{"_id":"5fd3ba9a8ebc3e435813c7fa","slug":"ima-s-patient-upset-due-to-strike-auraiya-news-knp599355995","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईएमए की हड़ताल से मरीज परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईएमए की हड़ताल से मरीज परेशान
विज्ञापन
फोटो 11एयूआरपी06- प्राइवेट क्लीनिक बंद होने पर बीमार बच्चे को लेकर लौटता दंपति।
- फोटो : AURAIYA
औरैया। आयुष चिकित्सकों को 58 तरह की सर्जरी की छूट के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के चिकित्सकों ने शुक्रवार को 24 घंटे की हड़ताल की। हड़ताल के चलते किसी भी प्राइवेट अस्पताल में ओपीडी संचालित न होने से मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, जिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ। वहां स्टाफ कम होने के चलते मरीजों को एक घंटे इंतजार करना पड़ा।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हड़ताल शुक्रवार की सुबह छह बजे से शनिवार सुबह छह बजे तक चली। इस हड़ताल को शुरू करने से पहले गुरुवार की देरशाम संगठन की बैठक आयोजित की गई थी। प्राइवेट चिकित्सक डॉ. जीएन अग्रवाल ने बताया कि सर्जरी सिर्फ सर्जन ही कर सकता है। इसके लिए सर्जन ने काफी अध्ययन और शोध किए होते हैं। लेकिन, जिन लोगों ने कभी सर्जरी की पढ़ाई नहीं की और उन्हें सर्जरी की अनुमति दी जा रही है। जो खतरे से खाली नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति मरीजों के हित में नहीं हैं।
कहा कि यदि आयुर्वेदिक चिकित्सक सर्जरी करेंगे तो उसके दुष्परिणाम जनता के साथ ही एलोपैथ के डॉक्टरों को भी भुगतना पड़ेगा। आयुर्वेदिक चिकित्सक की सर्जरी से यदि मरीज गंभीर हुआ तो वह एलोपैथ के चिकित्सक के पास ही जाएगा और समस्या बढ़ जाएगी। ऐसे में लोगों का विश्वास चिकित्सक से उठ जाएगा। कई चिकित्सकों के क्लीनिकों पर ताला पड़ा रहा। वहीं, चिकित्सक के होते हुए भी स्टाफ नेे चिकित्सक के न होने की जानकारी देते हुए मरीजों को लौटाया।
विज्ञापन
सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या में हुआ इजाफा
आईएमए की हड़ताल के चलते सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक देखने को मिली। वहीं, अस्पताल बंद होने के बाद प्राइवेट चिकित्सकों के क्लीनिक बंद होने के चलते इमरजेंसी में मरीज अधिक संख्या में पहुंचे। 50 शय्या अस्पताल के पर्ची काउंटर पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि शुक्रवार को मरीजों की संख्या 400 के पार रही। डॉ. पीके कटियार व एक अन्य चिकित्सक के भरोसे मरीज रहे। जिसके चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हड़ताल शुक्रवार की सुबह छह बजे से शनिवार सुबह छह बजे तक चली। इस हड़ताल को शुरू करने से पहले गुरुवार की देरशाम संगठन की बैठक आयोजित की गई थी। प्राइवेट चिकित्सक डॉ. जीएन अग्रवाल ने बताया कि सर्जरी सिर्फ सर्जन ही कर सकता है। इसके लिए सर्जन ने काफी अध्ययन और शोध किए होते हैं। लेकिन, जिन लोगों ने कभी सर्जरी की पढ़ाई नहीं की और उन्हें सर्जरी की अनुमति दी जा रही है। जो खतरे से खाली नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति मरीजों के हित में नहीं हैं।
विज्ञापन
कहा कि यदि आयुर्वेदिक चिकित्सक सर्जरी करेंगे तो उसके दुष्परिणाम जनता के साथ ही एलोपैथ के डॉक्टरों को भी भुगतना पड़ेगा। आयुर्वेदिक चिकित्सक की सर्जरी से यदि मरीज गंभीर हुआ तो वह एलोपैथ के चिकित्सक के पास ही जाएगा और समस्या बढ़ जाएगी। ऐसे में लोगों का विश्वास चिकित्सक से उठ जाएगा। कई चिकित्सकों के क्लीनिकों पर ताला पड़ा रहा। वहीं, चिकित्सक के होते हुए भी स्टाफ नेे चिकित्सक के न होने की जानकारी देते हुए मरीजों को लौटाया।
विज्ञापन
सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या में हुआ इजाफा
आईएमए की हड़ताल के चलते सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक देखने को मिली। वहीं, अस्पताल बंद होने के बाद प्राइवेट चिकित्सकों के क्लीनिक बंद होने के चलते इमरजेंसी में मरीज अधिक संख्या में पहुंचे। 50 शय्या अस्पताल के पर्ची काउंटर पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि शुक्रवार को मरीजों की संख्या 400 के पार रही। डॉ. पीके कटियार व एक अन्य चिकित्सक के भरोसे मरीज रहे। जिसके चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।