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Auraiya News: राशनकार्ड में पिता और दो बेटियां मृत... बेबस-बदहाल जिंदगी जिंदा

Tue, 14 Apr 2026 12:38 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Tue, 14 Apr 2026 12:38 AM IST
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Father and two daughters dead on ration card... helpless and miserable lives alive
फोटो-29- जनसेवा केंद्र में राशनकार्ड में बेटियों के नाम जोड़ने के लिए आवेदन करते राजीव कुमार। स
दिबियापुर (औरैया)। आजकल ज्यादातर व्यवस्थाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं लेकिन ऑनलाइन सेवाओं की तकनीकी त्रुटि कई बार परिवारों के लिए संकट बन जाती है।
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ऐसा ही एक मामला दिबियापुर में सामने आया है। यहां एक परिवार में पिता और दो बेटियों को मृत दर्शाकर जनवरी माह में उनका नाम राशन कार्ड से काट दिया गया। ऐसे में उनकी 24 साल की लकवाग्रस्त बेटी को एम्स में निशुल्क दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। बेबस माता-पिता तंगहाली में किसी तरह चार महीने से बेटी के इलाज और गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे हैं।
दिबियापुर कस्बा के मोहल्ला पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर निवासी राजीव कुमार (50) जनसेवा केंद्र संचालक हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी सुमन देवी के नाम से उनका पात्र गृहस्थी का राशनकार्ड है। इस राशनकार्ड में पत्नी कार्डधारक हैं, वह और उनकी दो बेटियां स्वाति और सत्या सदस्य हैं। उनका आरोप है कि जनवरी माह में उनका और उनकी बेटियों का नाम राशनकार्ड से काट दिया गया। राशनकार्ड में तीनों को मृत दर्शाने की वजह से दोबारा आवेदन ही नहीं हो पा रहा है।
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उनका आरोप है कि जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में शिकायत किए तीन माह से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। राजीव ने बताया कि उनकी बेटी स्वाति (24) चार साल की उम्र में दूसरी मंजिल से गिर गई थी। इससे उसे पैरालिसिस (लकवा) हो गया था। पिछले 19 सालों से उसका इलाज एम्स से चल रहा है। अभी तक राशनकार्ड होने पर एम्स के समाज कल्याण विभाग से उन्हें बेटी की दवाइयां मुफ्त में मिल जाती थीं लेकिन अब राशनकार्ड में बेटी व इनका नाम न होने से हर माह 10 हजार रुपये तक की दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की है लेकिन तीन माह से इस समस्या का निस्तारण नहीं हो सका है। उन्होंने परिवार के नाम कैसे कटे, इसकी जांच की मांग की है।



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तंगहाली से चार माह से बेटी का इलाज मुश्किल

राजीव कुमार ने बताया कि वह जनसेवा केंद्र का संचालन कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। चार माह से राशन भी नहीं मिल रहा है। सिर्फ पत्नी के हिस्से का पांच किलो राशन मिलता है। गृहस्थी और इलाज परिवार पर भारी पड़ रहा है। हर महीने 10-12 हजार रुपये की दवा के खर्च से परिवार परेशान हैं। गृहस्थी भी बदहाली में चल रही है।


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कुछ राशनकार्डों को लेकर ऐसी समस्या सामने आई है। यह तकनीकी त्रुटि है। इसे सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।

-राजेश कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी

फोटो-29- जनसेवा केंद्र में राशनकार्ड में बेटियों के नाम जोड़ने के लिए आवेदन करते राजीव कुमार। स

फोटो-29- जनसेवा केंद्र में राशनकार्ड में बेटियों के नाम जोड़ने के लिए आवेदन करते राजीव कुमार। स

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