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Auraiya News: गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पर श्रद्धालुओं ने छका लंगर
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औरैया। गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर महावीरगंज स्थित गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 500 लोगों ने लंगर छका। प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारे को बिजली की रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया।
आठ दिनों से सुबह पांच बजे प्रभातफेरी निकाली जा रही थी। सिख श्रद्धालु नगर के विभिन्न मुहल्लों में घूम-घूम कर गुरुवाणी के शबद-कीर्तन करते हुए ढोलक मजीरों के साथ चल रहे थे। सरदार जगदीप सिंह ने बताया कि प्रभातफेरी का समापन 15 जनवरी को हुआ व उसी दिन श्री अखंड पाठ का आयोजन किया गया। समापन 17 जनवरी दिन बुधवार को हुआ।
गुरुद्वारे में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी वर्गों के लगभग 500 लोगों ने गुरुद्वारे में आकर प्रसाद छका। साथ ही गुरुद्वारे में मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर शाम को रतन दरबार का आयोजन किया गया। इसमें दीप सिंह व भूपिंदर सिंह ने भजन-कीर्तन की प्रस्तुति दी।
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सरदार जगदीप सिंह ने बताया कि गुरुगोबिंद सिंह जी ने मुगल शासनकाल व तत्कालीन शासक औरंगजेब के साथ 14 युद्ध लड़ें। बताया कि मुगल सैनिक हिंदू महिलाओं का शोषण करते थे व उन्हें उठा ले जाते थे। गुरुजी के शिष्य उन शिविरों से महिलाओं, बहू, बेटियों को छुड़ा लाते थे तथा सम्मान सहित उनके घर पहुंचाते थे।
देश व धर्म की रक्षा के खातिर गुरु गोबिंद सिंह के पिता तेग बहादुर व उनके चार बेटों को शहादत भी देनी पड़ी थी। गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारे को झालरों से सजाया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जगदीप सिंह, हरमीत सिंह, राजू जौहरी, गोल्डी, रोमी, रेशू, शोनू, चांदी सरदार आदि ने योगदान दिया।
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आठ दिनों से सुबह पांच बजे प्रभातफेरी निकाली जा रही थी। सिख श्रद्धालु नगर के विभिन्न मुहल्लों में घूम-घूम कर गुरुवाणी के शबद-कीर्तन करते हुए ढोलक मजीरों के साथ चल रहे थे। सरदार जगदीप सिंह ने बताया कि प्रभातफेरी का समापन 15 जनवरी को हुआ व उसी दिन श्री अखंड पाठ का आयोजन किया गया। समापन 17 जनवरी दिन बुधवार को हुआ।
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गुरुद्वारे में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी वर्गों के लगभग 500 लोगों ने गुरुद्वारे में आकर प्रसाद छका। साथ ही गुरुद्वारे में मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर शाम को रतन दरबार का आयोजन किया गया। इसमें दीप सिंह व भूपिंदर सिंह ने भजन-कीर्तन की प्रस्तुति दी।
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सरदार जगदीप सिंह ने बताया कि गुरुगोबिंद सिंह जी ने मुगल शासनकाल व तत्कालीन शासक औरंगजेब के साथ 14 युद्ध लड़ें। बताया कि मुगल सैनिक हिंदू महिलाओं का शोषण करते थे व उन्हें उठा ले जाते थे। गुरुजी के शिष्य उन शिविरों से महिलाओं, बहू, बेटियों को छुड़ा लाते थे तथा सम्मान सहित उनके घर पहुंचाते थे।
देश व धर्म की रक्षा के खातिर गुरु गोबिंद सिंह के पिता तेग बहादुर व उनके चार बेटों को शहादत भी देनी पड़ी थी। गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारे को झालरों से सजाया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जगदीप सिंह, हरमीत सिंह, राजू जौहरी, गोल्डी, रोमी, रेशू, शोनू, चांदी सरदार आदि ने योगदान दिया।