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Auraiya News: तीन साल में पांच बार जांच, जांच अधिकारी ने लगाई एक रुपये के गबन की रिपोर्ट

Tue, 16 Dec 2025 12:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Tue, 16 Dec 2025 12:24 AM IST
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Five investigations in three years, the investigating officer reported embezzlement of one rupee.
फोटो-18-ग्राम पंचायत खानजहांपुर चिरकुआ का पंचायत भवन। संवाद - फोटो : माता-पिता के साथ लेफ्टिनेंट गौरव मिश्र।
ज्योत्यवेंद्र दुबे
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औरैया। एक रुपये का गबन किए जाने की बात अगर कोई कहे तो शायद आपको भरोसा न हो, लेकिन बिधूना की ग्राम पंचायत खानजहांपुर चिरकुआ में कुछ ऐसा ही हुआ है। यहां जांच अधिकारी ने एक रुपये के गबन की रिपोर्ट दी है। तीन सालों में पांच बार हुई जांच में प्रशासन इस निष्कर्ष पर पहुंच सका।
इस मामले में जांच रिपोर्ट देखकर अधिकारी अचंभित हैं। दूसरी तरफ प्रधान और सचिव एक रुपये के घोटाले को भी जोड़ में हुई गड़बड़ी बता रहे हैं। पूरे सिस्टम की फजीहत शुरू हुई तो अधिकारियों ने प्रकरण को रफा-दफा कर कार्रवाई समाप्त कर दी।
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खानजहांपुर चिरकुआ के ग्राम पंचायत सदस्य कुलदीप शर्मा ने दिसंबर 2022 में डीएम से ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर घोटाले किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। इसमें उन्होंने ग्रामसभा की बैठक, हैंडपंप मरम्मत, स्ट्रीट लाइटों, सोलर लाइटों, सड़क निर्माण और स्कूल के कायाकल्प को लेकर गबन के आरोप लगाए थे। उन्होंने ग्राम पंचायत में करीब 25 से 30 लाख रुपये के गबन किए जाने की बात शिकायती पत्र में कही थी।
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शिकायत पर तत्कालीन डीएम ने 27 दिसंबर 2022 को मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच अधिकारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण और अवर अभियंता आरईडी ने 30 मई 2023 को जांच आख्या दी। इसमें कहा कि अभिलेख न दिए जाने के कारण गबन की जांच नहीं हो सकी।
बाद में 15 जुलाई को उनके स्थानांतरण के बाद मामले की जांच जिला कृषि अधिकारी के पास पहुंच गई। उन्होंने 27 दिसंबर 2023 को निष्कर्षविहीन जांच रिपोर्ट भेज दी। इसके बाद डीएम के पत्र पर दोबारा संशोधित रिपोर्ट दी और डीएम ने 5 फरवरी 2024 को प्रधान के अधिकार सीज करने का नोटिस जारी कर दिया।
बात यहीं खत्म नहीं हुई, ग्राम प्रधान शकुंतला देवी ने 4 मार्च 2024 को सभी कार्य होने की बात कहते हुए प्रत्यावेदन दिया। इस पर डीएम ने दोबारा जांच के आदेश कर दिए। इसका जिम्मा मिला डीसी एनआरएलएम और अवर अभियंता आरईडी को। दोनों ने जांच के बाद शिकायत को फर्जी बता दिया।
उधर, जांच खत्म हुई तो शिकायतकर्ता ने मामले में दोबारा जांच कराने की मांग की। इस पर डीएम ने 12 सितंबर 2024 को पीडी डीआरडीए और अधिशासी अभियंता जल निगम को जांच सौंपी। दोनों अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट में धन का दुरुपयोग किए जाने की पुष्टि की और डीएम ने ग्राम प्रधान के अधिकार सीज कर दिए।
अंतिम जांच ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता को सौंपी गई। बस यहीं से जांच में जो खुलासा हुआ उसने सभी को चौंका दिया। जांच अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में हैंडपंप मरम्मत में एक रुपये का गबन दिखाया। उन्होंने बताया कि एक रुपये का 59500 रुपये के स्थान पर 59501 रुपये का भुगतान ग्राम प्रधान और सचिव ने फर्म को किया है। इतना ही नहीं उन्होंने इसकी वसूली करने की भी संस्तुति कर दी।
इसके अलावा जांच में अन्य कहीं भी वित्तीय अनियमितता न बताते हुए सभी कामों को सही ठहराया। उन्होंने सिर्फ इन कामों में नियमों का पालन न करने का हवाला दिया। जांच रिपोर्ट में एक रुपये के गबन की बात फैली तो पूरे प्रशासन की फजीहत होने लगी।
ग्राम प्रधान और सचिव से जवाब मांगा गया तो उन्होंने एक रुपये के गबन को जांच अधिकारी द्वारा गणना में गलती बताते हुए संशोधन की मांग शुरू कर दी। इस पर बाद में डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने ग्राम प्रधान को चेतावनी देते हुए अधिकार बहाल कर दिए और मामले को रफा-दफा कर दिया। (संवाद)

20 बार गांव गए अधिकारी
पांच बार हुई इस जांच में जहां तीन साल का समय लगा तो वहीं हजारों रुपये का नुकसान भी प्रशासन को हुआ। दरअसल, जांच के दौरान करीब 20 बार अधिकारी ग्राम पंचायत में जांच करने गए। इसमें हजारों रुपये का आने-जाने का खर्च किया गया। इसके साथ ही समय बर्बाद हुआ और दूसरे विभागीय कार्य भी प्रभावित हुए।
दूसरी तरफ कुछ जांच अधिकारियों ने सब ठीक बताया तो कुछ ने गबन होने की बात कही। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर कैसे अधिकारियों की जांच रिपोर्ट अलग-अलग आती रहीं। मामले की फाइल बंद कर दी गई, लेकिन न तो अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई और न ही हास्यास्पद जांच रिपोर्ट देने वाले अधिकारी से जवाब तलब हुआ।


कब किसे दी गई जांच
-27 दिसंबर 2022 को डीएम ने कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण और अवर अभियंता आरईडी को सौंपी जांची
-17 अगस्त 2023 को डीएम के आदेश से जिला कृषि अधिकारी और अवर अभियंता आरईडी को दी गई जांच
-16 मार्च 2024 को डीसी एनआरएलएम और अवर अभियंता आरईडी को डीएम ने सौंपी दोबारा जांच।
-12 सितंबर 2024 को डीएम के आदेश पर पीडी डीआरडीए और अधिशासी अभियंता जल निगम को सौंपी गई जांच ।
-4 जून 2025 को डीएम के आदेश पर अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को सौंपी गई जिम्मेदारी।

खानजहांपुर चिरकुआ की जांच में एक रुपये के गबन का मामला सामने आया था। इसके बाद प्रधान और सचिव के खिलाफ प्रचलित कार्रवाई जिलाधिकारी द्वारा चेतावनी के बाद समाप्त कर दी गई थी।
-संत कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।
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