{"_id":"651319fd19515d5468070d94","slug":"lack-of-space-in-depot-automatic-washing-machine-not-being-installed-auraiya-news-c-211-1-aur1002-3364-2023-09-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: डिपो में जगह का अभाव, नहीं लग पा रही ऑटोमेटिक धुलाई मशीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: डिपो में जगह का अभाव, नहीं लग पा रही ऑटोमेटिक धुलाई मशीन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। रोडवेज डिपो की बसों में स्वच्छता के साथ ही यात्रियों के संक्रमण रहित सफर को लेकर परिवहन निगम बसों की धुलाई के लिए ऑटोमेटिक बस वाॅशिंग प्लांट व वाटर रिसाइकिलिंग पर जोर दिया है। इससे ठेके की व्यवस्था से छुटकारा पाने पर काम किया जा रहा है। मगर औरैया डिपो परिसर में जगह का अभाव होने की वजह से मशीन नहीं लग पा रही है।
रोडवेज डिपो में पिछले कई वर्षों से ठेकेदारी व्यवस्था के तहत बसों की धुलाई कराई जा रही है। रोजाना बसों की सर्विस के बाद होने वाली बसों की सफाई से लेकर धुलाई के लिए प्रति बस डिपो को 42 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। रोजाना तकरीबन 30-40 बसों की धुलाई व सफाई होती है। भारी मात्रा में पानी खर्च हो रहा है।
डिपो के अधिकारियों की माने तो ऑटोमेटिक मशीन में पानी का खर्च बहुत कम होता है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के संक्रमण को लेकर सेनिटाइजिंग की व्यवस्था भी रहती है। ठेकेदारी व्यवस्था के तहत संक्रमण को लेकर कोई विशेष व्यवस्था सफाई के लिए फिलहाल अपनाई नहीं जा रही। कोविड काल के दौरान काफी हद तक सावधानी बरती गई। डिपो में जगह की कमी ऑटोमेटिक बस वाशिंग प्लांट और वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट के लिए रोढ़ा बनी है। डिपो में रोजाना बसों की धुलाई के लिए ठेकेदारी व्यवस्था के तहत काम कराया जाता है। प्रति बस 42 रुपये ठेकेदार को दिए जाते हैं। ऑटोमेटिक बस वॉशिंग प्लांट स्थापित हो जाने से रोजाना का खर्च रुकेगा।
विज्ञापन
डिपो की वर्कशाप में ऑटोमेटिक बस वॉशिंग प्लांट और वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट स्थापित कराने के लिए पिछले छह माह में तीन बार निगम की टीम ने सर्वे किया है। प्लांट स्थापना के लिए जगह की कमी खल रही है। फिलहाल जमीन की कमी को पूरा करने के लिए दूसरे उपायों पर विचार किया जा रहा है। - अपर्णा मीनाक्षी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज डिपो
विज्ञापन
औरैया। रोडवेज डिपो की बसों में स्वच्छता के साथ ही यात्रियों के संक्रमण रहित सफर को लेकर परिवहन निगम बसों की धुलाई के लिए ऑटोमेटिक बस वाॅशिंग प्लांट व वाटर रिसाइकिलिंग पर जोर दिया है। इससे ठेके की व्यवस्था से छुटकारा पाने पर काम किया जा रहा है। मगर औरैया डिपो परिसर में जगह का अभाव होने की वजह से मशीन नहीं लग पा रही है।
रोडवेज डिपो में पिछले कई वर्षों से ठेकेदारी व्यवस्था के तहत बसों की धुलाई कराई जा रही है। रोजाना बसों की सर्विस के बाद होने वाली बसों की सफाई से लेकर धुलाई के लिए प्रति बस डिपो को 42 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। रोजाना तकरीबन 30-40 बसों की धुलाई व सफाई होती है। भारी मात्रा में पानी खर्च हो रहा है।
विज्ञापन
डिपो के अधिकारियों की माने तो ऑटोमेटिक मशीन में पानी का खर्च बहुत कम होता है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के संक्रमण को लेकर सेनिटाइजिंग की व्यवस्था भी रहती है। ठेकेदारी व्यवस्था के तहत संक्रमण को लेकर कोई विशेष व्यवस्था सफाई के लिए फिलहाल अपनाई नहीं जा रही। कोविड काल के दौरान काफी हद तक सावधानी बरती गई। डिपो में जगह की कमी ऑटोमेटिक बस वाशिंग प्लांट और वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट के लिए रोढ़ा बनी है। डिपो में रोजाना बसों की धुलाई के लिए ठेकेदारी व्यवस्था के तहत काम कराया जाता है। प्रति बस 42 रुपये ठेकेदार को दिए जाते हैं। ऑटोमेटिक बस वॉशिंग प्लांट स्थापित हो जाने से रोजाना का खर्च रुकेगा।
विज्ञापन
डिपो की वर्कशाप में ऑटोमेटिक बस वॉशिंग प्लांट और वाटर रिसाइकिलिंग प्लांट स्थापित कराने के लिए पिछले छह माह में तीन बार निगम की टीम ने सर्वे किया है। प्लांट स्थापना के लिए जगह की कमी खल रही है। फिलहाल जमीन की कमी को पूरा करने के लिए दूसरे उपायों पर विचार किया जा रहा है। - अपर्णा मीनाक्षी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज डिपो