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Auraiya News: कलयुग में भगवान नाम जपने मात्र से दूर होते हैं संकट
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संवाद न्यूज एजेंसी
अजीतमल। क्षेत्र के गांव बिरूहूनी स्थित बाग में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य श्याम जी ने कहा कि कलयुग में भगवान का जाप करने मात्र से सभी संकट दूर हो जाते हैं। इसलिए भगवान का नाम जाप कलयुग में आवश्यक है।
आचार्य ने कहा कि संत और सैनिक एक समान हैं। जिस प्रकार संत समाज की बुराइयों को दूर करके धर्म की अलख जगाते हैं। ठीक उसी प्रकार सैनिक भी देश की रक्षा करके अपने प्राणों की आहुति भी देकर अपने देश की आन बान और शान की रक्षा करते हैं। साथ ही समाज को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराते हैं।
अगले प्रसंग में उन्होंने कहा कि प्रभु की अलग-अलग काल में अलग तरह से आराधना कर उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। कहा कि सतयुग में सतीत्व के बल पर, त्रेता में प्रेम से और द्वापर में कर्म के द्वारा ईश्वर की प्राप्ति हुई है। वहीं कलयुग में ईश्वर के नाम जप से सब संकट दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हर वक्त ईश्वर का ध्यान करना चाहिये। चाहे वह कहीं भी हो किसी भी कार्य पर हो। तभी वह ईश्वर की भक्ति कर सकता है। इस मौके पर उत्तम शुक्ला, अमर सिंह परिहार, देवदत्त दुबे, काव्यांश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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अजीतमल। क्षेत्र के गांव बिरूहूनी स्थित बाग में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य श्याम जी ने कहा कि कलयुग में भगवान का जाप करने मात्र से सभी संकट दूर हो जाते हैं। इसलिए भगवान का नाम जाप कलयुग में आवश्यक है।
आचार्य ने कहा कि संत और सैनिक एक समान हैं। जिस प्रकार संत समाज की बुराइयों को दूर करके धर्म की अलख जगाते हैं। ठीक उसी प्रकार सैनिक भी देश की रक्षा करके अपने प्राणों की आहुति भी देकर अपने देश की आन बान और शान की रक्षा करते हैं। साथ ही समाज को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराते हैं।
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अगले प्रसंग में उन्होंने कहा कि प्रभु की अलग-अलग काल में अलग तरह से आराधना कर उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। कहा कि सतयुग में सतीत्व के बल पर, त्रेता में प्रेम से और द्वापर में कर्म के द्वारा ईश्वर की प्राप्ति हुई है। वहीं कलयुग में ईश्वर के नाम जप से सब संकट दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हर वक्त ईश्वर का ध्यान करना चाहिये। चाहे वह कहीं भी हो किसी भी कार्य पर हो। तभी वह ईश्वर की भक्ति कर सकता है। इस मौके पर उत्तम शुक्ला, अमर सिंह परिहार, देवदत्त दुबे, काव्यांश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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