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Auraiya News: आभासी शव से मानव शरीर की संरचना समझेंगे मेडिकल कॉलेज के छात्र

Sat, 02 May 2026 12:48 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sat, 02 May 2026 12:48 AM IST
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Medical college students will understand the structure of the human body through virtual corpse.
फोटो-27-कुछ इस तरह दिखेगी वर्चुअल कैडेवर टेबल। स्रोत: इंटरनेट - फोटो : 1
ज्योत्यवेंद्र दुबे
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औरैया। मेडिकल के छात्राओं को मानव शरीर की संरचना समझने में आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (एआई) से मदद मिलेगी।
इसके लिए जल्द ही मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में एआई आधारित आभासी शव (वर्चुअल कैडेवर) प्रणाली अपनाई जाएगी। शासन से सीधे ही वर्चुअल कैडेवर टेबल आदि की आपूर्ति भी की जाएगी। मई में मेडिकल कॉलेज में इसके पहुंचने की उम्मीद है।

चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक वर्ष 100 छात्राओं को एमबीबीएस के लिए दाखिला मिलता है। कॉलेज को शुरू हुए दो वर्ष बीत चुके हैं। वर्तमान में यहां कुल दो बैच के 200 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन छात्र-छात्राओं को मानव शरीर की संरचना समझाने के लिए एनाटॉमी विभाग बना है। यहां छात्रों को शवों (कैडेवर) का विच्छेदन कराकर मानव शरीर की मांसपेशियों, हड्डियों, नसों, धमनियों और अंगों की आंतरिक संरचना का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है।
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वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में केवल एक ही मृत शरीर उपलब्ध है। ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में छात्रों को जानकारी दे पाना कठिन होता है। तकनीकी के सहयोग से इस परेशानी को दूर करने का उपाय खोज लिया गया है। इसके लिए एआई आधरित वर्चुअल कैडेवर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे छात्र आसानी से उस पर मानव शरीर की संरचना का अध्ययन कर सकेंगे। साथ ही बार-बार प्रयोग के दौरान इसे कोई क्षति भी नहीं पहुंचेगी जबकि वास्तविक कैडेवर कई सालों तक प्रयोग के बाद खराब होने लगते हैं। (संवाद)
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ऐसे समझ सकेंगे छात्र-छात्राएं



वर्चुअल कैडेवर के लिए एक बड़ी स्क्रीन साइज की टेबल होगी। इस पर मानव शरीर प्रदर्शित होगा साथ ही एक कमांड इंटरफेस भी नजर आएगा। अध्ययन करने वाले छात्र इंटरफेस के माध्यम से कमांड देकर मानव शरीर की त्वचा, हड्डियां, धमनियां और अन्य आंतरिक अंगों को वास्तविक स्थिति की तरह स्क्रीन पर देख सकेंगे। इसे जूम करने के साथ ही अलग भी किया जा सकेगा। सालों तक प्रयोग के बाद भी इसमें कोई विकृति नहीं आएगी।



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जटिल है कैडेवर के लिए प्रक्रिया



मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि छात्राओं के अध्ययन के लिए संरक्षित किए जाने वाले कैडेवर के लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया पूर्ण करनी पड़ती है। इसके लिए जरूरी है कि शरीर को मृत्यु के उपरांत दान देने के लिए कागजी कार्रवाई पूरी की गई हो।
इसके अलावा अन्य कई संस्थाओं से अनुमति और उसके संरक्षण के लिए भी एक लंबी प्रक्रिया होती है। यही कारण है कि आसानी से कैडेवर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि किसी लावारिस या अन्य शव को प्रयोग में नहीं लिया जा सकता है।




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कैडेवर की कमी सभी मेडिकल कॉलेज में ही है। इसे देखते हुए आभासी शव (वर्चुअल कैडवर) उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही यह उपलब्ध हो जाएंगे। इससे मेडिकल के छात्राओं को मानव शरीर संरचना समझने में मदद मिलेगी।



-डॉ. मुकेशवीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज

फोटो-27-कुछ इस तरह दिखेगी वर्चुअल कैडेवर टेबल। स्रोत: इंटरनेट

फोटो-27-कुछ इस तरह दिखेगी वर्चुअल कैडेवर टेबल। स्रोत: इंटरनेट- फोटो : 1

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