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जिला पंचायत सदस्य की लाखों के मकान और जमीन कुर्क
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दिबियापुर (औरैया)। बुधवार को समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य धर्मेंद्र यादव की लाखों की अचल संपत्ति कुर्क कर दी गई।
बुधवार को नायब तहसीलदार पवन कुमार, सहायल थाने के प्रभारी निरीक्षक राजकुमार के नेतृत्व में पुलिस बल दिबियापुर में सहायल रोड पर बने धर्मेंद्र यादव के लगभग 42 लाख कीमत के मकान को कुर्क करने पहुंचा। यहां पर नोटिस चस्पा कर कुर्की की। इसके बाद टीम धर्मेंद्र के उमरसाना स्थित पैतृक गांव पहुंची। यहां पर मोटर ट्रेनिंग स्कूल, 6.50 लाख से ज्यादा कीमत की 0.109 हेक्टेयर भूमि (मां के नाम खरीदी गई), ट्रक (पिता के नाम खरीदा गया) कुर्क किया गया। जिला मजिस्ट्रेट सुनील कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद व समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 की धारा 14 (एक) के तहत आरोपी धर्मेंद्र यादव निवासी ऊमरसाना थाना दिबियापुर की चल अचल संपत्ति की कुर्की के आदेश दिए थे। डीएम ने धर्मेंद्र के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई भी की थी।
धर्मेंद्र ने इटावा जेल में रहते हुए भाग्यनगर ब्लॉक से सबसे बड़े अंतर से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता था। जेल से रिहाई होने के बाद रैली निकालने पर इटावा पुलिस ने उसकी कई गाड़ियां सीज कीं थीं। कुर्की के आदेश के बाद समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने इस प्रक्रिया पर विरोध जताया। जबकि अधिवक्ताओं ने भी आपत्ति जताई थी।
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बुधवार को नायब तहसीलदार पवन कुमार, सहायल थाने के प्रभारी निरीक्षक राजकुमार के नेतृत्व में पुलिस बल दिबियापुर में सहायल रोड पर बने धर्मेंद्र यादव के लगभग 42 लाख कीमत के मकान को कुर्क करने पहुंचा। यहां पर नोटिस चस्पा कर कुर्की की। इसके बाद टीम धर्मेंद्र के उमरसाना स्थित पैतृक गांव पहुंची। यहां पर मोटर ट्रेनिंग स्कूल, 6.50 लाख से ज्यादा कीमत की 0.109 हेक्टेयर भूमि (मां के नाम खरीदी गई), ट्रक (पिता के नाम खरीदा गया) कुर्क किया गया। जिला मजिस्ट्रेट सुनील कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद व समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1986 की धारा 14 (एक) के तहत आरोपी धर्मेंद्र यादव निवासी ऊमरसाना थाना दिबियापुर की चल अचल संपत्ति की कुर्की के आदेश दिए थे। डीएम ने धर्मेंद्र के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई भी की थी।
धर्मेंद्र ने इटावा जेल में रहते हुए भाग्यनगर ब्लॉक से सबसे बड़े अंतर से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता था। जेल से रिहाई होने के बाद रैली निकालने पर इटावा पुलिस ने उसकी कई गाड़ियां सीज कीं थीं। कुर्की के आदेश के बाद समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने इस प्रक्रिया पर विरोध जताया। जबकि अधिवक्ताओं ने भी आपत्ति जताई थी।
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