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Auraiya News: डायल 1962 पर नहीं होती सुनवाई, खाद वितरण के लिए वैकल्पिक इंतजाम नहीं

Thu, 22 Oct 2026 12:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2026 12:18 AM IST
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Dial 1962 does not respond, there are no alternative arrangements for fertilizer distribution.
फोटो-17- किसानों से संवाद करते अधिकारी। संवाद - फोटो : सांकेतिक
औरैया। ककोर स्थित विकास भवन में बुधवार को हुए किसान दिवस में अधिकारी किसानों के सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। इससे अन्नदाता असंतुष्ट नजर आए। किसानों ने पशु चिकित्सा हेल्पलाइन डायल 1962 की ध्वस्त व्यवस्था और समिति सचिवों की आगामी हड़ताल पर वैकल्पिक इंतजामों को लेकर सवाल उठाए।
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किसान दिवस की शुरुआत विभिन्न विभागों के अधिकारियों के संबोधन से हुई, जिसमें सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी विशन सिंह विकल के संबोधन के बाद किसान अवधेश ने डायल 1962 की शिकायत की। उन्होंने बताया कि पशुओं की आकस्मिक हालत बिगड़ने पर घंटों फोन लगाने के बाद भी संपर्क नहीं हो पाता है। विशन सिंह विकल ने इस खामी को स्वीकार करते हुए कहा कि डायल 1962 का संचालन शासन स्तर से होता है। उन्होंने आईजीआरएस पर आईं 80 से ज्यादा शिकायतों का हवाला दिया और किसानों को नजदीकी पशु अस्पताल के डॉक्टर के संपर्क में रहने की सलाह दी। एआर कॉपरेटिव संजीव कुमार ने योजनाएं बताईं, जिस पर किसान गिरीश सिकरवार ने समिति सचिवों की हड़ताल का मुद्दा उठाया। उन्होंने खाद वितरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पूछी, लेकिन संजीव कुमार कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। जिला विपणन अधिकारी बृजेश कुमार ने धान और बाजरा फसलों पर जागरूक किया।
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किसान शिवपाल ने धान बिक्री पोर्टल पर रकबे के अनुसार उत्पादन फीडिंग की समस्या बताई। उन्होंने कहा कि बीज खरीदते समय 55-60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन बताया जाता है। लेकिन पोर्टल पर आवेदन में केवल 30-35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज ही दर्ज हो पाती है। इससे अधिक उत्पादन होने पर उपज सरकारी क्रय केंद्र में बिक्री नहीं हो पाएगी। जिला विपणन अधिकारी बृजेश कुमार ने बाजरे के लिए 34.22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और धान के लिए 36.70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन की जानकारी दी।
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बृजेश कुमार ने फसल उत्पादन सर्वे के बाद स्थिति साफ होने की बात कही। किसानों के इन तीखे सवालों के बीच जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह किसानों को तर्क देकर समझाते नजर आए। हालांकि, अधिकारी किसानों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाए। बृहस्पतिवार से समितियों के सचिवों की हड़ताल से किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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