फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   maker sankrinti

ब्रह्म मुर्हूत में डुबकी लगाने की मिलता है मोक्ष

Wed, 15 Jan 2020 12:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2020 12:48 AM IST
विज्ञापन
maker sankrinti
औरैया। बीहड़ाचंल स्थित पंचनद का पौराणिक महत्व है। मकर संक्रांति पर ब्रह्ममुहूर्त में डुबकी लगाने से काल सर्प योग से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मौके पर तिल, रेवड़ी ,फल, मिष्ठान गरीबों को दान करना शुभ माना गया है।
विज्ञापन

मकर संक्रांति पर पंचनदपुर पर काल सर्प योग से मोछ पाने के लिए बड़ी संख्या में औरैया, इटावा, जालौन, झांसी, ललितपुर के अलावा राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश आदि के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगता है। डुबकी के बाद भारेश्वर, कालेश्वर, करनखेरा, मुकुंद वन व प्रमोद वन से सुशोभित पंचनद स्थल पर धर्म लाभ लेने के लिए डुबकी लगाने आते हैं। इस अवसर पर मेले का भी आयोजन किया जाता है। इसके लिए यहां पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पंचनद पर यमुना, चंबल, सिंधु, क्वारी और पहुज नदियों का समागम स्थल पचनद, इटावा, जालौन व औरैया की सीमा पर स्थित है। प्राचीन काल से इस स्थान को तपोभूमि के नाम से जाना जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित इस स्थान पर बड़े-बड़े ऋषि मुनियों ने तप कर इस भूमि को पावन किया था। मान्यता है कि पचनद स्थल पर ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर सूर्य देव को आचमन करने के बाद यहां भगवान कालेश्वर महाराज की आराधना करने की सदियों पुरानी परंपरा हैं। मकर संक्रांति पर इस स्थान का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस पर्व पर सुबह की बेला में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का काल सर्प योग टल जाता हैै। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। शास्त्रों में इस अवधि को विशेष शुभ माना जाता है। आचार्य पंडित प्रमोद पांडेय बताते हैं कि मकर संक्रांति पर्व पर भगवान कालेश्वर की पूजा विधि विधान से कर तिल, रेवड़ी, फल मेवा, मिष्ठान आदि का दान देने की मान्यता है।
विज्ञापन

मकर संक्रांति के पर्व पर बीहड़ांचल स्थित यमुना घाट पर जिले के अलावा जालौन, कानपुर देहात आदि के बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं। त्योहार के मद्देनजर घाटों पर कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है। हजारों साल पुरानी नहाने के लिए बनीं विसरात जर्जर और खस्ताहाल हैं। यमुना के घाट गंदगी से पटे पड़े हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को स्नान आदि करने में परेशानी उठाने पडने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed