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कोरोना को हराना है, तो स्तनपान कराना है
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औरैया। विश्व स्तनपान सप्ताह का शुक्रवार को समापन हो गया। इस दौरान जिले के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर गर्भवती महिलाओं को स्तनपान के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही यह जानकारी दी गई कि शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाना जरूरी होता है, यह कोरोना जैसी कई बीमारियों से बच्चों की रक्षा कर सकता है।
डिस्ट्रिक्ट कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) अजय कुमार ने बताया कि कोविड-19 सहित अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में मां का दूध सबसे अच्छा आहार माना जाता है। यह न केवल नवजात शिशुओं को बीमारियों से बचाता है, बल्कि शिशुओं के संपूर्ण विकास में भी सहायक होता है। मां के दूध में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो बच्चे के जीवन के लिए अमूल्य हैं। यहां तक कि जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने से शिशु मृत्यु दर में भी कमी लाई जा सकती है।
यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक आशीष शुक्ल बताते हैं कि शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाना जरूरी होता है। वही उसका पहला टीका होता है, जो कोरोना जैसी कई बीमारियों से बच्चों की रक्षा कर सकता है। इसके अलावा मां के दूध में एंटीबॉडी होते हैं जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। उनको कोरोना से आसानी से बचाया जा सकता है। वहीं, चिकित्सकों की मानें तो स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्तन एवं गर्भाशय कैंसर का, हृदय संबंधी रोग, मोटापा व हड्डी संबंधी रोगों का खतरा कम रहता है। आशा कार्यकर्ताओं ने स्लोगन का प्रदर्शन किया।
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डिस्ट्रिक्ट कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) अजय कुमार ने बताया कि कोविड-19 सहित अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में मां का दूध सबसे अच्छा आहार माना जाता है। यह न केवल नवजात शिशुओं को बीमारियों से बचाता है, बल्कि शिशुओं के संपूर्ण विकास में भी सहायक होता है। मां के दूध में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो बच्चे के जीवन के लिए अमूल्य हैं। यहां तक कि जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने से शिशु मृत्यु दर में भी कमी लाई जा सकती है।
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यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक आशीष शुक्ल बताते हैं कि शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध पिलाना जरूरी होता है। वही उसका पहला टीका होता है, जो कोरोना जैसी कई बीमारियों से बच्चों की रक्षा कर सकता है। इसके अलावा मां के दूध में एंटीबॉडी होते हैं जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। उनको कोरोना से आसानी से बचाया जा सकता है। वहीं, चिकित्सकों की मानें तो स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्तन एवं गर्भाशय कैंसर का, हृदय संबंधी रोग, मोटापा व हड्डी संबंधी रोगों का खतरा कम रहता है। आशा कार्यकर्ताओं ने स्लोगन का प्रदर्शन किया।
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