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Auraiya News: रिमझिम फुहार के बीच घरों में हुई हरछठ की पूजा
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घर में हरछठ पूजा करतीं महिलाएं। संवाद
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फोटो-04 - घर में हरछठ पूजा करतीं महिलाएं। संवाद
- उपवास रखकर महिलाओं ने संतान की सुख समृद्धि की मनोकामना की
- पूजन संपन्न होने के बाद गूंजे मंगलगीत, घरों में बने उपवास के आहार
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। रिमझिम बारिश की फुहारों के बीच बुधवार को हरछठ पूजन का आयोजन घर-घर किया गया। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने व्रत रखा। इसके साथ ही पूजन के बाद महिलाओं ने मंगलगीत गाए।
तिलकनगर, दिबियापुर, सहार सहित कई क्षेत्रों में सुबह से ही घरों में हलषष्ठी व्रत की तैयारियां शुरू हो गई थीं। घरों के आंगन और निर्धारित पूजा स्थलों पर पारंपरिक विधि-विधान से हलषष्ठी माता का पूजन किया गया। महिलाओं ने कथा सुनी और अपनी संतान के दीर्घायु एवं निरोगी जीवन की कामना की।
वहीं पारंपरिक गीतों के गायन से पूरा माहौल भक्तिमय रहा। ग्रामीण अंचलों में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने बताया कि हलषष्ठी व्रत उनके लिए केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि संतान के प्रति मां की ममता और आस्था का प्रतीक है। संतान की दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना से महिलाएं श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखती हैं। बुजुर्ग महिलाओं ने भी नई पीढ़ी की महिलाओं को हलषष्ठी की कथा और इससे जुड़ी परंपराओं की जानकारी दी।
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- उपवास रखकर महिलाओं ने संतान की सुख समृद्धि की मनोकामना की
- पूजन संपन्न होने के बाद गूंजे मंगलगीत, घरों में बने उपवास के आहार
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। रिमझिम बारिश की फुहारों के बीच बुधवार को हरछठ पूजन का आयोजन घर-घर किया गया। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने व्रत रखा। इसके साथ ही पूजन के बाद महिलाओं ने मंगलगीत गाए।
तिलकनगर, दिबियापुर, सहार सहित कई क्षेत्रों में सुबह से ही घरों में हलषष्ठी व्रत की तैयारियां शुरू हो गई थीं। घरों के आंगन और निर्धारित पूजा स्थलों पर पारंपरिक विधि-विधान से हलषष्ठी माता का पूजन किया गया। महिलाओं ने कथा सुनी और अपनी संतान के दीर्घायु एवं निरोगी जीवन की कामना की।
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वहीं पारंपरिक गीतों के गायन से पूरा माहौल भक्तिमय रहा। ग्रामीण अंचलों में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने बताया कि हलषष्ठी व्रत उनके लिए केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि संतान के प्रति मां की ममता और आस्था का प्रतीक है। संतान की दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना से महिलाएं श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखती हैं। बुजुर्ग महिलाओं ने भी नई पीढ़ी की महिलाओं को हलषष्ठी की कथा और इससे जुड़ी परंपराओं की जानकारी दी।
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