{"_id":"5d30bcd38ebc3e6cf722218a","slug":"memorandum-handed-over-to-the-naib-tehsildar-auraiya-news-knp502308270","type":"story","status":"publish","title_hn":"नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
विज्ञापन
औरैया। ब्लड बैंक न होने का खामियाजा सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ता है। इस समस्या के मद्देनजर गुरुवार को महिलाओं की समाजसेवी संस्था विचित्र पहल की तुलसी शाखा ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर ब्लड बैंक का संचालन कराए जाने की मांग की। महिलाओं ने कहा कि उनकी इस समस्या को अधिकारी गंभीरता से लें। बताया कि महिलाएं अब कमजोर नहीं हैं। समय आने पर वे अपनी ताकत का एहसास भी कराने से पीछे नहीं हटेंगी।
समाजसेवी संस्था तुलसी शाखा की पदाधिकारी व सदस्य एसडीएम कार्यालय में ब्लड बैंक के संबंध में ज्ञापन देने गुरुवार सुबह लगभग 10 बजे पहुंचीं। जहां महिलाओं ने जिलाधिकारी संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को प्रेम नरायन पांडेय को सौंपा। महिलाओं ने नायब तहसीलदार से कहा कि वह उनकी समस्या को प्रमुखता से जिलाधिकारी तक पहुंचाएं। ब्लड बैंक का संचालन महिलाओं के हित में होना बहुत जरूरी है। लक्ष्मी विश्नोई ने बताया कि ब्लड बैंक का संचालन न होने से सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों से ज्यादा गर्भवती महिलाओं के लिए दिक्कत पैदा कर कर रहा है। बताया कि सबसे अधिक गर्भवती महिलाएं ही खून की कमी के चलते जिले से रेफर हो रही हैं। उनकी दिक्कतों को समझते हुए ब्लड बैंक का संचालन कराया जाना जरूरी है।
महिलाओं ने बताया कि यदि शीघ्र ही उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे लोग जिलाधिकारी से मुलाकात करेंगी और उनसे गर्भवती महिलाओं की समस्या को देखते हुए वह ब्लड बैंक संचालन की मांग करेंगी। इस मौके पर यूविका पोरवाल, क्षमा सोनी, सुनीता चौहान, ममता विश्नोई, राधा गुप्ता, संगीता गहोई आदि महिलाएं मौजूद रहीं।
विज्ञापन
लक्ष्मी विश्नोई ने बताया कि सबसे अधिक गर्भवती महिलाओं में खून की कमी की समस्या होती है। इन महिलाओं को चिकित्सक बिना उपचार किए ही उन्हें गंभीर हालत में रेफर कर देते हैं। ऐसे में कई महिलाएं अस्पताल भी नहीं पहुंच पाती और दम तोड़ देती हैं। ऐसी महिलाओं की मदद के लिए ब्लड बैंक का संचालन कराना जरूरी है।
यूविका पोरवाल ने बताया कि खून की कमी से सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों से रेफर होने वाले मरीजों में सबसे अधिक ऐसी गर्भवती महिलाओं की संख्या है, जिनमें खून की कमी पाई जाती है। उन महिलाओं को रेफर करने पर उनकी मुश्किलें स्वास्थ्य विभाग बढ़ाने का काम कर रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी व्यवस्थाएं सब होने पर शीघ्र पैथालॉजिस्ट की तैनाती कराएं।
क्षमा सोनी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को अक्सर खून की कमी बताई जाती है। ऐसी गर्भवती महिलाओं को किसी भी समय खून की जरूरत पड़ सकती है। जिसके चलते विभागीय अधिकारियों को चाहिए कि ब्लड बैंक की शुरुआत कराएं और गर्भवती महिलाओं की समस्याओं का निराकरण कराएं।
सुनीता चौबे ने बताया कि सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कई ऐसे मामले हो चुके हैं जिनमें गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के दौरान अधिक खून बहने से उनकी मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं टूटी है। अधिकारी इस ओर ध्यान दें और ब्लड बैंक शुरू कराएं।
विज्ञापन
समाजसेवी संस्था तुलसी शाखा की पदाधिकारी व सदस्य एसडीएम कार्यालय में ब्लड बैंक के संबंध में ज्ञापन देने गुरुवार सुबह लगभग 10 बजे पहुंचीं। जहां महिलाओं ने जिलाधिकारी संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को प्रेम नरायन पांडेय को सौंपा। महिलाओं ने नायब तहसीलदार से कहा कि वह उनकी समस्या को प्रमुखता से जिलाधिकारी तक पहुंचाएं। ब्लड बैंक का संचालन महिलाओं के हित में होना बहुत जरूरी है। लक्ष्मी विश्नोई ने बताया कि ब्लड बैंक का संचालन न होने से सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों से ज्यादा गर्भवती महिलाओं के लिए दिक्कत पैदा कर कर रहा है। बताया कि सबसे अधिक गर्भवती महिलाएं ही खून की कमी के चलते जिले से रेफर हो रही हैं। उनकी दिक्कतों को समझते हुए ब्लड बैंक का संचालन कराया जाना जरूरी है।
विज्ञापन
महिलाओं ने बताया कि यदि शीघ्र ही उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे लोग जिलाधिकारी से मुलाकात करेंगी और उनसे गर्भवती महिलाओं की समस्या को देखते हुए वह ब्लड बैंक संचालन की मांग करेंगी। इस मौके पर यूविका पोरवाल, क्षमा सोनी, सुनीता चौहान, ममता विश्नोई, राधा गुप्ता, संगीता गहोई आदि महिलाएं मौजूद रहीं।
विज्ञापन
लक्ष्मी विश्नोई ने बताया कि सबसे अधिक गर्भवती महिलाओं में खून की कमी की समस्या होती है। इन महिलाओं को चिकित्सक बिना उपचार किए ही उन्हें गंभीर हालत में रेफर कर देते हैं। ऐसे में कई महिलाएं अस्पताल भी नहीं पहुंच पाती और दम तोड़ देती हैं। ऐसी महिलाओं की मदद के लिए ब्लड बैंक का संचालन कराना जरूरी है।
यूविका पोरवाल ने बताया कि खून की कमी से सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों से रेफर होने वाले मरीजों में सबसे अधिक ऐसी गर्भवती महिलाओं की संख्या है, जिनमें खून की कमी पाई जाती है। उन महिलाओं को रेफर करने पर उनकी मुश्किलें स्वास्थ्य विभाग बढ़ाने का काम कर रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी व्यवस्थाएं सब होने पर शीघ्र पैथालॉजिस्ट की तैनाती कराएं।
क्षमा सोनी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को अक्सर खून की कमी बताई जाती है। ऐसी गर्भवती महिलाओं को किसी भी समय खून की जरूरत पड़ सकती है। जिसके चलते विभागीय अधिकारियों को चाहिए कि ब्लड बैंक की शुरुआत कराएं और गर्भवती महिलाओं की समस्याओं का निराकरण कराएं।
सुनीता चौबे ने बताया कि सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कई ऐसे मामले हो चुके हैं जिनमें गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के दौरान अधिक खून बहने से उनकी मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं टूटी है। अधिकारी इस ओर ध्यान दें और ब्लड बैंक शुरू कराएं।