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एमडी की कुर्सी खाली, अभी बचे रहेंगे बवाली
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Wed, 03 Feb 2016 12:09 AM IST
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बिजली विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में जांच अधिकारी ने अभी तक चीफ इंजीनियर तक रिपोर्ट नहीं पहुंचाई है। इसके पीछे एमडी की कुर्सी खाली होने का भी कारण माना जा रहा है। इसके चलते घोटाले में संलिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों को अभी कुछ दिन और कार्रवाई से राहत मिल गई है। वजह बिना एमडी के कार्रवाई के संबंध में निर्णय लिया जाना संभव नहीं बताया जा रहा है। वहीं जांच रिपोर्ट का खुलासा होने और कार्रवाई के बीच बीत रहा समय इस पूरे मामले को गर्त में दबाता जा रहा है।
शहर में अक्तूबर 2015 में एक ही दिन में हुए पचास लाख रुपये के बिलों में घोटाले के अलावा एक माह में लगभग तीन करोड़ रुपये के बिल अवैध रुप से संशोधित कर घोटाले करने के मामले में अभी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंच सकी है। इस मामले में अब एक नया मोड़ सामने आ गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इतने बड़े मामले में एमडी स्तर से ही कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड के तत्कालीन एमडी प्रभू नारायण सिंह का जनवरी 2016 के प्रथम सप्ताह में स्थानांतरण हो जाने से आज तक यह कुर्सी खाली पड़ी है। ऐसे में जांच अधिकारी भी पूरी लापरवाही बरतने पर आमादा है। वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट चीफ इंजीनियर की मेज पर पहुंच भी जाती है तो इस मामले में वह किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने में सक्षम अधिकारी नहीं बताए जा रहे हैं।
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क्योंकि इस पूरे प्रकरण में जहां कर्मचारियों के साथ-साथ अधिकारियों की भी संलिप्तता सशंकित है। ऐसे में बिना एमडी के कार्रवाई हो पाना भी संभव नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के चलते घोटाले में शामिल संलिप्ततों को अभी कुछ दिन मौज मारने की छूट मिल गई है। हालांकि इस पूरे मामले में कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहा है। इससे मामले की गंभीरता संदिग्ध नजर आ रही है।
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शहर में अक्तूबर 2015 में एक ही दिन में हुए पचास लाख रुपये के बिलों में घोटाले के अलावा एक माह में लगभग तीन करोड़ रुपये के बिल अवैध रुप से संशोधित कर घोटाले करने के मामले में अभी जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंच सकी है। इस मामले में अब एक नया मोड़ सामने आ गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इतने बड़े मामले में एमडी स्तर से ही कार्रवाई की जा सकती है।
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वहीं दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड के तत्कालीन एमडी प्रभू नारायण सिंह का जनवरी 2016 के प्रथम सप्ताह में स्थानांतरण हो जाने से आज तक यह कुर्सी खाली पड़ी है। ऐसे में जांच अधिकारी भी पूरी लापरवाही बरतने पर आमादा है। वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट चीफ इंजीनियर की मेज पर पहुंच भी जाती है तो इस मामले में वह किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने में सक्षम अधिकारी नहीं बताए जा रहे हैं।
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क्योंकि इस पूरे प्रकरण में जहां कर्मचारियों के साथ-साथ अधिकारियों की भी संलिप्तता सशंकित है। ऐसे में बिना एमडी के कार्रवाई हो पाना भी संभव नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के चलते घोटाले में शामिल संलिप्ततों को अभी कुछ दिन मौज मारने की छूट मिल गई है। हालांकि इस पूरे मामले में कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहा है। इससे मामले की गंभीरता संदिग्ध नजर आ रही है।