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औरैयाः सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न, गोहानी कला से संपर्क टूटा

Fri, 19 Aug 2022 11:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 19 Aug 2022 11:46 PM IST
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Hundreds of acres of crops submerged, lost contact with Gohani Kala
फोटो-19एयूआरपी-07- सिकरोड़ी के जाजपुर के पास खेतों में भरा यमुना का पानी। संवाद - फोटो : AURAIYA
अयाना/अजीतमल। कोटा बैराज से 1.85 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से यमुना नदी का जलस्तर शुक्रवार सुबह जलस्तर 112.12 मीटर पहुंच गया, जो चेतावनी बिंदु से महज .88 सेमी दूर है। अब गोहानी कला गांव का संपर्क मार्ग पूरी तरह से डूब गया है।
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वहीं, अजीतमल तहसील के फरिहा, बीझलपुर, सिकरोड़ी व औरैया तहसील के क्योटरा, अस्ता, मढ़ापुर, नौरी गांव में किसानों की सैकड़ों एकड़ धान, बाजरा, ज्वार व मक्के की फसल जलमग्न हो गई। अब ग्रामीणों को घरों तक पानी पहुंचने की चिंता सता रही है। वहीं, जिला प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। ज्ञात हो कि यमुना नदी में चेतावनी बिंदु 113 मीटर जबकि खतरे का निशान 114 मीटर है।
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यमुना का पानी गांवों तक पहुंचने से लोगों में दहशत बढ़ती जा रही है। शुक्रवार सुबह गोहानी कला गांव में रपटा पुल का संपर्क मार्ग पूरी तरह डूब गया। लोगों को आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। अब लोग बीहड़ से छोटी गुहानी होते हुए अजीतमल आ रहे हैं। गांव किनारे तक पानी पहुंचने से सैकड़ों एकड़ फसलें डूब गई हैं। जिला प्रशासन ने नौ लेखपालों को निगरानी के लिए लगाया है।
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एसडीएम अजीतमल अखिलेश कुमार ने बताया कि यमुना का जलस्तर दोपहर बाद स्थिर हुआ है। इसके बाद भी लेखपालों को निगरानी करने के लिए लगाया गया है। इसके साथ ही ग्रामीणों को पानी बढ़ने पर अयाना, बड़ेरा, अमावता के ऊंचे स्थानों पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन लोगों को सुरक्षित करने का इंतजाम कर रहा है। औरैया तहसील के तहसीलदार रणवीर सिंह व नायब तहसीलदार पवन कुमार ने नौरी, आस्ता गांव का निरीक्षण कर जायजा लिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें हुईं अलर्ट
पिछले वर्ष बाढ़ से यमुना किनारे बसे 22 गांव डूब गए थे। इस बार पहले से सबक लेते हुए प्रशासन अलर्ट है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट किया है। अजीतमल सीएचसी अधीक्षक डॉ. अवनीश कुमार ने बताया कि एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं को बीमार व्यक्ति की जानकारी देने के निर्देश हैं। गांव में ब्लीचिंग पाउडर आदि की छिड़काव कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कैलाश बाबू ने बताया कि गांवों में प्रधानों से संपर्क किया जा रहा है। ग्रामीणों को पानी से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पशुओं के बीमार होने पर टीम भेज कर इलाज किया जाएगा।

ग्रामीणों को पशु, फसल और घरों की चिंता
पिछले वर्ष आई बाढ़ का नजारा देख आज भी लोग सिहर उठते हैं। सिकरोड़ी गांव की मिथिलेश, ऊषा, पिंकी, रामनरेश, माया देवी आदि बताती हैं कि यमुना का पानी गांव तक पहुंच गया है। फसलें डूब गई हैं। अब घरों के अंदर पानी घुसने की चिंता सता रही है। पिछले वर्ष घर डूब जाने से गृहस्थी पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी, जैसे तैसे साल भर में गृहस्थी जोड़ सके हैं। फिर आपदा आ गई।

ृफोटो-19एयूआरपी-08- सिकरोड़ी गांव तक पहुंचा यमुना का पानी। संवाद

ृफोटो-19एयूआरपी-08- सिकरोड़ी गांव तक पहुंचा यमुना का पानी। संवाद- फोटो : AURAIYA

फोटो-19एयूआरपी-06- गोहानी कला मार्ग पर भरे यमुना के पानी से निकलता बाइक सवार। संवाद

फोटो-19एयूआरपी-06- गोहानी कला मार्ग पर भरे यमुना के पानी से निकलता बाइक सवार। संवाद- फोटो : AURAIYA

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