुछ बाढ़ से निपटने के लिए व्यवस्थाएं जुटाने नजर आए। उन्हें सरकारी व्यवस्था को लेकर रोष भी दिखा। अस्ता गांव पहुंचने पर गांव निवासी बृजकिशोर अपनी पत्नी गुंजन देवी के साथ बाढ़ आने से पहले ही ऊंचाई पर रहने की व्यवस्था बनाते दिखे। उन्होंने बताया कि हर बार पानी आने पर जब तक प्रशासन के इंतजाम होते थे, तब तक काफी सामान भींग जाता था। इसलिए इस बार प्रशासन के इंतजामों से पहले ही खुद अपने सामान व परिवार को सुरक्षित करने के लिए ऊंचाई पर टिनशेड डाल रहे हैं। जिससे कोई दिक्कत न हो। गांव के सुनील अपने सहयोगी विमल के साथ नाव तैयार करते दिखे। बताया कि गांव में इस बार लगभग 35 से 40 नाव हो गईं हैं। इससे ग्रामीणों को जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सकेगा। हर बार जिला प्रशासन एक-दो नाव को बाढ़ आने पर लोगों को इधर से उधर लाने-ले जाने के लिए लगाता है। जिससे देरी के चलते ग्रामीणों को बहुत दिक्कत होती है।
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अस्ता गांव निवासी रामजीवन ने बताया कि पिछले दो सालों से लगातार बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। हर साल जिला प्रशासन व प्रतिनिधि ऊंचाई पर बसाने का सपना दिखाकर चले जाते हैं, लेकिन होता कुछ भी नहीं है। इस बार भी बारिश के मिल रहे अलर्ट से हालात कुछ अच्छे होते नहीं दिखे रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन की ओर से भी अभी तक कोई इंतजाम नहीं दिख रहे हैं।
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नौरी गांव निवासी मोहब्बत सिंह कहते हैं कि बाढ़ आने पर इधर-उधर भटकने को मजबूर होते हैं। हर बार हजारों रुपये का गृहस्थी का सामान बर्बाद हो जाता है। उनके मोहल्ले में तो पेयजल के भी कोई इंतजाम नहीं है। मोहल्ले में एक पुराना कुआं है जिसका पानी बहुत ही बदबूदार है। पर कोई साधन न होने से उसी कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान यह कुआं भी पानी में समा जाता है, तब बहुत दिक्कत होती है। शिकायत की पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
ये हैं बाढ़ प्रभावित गांव
अस्ता, नौरी, सिकरोड़ी, मई, मढ़ापुर, क्योंटरा, गोहानी कला, गोहानी खुर्द, गूंज, ततारपुर, जाजपुर, असेवटा, असेबा, जुहीखा, बझेरा, बबाईन, नगला चिंताई, भूरेपुर कला, सड़रापुर, बीझलपुर, फरिया, कैथोली, मिश्रपुर मानिकचंद्र आदि गांव शामिल हैं।
बनाई गई बाढ़ चौकियां-
अजीतमल तहसील- अमावता इंटर कॉलेज, प्राथमिक स्कूल बड़ेरा, जूनियर हाईस्कूल बल्लापुर, प्राथमिक विद्यालय रहमापुर, प्राथमिक स्कूल ऊंचा, प्राथमिक स्कूल बबाइन, प्राथमिक स्कूल बीझलपुर, प्राथमिक स्कूल हनुमान गढ़ी।
आैरैया तहसील- अस्ता स्थित अस्वथामा मंदिर परिसर, क्योटरा में माध्यमिक विद्यालय
बोले जिम्मेदार
बाढ़ प्रभावित गांवों में बाढ़ चौकियां बनाई दी गई हैं, साथ ही लेखपालों को निगरानी की जिम्मेदारी भी दे दी गई है। समय-समय पर जिला प्रशासन के अधिकारी भी बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर वहां के हालातों की जानकारी कर रहे हैं। बाढ़ से निपटने के सभी इंतजाम कर लिए गए हैं। बाढ़ के दौरान जो भी सामान की जरूरत पड़ती है उनका इंतजाम भी किया जा चुका है। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। यदि बाढ़ की स्थिति बनती है तो सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। - एमपी सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त, औरैया।