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जैतापुर गोशाला में अव्यवस्थाएं मिलने पर भड़के डीएम
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जैतापुर गोशाला का निरीक्षण करते जिलाधिकारी प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। सदर तहसील क्षेत्र के जैतापुर गोशाला में शुक्रवार सुबह जिलाधिकारी ने निरीक्षण किया। गोशाला में कमियां व अव्यवस्थाएं देख डीएम ने नाराजगी जताई। डीएम ने गोशाला संचालक को पीपल, पाकड़, बरगद जैसे छायादार वृक्ष लगाने के दिए निर्देश दिए, ताकि गर्मी में गोवंश को परेशानी न हो सकें।
डीएम प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने जैतापुर गोशाला पहुंचे। परिसर में गंदगी और गोबर के ढेर देख नाराजगी जताई। इसके बाद मवेशियों की हालत, उनके इलाज, साफ-सफाई, भूसा, हरा चारा, दाना समेत अन्य अभिलेखों को देखा फिर सेवादारों से बातचीत की। डीएम ने मुख्य गेट के ऊपर कोई भी बोर्ड न लगा होने पर नाराजगी जताई। उन्हें गोशाला की शिलान्यास पट्टिका टूटी मिली।
डीएम ने गोबर गैस प्लांट किस एजेंसी के द्वारा बनाया गया है, इसकी जानकारी ली तो वहां मौजूद लोग सही जानकारी नहीं दे सके। गोशाला में संचालित एनजीओ कृषक संजीवनी के संचालक राधाकांत ने बताया कि गोशाला में कुल 208 नर, 257 मादा मवेशी है। 23 मवेशी गांव वालों को सुपुर्दगी में दिए गए हैं और दो छोटे बछड़ों की मृत्यु हो चुकी है।
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10 सेवकों की निगरानी में गोशाला संचालित की जा रही है, जिनमें आठ सेवक दिन व दो सेवक रात में रहते हैं। डीएम ने निर्देश दिया कि गोशाला के पास जो जगह खाली पड़ी है, उसमें फेंसिंग करा कर चारागाह के लिए प्रयोग किया जाए। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के साथ गोबर का उचित मूल्य तय कर लें। इस दौरान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी आदि रहे।
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डीएम प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने जैतापुर गोशाला पहुंचे। परिसर में गंदगी और गोबर के ढेर देख नाराजगी जताई। इसके बाद मवेशियों की हालत, उनके इलाज, साफ-सफाई, भूसा, हरा चारा, दाना समेत अन्य अभिलेखों को देखा फिर सेवादारों से बातचीत की। डीएम ने मुख्य गेट के ऊपर कोई भी बोर्ड न लगा होने पर नाराजगी जताई। उन्हें गोशाला की शिलान्यास पट्टिका टूटी मिली।
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डीएम ने गोबर गैस प्लांट किस एजेंसी के द्वारा बनाया गया है, इसकी जानकारी ली तो वहां मौजूद लोग सही जानकारी नहीं दे सके। गोशाला में संचालित एनजीओ कृषक संजीवनी के संचालक राधाकांत ने बताया कि गोशाला में कुल 208 नर, 257 मादा मवेशी है। 23 मवेशी गांव वालों को सुपुर्दगी में दिए गए हैं और दो छोटे बछड़ों की मृत्यु हो चुकी है।
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10 सेवकों की निगरानी में गोशाला संचालित की जा रही है, जिनमें आठ सेवक दिन व दो सेवक रात में रहते हैं। डीएम ने निर्देश दिया कि गोशाला के पास जो जगह खाली पड़ी है, उसमें फेंसिंग करा कर चारागाह के लिए प्रयोग किया जाए। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के साथ गोबर का उचित मूल्य तय कर लें। इस दौरान मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी आदि रहे।