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Auraiya News: 19 ग्राम पंचायतों में होगा कचरे का प्रबंधन
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औरैया। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा अपशिष्ट प्रबंधन योजना शुरू की जाएगी। पहले चरण में जिले की 19 ग्राम पंचायतों पंचायतों को गंदगी से मुक्त बनाने का लक्ष्य दिया गया है। हर गांव में सात से 11 लाख रुपये खर्च कर प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे। जिससे गांव में भी शहर की तर्ज पर कचरा प्रबंधन हो सके।
जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीआरओ) शिवशंकर सिंह ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का उद्देश्य ही ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारना है। अब गांव भी शहर की तर्ज पर कचरा से मुक्त होंगे। गांवों में ठोस व तरल कचरा निपटाने के लिए प्रबंध किए जाएंगे। सफाई के बाद निकलने वाले ठोस व गीले कचरे के निस्तारण के लिए कूड़ा प्रबंधन केंद्र लगाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत 19 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है। उक्त ग्राम पंचायतों के तहत आने वाले 25 गांवों में कार्य शुरू हो गए हैं। जहां पर ठोस, गीले व प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग कर निस्तारित किया जाएगा। गांव में पड़ा कूड़ा पंचायतों के लिए आमदनी का एक साधन बन सकता है। एकत्रित कूड़े से खाद तैयार कर ग्राम पंचायतें राजस्व का साधन भी तैयार कर सकती हैं।
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परिवारों की संख्या के आधार पर गांवों का चयन किया गया है। प्रत्येक पंचायत में आबादी के अनुसार धन का आवंटन हुआ है। उसी लागत से काम कराए जा रहे हैं। इस परियोजना के पूरी होने पर कूड़ा-कचरा की आने वाली समस्या जहां दूर होगी। वहीं गांवों में स्वच्छता बढ़ेगी।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीआरओ) शिवशंकर सिंह ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का उद्देश्य ही ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारना है। अब गांव भी शहर की तर्ज पर कचरा से मुक्त होंगे। गांवों में ठोस व तरल कचरा निपटाने के लिए प्रबंध किए जाएंगे। सफाई के बाद निकलने वाले ठोस व गीले कचरे के निस्तारण के लिए कूड़ा प्रबंधन केंद्र लगाया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत 19 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है। उक्त ग्राम पंचायतों के तहत आने वाले 25 गांवों में कार्य शुरू हो गए हैं। जहां पर ठोस, गीले व प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग कर निस्तारित किया जाएगा। गांव में पड़ा कूड़ा पंचायतों के लिए आमदनी का एक साधन बन सकता है। एकत्रित कूड़े से खाद तैयार कर ग्राम पंचायतें राजस्व का साधन भी तैयार कर सकती हैं।
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परिवारों की संख्या के आधार पर गांवों का चयन किया गया है। प्रत्येक पंचायत में आबादी के अनुसार धन का आवंटन हुआ है। उसी लागत से काम कराए जा रहे हैं। इस परियोजना के पूरी होने पर कूड़ा-कचरा की आने वाली समस्या जहां दूर होगी। वहीं गांवों में स्वच्छता बढ़ेगी।