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Auraiya News: बेटी की गवाही से खुला मां की हत्या का राज, दोषी चाचा को उम्रकैद

Sat, 11 Jul 2026 12:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sat, 11 Jul 2026 12:12 AM IST
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Daughter's testimony reveals mother's murder; guilty uncle sentenced to life imprisonment.
औरैया। थाना फफूंद क्षेत्र के मुड़ैना रामदत्त गांव में करीब नौ साल पहले हुई विवाहिता रविन्द्री की हत्या के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है।
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इस पूरे मामले में 2025 में मृतका की बेटी की चश्मदीद गवाही से उसकी मां के हत्यारे चाचा को उम्र कैद की सजा मिली। बेटी ने कोर्ट में रो-रोकर गवाही दी कि उसके चाचा ने ही पीट-पीटकर उसकी मां की हत्या की थी।
अपर सत्र न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह की अदालत ने किशोरी की गवाही और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर अनुरुद्ध उर्फ बबलू को भाभी की हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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अभियोजन के अनुसार थाना फफूंद क्षेत्र के गांव मुड़ैना रामदत्त निवासी वादी दीनदयाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री रविंद्री की शादी नौ साल पहले गांव के ही धर्मेंद्र के साथ की थी। धर्मेंद्र दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है। घर पर रविंद्री अपने देवर बबलू और ससुर विंदकिशोर के साथ रहती थी।
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वादी का आरोप है कि सात जनवरी 2017 को उन्हें मोबाइल पर सूचना दी गई कि रविंद्री ने फंदे से लटककर जान दे दी। सूचना पर वादी जब अपने परिजन और ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचा तो पुत्री का शव घर के आंगन में दरवाजे के सामने पड़ा था। वादी ने आरोप लगाया कि देवर और ससुर आए दिन रविंद्री को प्रताड़ित करते थे।
पुलिस ने पहले मामला आत्महत्या के लिए उकसाने में दर्ज किया था लेकिन विवेचना में ससुर का नाम गलत पाए जाने पर केवल देवर के खिलाफ फरवरी 2017 में आरोप पत्र दाखिल हुआ। 25 फरवरी 2017 को कोर्ट ने केस का संज्ञान लिया। इसके बाद केस चलता रहा। इस मामले में वर्ष 2025 में महिला की 14-15 साल की बेटी की गवाही हुई। इसमें बेटी ने चाचा पर मां को पीट-पीटकर मारने का आरोप लगाया।

शुक्रवार को मामले की अंतिम सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने मृतका की बेटी की गवाही को बेहद गंभीर और विश्वसनीय माना। इसी आधार पर सजा सुनाए जाने के बाद दोषी अनुरुद्ध उर्फ बबलू को जिला कारागार भेज दिया गया।
अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आदेश दिया कि अर्थदंड के रूप में वसूले जाने वाले 50 हजार रुपये में से आधी धनराशि मृतका के बच्चे को दी जाएगी।
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