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मातृभाषा बोलने में हिचक नहीं, गौरव का अहसास हो
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फोटो 19एयूआरपी12- कार्यक्रम के दौरान मौजूद छात्राएं
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा गुरुवार को सॉनिट ग्रुप ऑफ स्टडीज एजुकेशन सोसायटी के प्रशिक्षण केंद्र पर हिंदी है हम विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने हिंदी पर अपने विचारों को व्यक्त किया। वहीं छात्राओं ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा बोलने में हमें हिचक नहीं करनी चाहिए। बल्कि गौरव का एहसास होना चाहिए। हिंदी ने हमें विश्व में सम्मान दिलाया है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में समाजसेवी ज्ञान सक्सेना ने कहा कि समाज जब तक हृदय से मातृभाषा का सम्मान नहीं करेगा, तब तक उसका विकास संभव नहीं हैं। बताया कि इतिहास साक्षी रहा है कि जब भी जन प्रतिनिधियों ने विदेश के कार्यक्रमों में हिंदी भाषा में बात की है, तो विश्व ने उसका स्वागत किया है। स्वामी विवेकानंद द्वारा हिंदी में भाषण देने की बात सुनकर प्रत्येक भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है। पर जब खुद की बारी आती है तो लोग कदम पीछे खींचते हैं। इसी से मातृभाषा पिछड़ती है।
सेवानिवृत्त शिक्षक भीमसेन सक्सेना ने कहा कि हिंदी ने हमें विश्व में नई पहचान दिलाई है। यह भाषा हमें दुनिया भर में सम्मान दिला रही है लेकिन हम हिंदुस्तान में रहते हुए इसे भूल रहे हैं। हमें हिंदी को अपने पुराने स्वरुप में लौटाना होगा और हर भारतीय को गर्व से हिंदी बोलनी होगी। शिक्षाविदों के अनुसार हिंदी शब्दों को नहीं भावनाओं के साथ संदेशन को दूसरों तक पहुंचाती है। यह इसकी सबसे बड़ी खूबी है। हिंदी हमारी पहचान है।
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शिक्षक साक्षी राठौर ने कहा कि राष्ट्रभाषा किसी भी देश की पहचान और गौरव होती है। हिंदी हिंदुस्तान को बांधती है। किसी के प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करना हो तो हिंदी भाषा सबसे अधिक आत्मीय माध्यम है। हिंदी शब्दों को नहीं भावनाओं के साथ संदेश को दूसरों तक पहुंचाती है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम आम बोलचाल की भाषा में हिंदी का ही प्रयोग करें और इस पर गर्व करें। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कुमार केसव, प्रवीन पांडेय, सरिता सिंह, नरेंद्र कुमार सोनी आदि ने सहयोग प्रदान किया।
दिव्या लक्ष्यकार ने कहा कि अमर उजाला लोगों की समस्याओं को प्रकाशित कर जनता में पकड़ बना चुका है। समस्याओं के साथ-साथ अखबार लोगों को जागरुक भी कर रहा है। हिंदी विषय पर कई जानकारी आज के कार्यक्रम में मिली।
निशांत अग्निहोत्री ने कहा कि नौकरी के लिए होने वाले अधिकांश साक्षात्कारों में अंग्रेजी का प्रयोग होता है। जहां हिंदी के प्रयोग की आवश्यकता है।
ज्योति यादव ने बताया कि हिंदी के प्रोत्साहन के लिए कार्यालयों में हिंदी भाषा में कार्य किया जाए। विभागीय सर्कुलर, बैठकों की कार्रवाई व अन्य गतिविधियां हिंदी में की जाए।
योगमाला ने बताया कि इस कार्यक्रम से हिंदी के कुछ शब्दों के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं हैं। यह कार्यक्रम सराहनीय है। अमर उजाला की इस पहल से लोगों में हिंदी के प्रति रुझान तेजी से बढ़ेगा।
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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में समाजसेवी ज्ञान सक्सेना ने कहा कि समाज जब तक हृदय से मातृभाषा का सम्मान नहीं करेगा, तब तक उसका विकास संभव नहीं हैं। बताया कि इतिहास साक्षी रहा है कि जब भी जन प्रतिनिधियों ने विदेश के कार्यक्रमों में हिंदी भाषा में बात की है, तो विश्व ने उसका स्वागत किया है। स्वामी विवेकानंद द्वारा हिंदी में भाषण देने की बात सुनकर प्रत्येक भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है। पर जब खुद की बारी आती है तो लोग कदम पीछे खींचते हैं। इसी से मातृभाषा पिछड़ती है।
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सेवानिवृत्त शिक्षक भीमसेन सक्सेना ने कहा कि हिंदी ने हमें विश्व में नई पहचान दिलाई है। यह भाषा हमें दुनिया भर में सम्मान दिला रही है लेकिन हम हिंदुस्तान में रहते हुए इसे भूल रहे हैं। हमें हिंदी को अपने पुराने स्वरुप में लौटाना होगा और हर भारतीय को गर्व से हिंदी बोलनी होगी। शिक्षाविदों के अनुसार हिंदी शब्दों को नहीं भावनाओं के साथ संदेशन को दूसरों तक पहुंचाती है। यह इसकी सबसे बड़ी खूबी है। हिंदी हमारी पहचान है।
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शिक्षक साक्षी राठौर ने कहा कि राष्ट्रभाषा किसी भी देश की पहचान और गौरव होती है। हिंदी हिंदुस्तान को बांधती है। किसी के प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करना हो तो हिंदी भाषा सबसे अधिक आत्मीय माध्यम है। हिंदी शब्दों को नहीं भावनाओं के साथ संदेश को दूसरों तक पहुंचाती है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम आम बोलचाल की भाषा में हिंदी का ही प्रयोग करें और इस पर गर्व करें। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कुमार केसव, प्रवीन पांडेय, सरिता सिंह, नरेंद्र कुमार सोनी आदि ने सहयोग प्रदान किया।
दिव्या लक्ष्यकार ने कहा कि अमर उजाला लोगों की समस्याओं को प्रकाशित कर जनता में पकड़ बना चुका है। समस्याओं के साथ-साथ अखबार लोगों को जागरुक भी कर रहा है। हिंदी विषय पर कई जानकारी आज के कार्यक्रम में मिली।
निशांत अग्निहोत्री ने कहा कि नौकरी के लिए होने वाले अधिकांश साक्षात्कारों में अंग्रेजी का प्रयोग होता है। जहां हिंदी के प्रयोग की आवश्यकता है।
ज्योति यादव ने बताया कि हिंदी के प्रोत्साहन के लिए कार्यालयों में हिंदी भाषा में कार्य किया जाए। विभागीय सर्कुलर, बैठकों की कार्रवाई व अन्य गतिविधियां हिंदी में की जाए।
योगमाला ने बताया कि इस कार्यक्रम से हिंदी के कुछ शब्दों के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं हैं। यह कार्यक्रम सराहनीय है। अमर उजाला की इस पहल से लोगों में हिंदी के प्रति रुझान तेजी से बढ़ेगा।

फोटो 19एयूआरपी17- कार्यक्रम को संबोधित करते ज्ञान सक्सेना, मौजूद भीमसेन सक्सेना व अन्य- फोटो : AURAIYA