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Auraiya News: सीटी स्कैन रिपोर्ट में हेराफेरी करने पर सीएमएस समेत तीन पर प्राथमिकी
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अयाना। अयाना क्षेत्र के गांव सिखरना में जानलेवा हमले के आरोपी ने विपक्षी पर सीएमएस से सांठगांठ कर सीटी स्कैन रिपोर्ट में हेराफेरी कर और सिर में फर्जी फ्रैक्चर दिखाकर जेल भिजवाने का आरोप लगाया है। स्थानीय पुलिस और एसपी स्तर पर सुनवाई न होने पर पीड़ित ने कोर्ट की शरण ली। अब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर मेडिकल कॉलेज के सीएमएस समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
गांव सिखरना निवासी राजू उर्फ सुंदरम ने बताया कि गांव निवासी नरेंद्र सिंह ने उसके व कुछ अन्य लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि इस केस को ज्यादा गंभीर बनाने के मकसद से नरेंद्र सिंह और जयप्रकाश उर्फ पम्मू ने मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. जसवंत रत्नाकर से मिलकर गलत तरीके से मेडिकल कराया। नरेंद्र सिंह और जयप्रकाश दोनों सगे भाई हैं। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने सीटी स्कैन रिपोर्ट को चालाकी से एडिट करवाया और उसमें फ्रैक्चर शब्द जुड़वा दिया जबकि वास्तव में सिर में कोई चोट व फ्रैक्चर नहीं था। फर्जी रिपोर्ट को आधार बनाकर डॉ. निशा की ओर से पहली सप्लीमेंट्री रिपोर्ट भी तैयार कर दी गई। दोबारा हुए मेडिकल में सीटी स्कैन के मूल रिकॉर्ड खंगाले गए तो यह पूरी हेराफेरी पकड़ में आई। इसके बाद दूसरी सप्लीमेंट्री रिपोर्ट तैयार की गई। ये दोनों ही रिपोर्ट फिलहाल केस डायरी का हिस्सा हैं।
पीड़ित राजू के अनुसार इस जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले पर उसने पहले अयाना थाने में तहरीर दी थी। वहां सुनवाई न होने पर पंजीकृत डाक के जरिए एसपी अभिषेक भारती से शिकायत की। इसके बाद भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। अंत में वह कोर्ट पहुंचा। थाना प्रभारी निरीक्षक जय प्रकाश पाल ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर सीएमएस, नरेंद्र सिंह और जयप्रकाश उर्फ पम्मू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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चार माह पहले सामने आया था मामला
सीटी स्कैन रिपोर्ट में हेराफेरी का यह मामला करीब चार माह पहले पकड़ा गया था। दर्ज रिपोर्ट के बाद विवेचना के क्रम में मेडिकल कॉलेज पहुंची पुलिस ने जब रिपोर्ट का मिलान कराया था तो मामला पकड़ में आया था। मामले में तीन सदस्यीय स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम ने जांच भी की थी। सीटी स्कैन जांच रिपोर्ट में हेराफेरी को लेकर दो आउटसोर्सिंग कर्मियों की संलिप्तता टीम ने पाई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दोनों कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी थी। टीम ने रेडियोलॉजिस्ट की कार्यकुशलता में भी लापरवाही पाई थी।
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गांव सिखरना निवासी राजू उर्फ सुंदरम ने बताया कि गांव निवासी नरेंद्र सिंह ने उसके व कुछ अन्य लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि इस केस को ज्यादा गंभीर बनाने के मकसद से नरेंद्र सिंह और जयप्रकाश उर्फ पम्मू ने मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. जसवंत रत्नाकर से मिलकर गलत तरीके से मेडिकल कराया। नरेंद्र सिंह और जयप्रकाश दोनों सगे भाई हैं। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने सीटी स्कैन रिपोर्ट को चालाकी से एडिट करवाया और उसमें फ्रैक्चर शब्द जुड़वा दिया जबकि वास्तव में सिर में कोई चोट व फ्रैक्चर नहीं था। फर्जी रिपोर्ट को आधार बनाकर डॉ. निशा की ओर से पहली सप्लीमेंट्री रिपोर्ट भी तैयार कर दी गई। दोबारा हुए मेडिकल में सीटी स्कैन के मूल रिकॉर्ड खंगाले गए तो यह पूरी हेराफेरी पकड़ में आई। इसके बाद दूसरी सप्लीमेंट्री रिपोर्ट तैयार की गई। ये दोनों ही रिपोर्ट फिलहाल केस डायरी का हिस्सा हैं।
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पीड़ित राजू के अनुसार इस जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले पर उसने पहले अयाना थाने में तहरीर दी थी। वहां सुनवाई न होने पर पंजीकृत डाक के जरिए एसपी अभिषेक भारती से शिकायत की। इसके बाद भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। अंत में वह कोर्ट पहुंचा। थाना प्रभारी निरीक्षक जय प्रकाश पाल ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर सीएमएस, नरेंद्र सिंह और जयप्रकाश उर्फ पम्मू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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चार माह पहले सामने आया था मामला
सीटी स्कैन रिपोर्ट में हेराफेरी का यह मामला करीब चार माह पहले पकड़ा गया था। दर्ज रिपोर्ट के बाद विवेचना के क्रम में मेडिकल कॉलेज पहुंची पुलिस ने जब रिपोर्ट का मिलान कराया था तो मामला पकड़ में आया था। मामले में तीन सदस्यीय स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम ने जांच भी की थी। सीटी स्कैन जांच रिपोर्ट में हेराफेरी को लेकर दो आउटसोर्सिंग कर्मियों की संलिप्तता टीम ने पाई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दोनों कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी थी। टीम ने रेडियोलॉजिस्ट की कार्यकुशलता में भी लापरवाही पाई थी।