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Auraiya News: आठ साल में जिले के कोर्ट ने छह को दी फांसी
Thu, 10 Jul 2025 11:17 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 10 Jul 2025 11:17 PM IST
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औरैया। न्याय प्रक्रिया में तेजी, चार्जशीट में मजबूत साक्ष्य और वादकारियों की अडिग पैरवी से जिले में आठ साल के अंदर छह मामलों में फांसी की सजा दी। इनमें तीन मामले दुष्कर्म के हैं और दो हत्या के हैं।
फफूंद थाना क्षेत्र के बरौआ गांव की रहने वाली तीन बच्चों की हत्यारी मां को गुरुवार को आरोप सिद्ध होने पर फांसी की सजा सुनाई गई है। इसमें उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा हुई है। यह मामला 11 माह पुराना है। इसमें जीवित बचे आरोपी महिला के नौ वर्षीय बेटा व देवर की मजबूत गवाही से यह फैसला संभव हुआ।
इसे मिलाकर आठ साल के अंतराल में जिले में छह मामलों में फांसी की सजा हो चुकी है। फांसी की पहली सजा वर्ष 2007 में हुई थी। यह मामला फफूंद का था। इसमें एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी व दो बच्चों की धारदार हथियारों से हत्या कर दी थी। वर्ष 2019 में फांसी की दूसरी सजा एरवाकटरा क्षेत्र के आरोपी को मिली थी। इसमें 13 वर्षीय बालिका को एकतरफा प्रेम में घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर देने का आरोप सिद्ध हुआ था।
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वर्ष 2022 में बिधूना में साढ़े तीन साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में भी आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2023 में अयाना में आठ साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपी पर दोष साबित होने पर उसे फांसी की सजा दी गई थी। वर्ष 2024 में दिबियापुर में साली से दुष्कर्म के बाद हत्या करने का मामला सामने आया था। इसमें भी मजबूत पैरवी व अडिग गवाही से आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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गुरुवार का दिन अहम
यह भी संयोग रहा कि जिस दिन फांसी की सजा पाई महिला प्रियंका ने अपने तीन बेटों को नदी में डुबोकर मारा था। वह दिन भी गुरुवार था। आज जब फैसला आया तब भी दिन गुरुवार ही है। इससे महिला के जीवन में यह दिन अशुभ ही साबित हुआ।
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फफूंद थाना क्षेत्र के बरौआ गांव की रहने वाली तीन बच्चों की हत्यारी मां को गुरुवार को आरोप सिद्ध होने पर फांसी की सजा सुनाई गई है। इसमें उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा हुई है। यह मामला 11 माह पुराना है। इसमें जीवित बचे आरोपी महिला के नौ वर्षीय बेटा व देवर की मजबूत गवाही से यह फैसला संभव हुआ।
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इसे मिलाकर आठ साल के अंतराल में जिले में छह मामलों में फांसी की सजा हो चुकी है। फांसी की पहली सजा वर्ष 2007 में हुई थी। यह मामला फफूंद का था। इसमें एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी व दो बच्चों की धारदार हथियारों से हत्या कर दी थी। वर्ष 2019 में फांसी की दूसरी सजा एरवाकटरा क्षेत्र के आरोपी को मिली थी। इसमें 13 वर्षीय बालिका को एकतरफा प्रेम में घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर देने का आरोप सिद्ध हुआ था।
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वर्ष 2022 में बिधूना में साढ़े तीन साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में भी आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2023 में अयाना में आठ साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपी पर दोष साबित होने पर उसे फांसी की सजा दी गई थी। वर्ष 2024 में दिबियापुर में साली से दुष्कर्म के बाद हत्या करने का मामला सामने आया था। इसमें भी मजबूत पैरवी व अडिग गवाही से आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
गुरुवार का दिन अहम
यह भी संयोग रहा कि जिस दिन फांसी की सजा पाई महिला प्रियंका ने अपने तीन बेटों को नदी में डुबोकर मारा था। वह दिन भी गुरुवार था। आज जब फैसला आया तब भी दिन गुरुवार ही है। इससे महिला के जीवन में यह दिन अशुभ ही साबित हुआ।