{"_id":"64e4f7862e07bc480f0d13bb","slug":"had-to-wait-for-several-days-for-elisa-test-auraiya-news-c-211-1-sknp1003-2110-2023-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: एलाइजा जांच के लिए करना पड़ता कई दिन इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: एलाइजा जांच के लिए करना पड़ता कई दिन इंतजार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया।
जिले में डेंगू का प्रकोप चल रहा है, लेकिन जिले में एलाइजा जांच की सुविधा न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा संदिग्ध मरीजों के रक्त सैंपल को कानपुर मेडिकल भेजा जाता है, जिनकी रिपोर्ट आने में कई दिन लगते हैं। इधर अस्पतालों में बुखार के मरीज बढ़ते जा रहे है। जिन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
जिले के कई गांवों में बुखार, डेंगू का प्रकोप फैल रहा है। घरों में एडीज मच्छर का लार्वा भी मिल रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल समेत स्वास्थ्य केंद्रों पर एक हजार के करीब मरीज पहुंचे। इनमें से चार सौ से अधिक मरीज बुखार से ग्रसित पाए गए। जिनकी डॉक्टरों ने जांच की। वहीं जिला अस्पताल में कुछ मरीजों को तेज बुखार होने पर भर्ती किया गया। कई मरीजों ने बदन दर्द, शरीर में कमजोरी व कई दिन से बुखार होने की बात डॉक्टरों को बताई। इस पर कुछ को संदिग्ध मान कर डेंगू व मलेरिया की जांच कराने की सलाह दी गई।
जिला अस्पताल चिचौली की सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि एलाइजा जांच के बाद ही मरीज में डेंगू की पुष्टि मानी जाती है, लेकिन जिले में एलाइजा जांच की सुविधा नहीं है। मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों व कानपुर, सैफई में जांच करानी पड़ रही है।
विज्ञापन
संक्रामक रोग के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि डेंगू के लक्षण वाले संभावित मरीजों के रक्त का सैंपल लिया जाता है, जिसकी एलाइजा जांच के लिए कानपुर मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। बुखार के लक्षण के आधार पर उपचार शुरू कर दिया जाता है।
-- -- --
डेंगू से घबराएं नहीं, समय पर कराएं जांच और उपचार
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार वर्मा ने डेंगू प्रभावित इलाकों में सैंपलिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। डेंगू से बचाव के लिए लोगों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। डेंगू से घबराने की नहीं बल्कि सही समय पर जांच और उपचार की आवश्यकता है। अपने घरों के आसपास साफ सफाई रखें और पूरी बाजू के कपड़े पहने। डेंगू का सही समय पर सही उपचार मिल जाए तो मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इस मौसम में जिसे बुखार की शिकायत हो तत्काल नजदीक के सरकारी अस्पताल में दिखाएं।
-- -- -- -
तीन तरह का होता है डेंगू
एपिडेमोलॉजिस्ट डॉ. सरफराज आलम अंसारी ने बताया कि डेंगू बुखार तीन तरह का होता है। क्लासिकल (साधारण), हेमरेजिक (डीएचएफ) और डेंगूशॉक सिंड्रोम (डीएसएस)। साधारण डेंगू बुखार में मृत्यु नहीं होती।
विज्ञापन
औरैया।
जिले में डेंगू का प्रकोप चल रहा है, लेकिन जिले में एलाइजा जांच की सुविधा न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा संदिग्ध मरीजों के रक्त सैंपल को कानपुर मेडिकल भेजा जाता है, जिनकी रिपोर्ट आने में कई दिन लगते हैं। इधर अस्पतालों में बुखार के मरीज बढ़ते जा रहे है। जिन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
जिले के कई गांवों में बुखार, डेंगू का प्रकोप फैल रहा है। घरों में एडीज मच्छर का लार्वा भी मिल रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल समेत स्वास्थ्य केंद्रों पर एक हजार के करीब मरीज पहुंचे। इनमें से चार सौ से अधिक मरीज बुखार से ग्रसित पाए गए। जिनकी डॉक्टरों ने जांच की। वहीं जिला अस्पताल में कुछ मरीजों को तेज बुखार होने पर भर्ती किया गया। कई मरीजों ने बदन दर्द, शरीर में कमजोरी व कई दिन से बुखार होने की बात डॉक्टरों को बताई। इस पर कुछ को संदिग्ध मान कर डेंगू व मलेरिया की जांच कराने की सलाह दी गई।
विज्ञापन
जिला अस्पताल चिचौली की सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि एलाइजा जांच के बाद ही मरीज में डेंगू की पुष्टि मानी जाती है, लेकिन जिले में एलाइजा जांच की सुविधा नहीं है। मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों व कानपुर, सैफई में जांच करानी पड़ रही है।
विज्ञापन
संक्रामक रोग के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि डेंगू के लक्षण वाले संभावित मरीजों के रक्त का सैंपल लिया जाता है, जिसकी एलाइजा जांच के लिए कानपुर मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। बुखार के लक्षण के आधार पर उपचार शुरू कर दिया जाता है।
डेंगू से घबराएं नहीं, समय पर कराएं जांच और उपचार
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार वर्मा ने डेंगू प्रभावित इलाकों में सैंपलिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। डेंगू से बचाव के लिए लोगों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। डेंगू से घबराने की नहीं बल्कि सही समय पर जांच और उपचार की आवश्यकता है। अपने घरों के आसपास साफ सफाई रखें और पूरी बाजू के कपड़े पहने। डेंगू का सही समय पर सही उपचार मिल जाए तो मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इस मौसम में जिसे बुखार की शिकायत हो तत्काल नजदीक के सरकारी अस्पताल में दिखाएं।
तीन तरह का होता है डेंगू
एपिडेमोलॉजिस्ट डॉ. सरफराज आलम अंसारी ने बताया कि डेंगू बुखार तीन तरह का होता है। क्लासिकल (साधारण), हेमरेजिक (डीएचएफ) और डेंगूशॉक सिंड्रोम (डीएसएस)। साधारण डेंगू बुखार में मृत्यु नहीं होती।