{"_id":"5e020bd68ebc3e8790407083","slug":"crores-spent-on-odf-many-toilets-incomplete-auraiya-news-knp534070261","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्राम पंचायत पसुआ में एक वर्ष से अधूरे पड़े शौचालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्राम पंचायत पसुआ में एक वर्ष से अधूरे पड़े शौचालय
विज्ञापन
अधूरे पड़े शौचालय में रखी सरसों की तोई।
- फोटो : AURAIYA
जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) के नाम पर दी गई धनराशि का जमकर बंदरबांट किया गया। इसके चलते तमाम ग्राम पंचायतों व उनके मजरों में एक वर्ष से शौचालय अधूरे पड़े हैं।
ठेकेदारी प्रथा से शौचालयों का निर्माण होने से उनकी गुणवत्ता खराब है। इससे लाभार्थी मजबूरन खुले में शौच जाने को विवश हो रहे हैं। इससे फिलहाल शासन की महत्वाकांक्षी योजना यहां दम तोड़ती नजर आ रही है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिले को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। कागजों में शत- प्रतिशत शौचालयों के आंकड़े दिखाकर जिले को ओडीएफ कर दिया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
विज्ञापन
ब्लॉक बिधूना की ग्राम पंचायत पसुआ में बेस लाइन सर्वे के हिसाब से 20 लाख 52 हजार रुपये की धनराशि से 171 शौचालयों का निर्माण का दावा कर ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। छूटे लाभार्थियों के लिए पांच लाख 88 हजार रुपये की धनराशि 49 शौचालयों के लिए भेजी जा चुकी है।
ग्रामीणों के मुताबिक अधिकांश शौचालयों का निर्माण प्रधान द्वारा स्वयं कराया गया है। इससे इनकी गुणवत्ता खराब है। बड़ी तादाद में शौचालय अपूर्ण पड़े हैं। भगवानपुरा पसुआ व भैसलोट लखनहारा में लगभग एक साल से लाभार्थियों के शौचालय अधूरे पड़े हैं, जिनका निर्माण कराया गया है।
वह भी जर्जर हो गए हैं। पसुआ में कई शौचालयों में पटान नहीं हुआ है, सीट भी नहीं लग सकी है। भगवानपुरा में कई शौचालय बिना सीट के अधूरे पड़े हैं। कमोवेश यही स्थिति भैसलौट व लखनहारा की है। लाभर्थियों का आरोप है कि प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने आश्वासन देकर टरका दिया, लेकिन अभी तक शौचालय पूर्ण नहीं हो सके हैं।
ग्राम पंचायत पसुआ व उसके मजरों में शौचालय अधूरे होने की जानकारी मिली है। ग्राम पंचायत का स्थलीय निरीक्षण कर शौचालयों का निर्माण पूरा कराया जाएगा, ताकि लाभार्थियों को कोई असुविधा न हो। -पंकज तिवारी, एडीओ पंचायत बिधूना
ग्रामीणों की ओर से फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन अपने स्तर से इसकी जांच कराएंगे। यदि मामला सही पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -राजेश चौरसिया, डीपीआरओ
विज्ञापन
ठेकेदारी प्रथा से शौचालयों का निर्माण होने से उनकी गुणवत्ता खराब है। इससे लाभार्थी मजबूरन खुले में शौच जाने को विवश हो रहे हैं। इससे फिलहाल शासन की महत्वाकांक्षी योजना यहां दम तोड़ती नजर आ रही है।
विज्ञापन
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत जिले को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। कागजों में शत- प्रतिशत शौचालयों के आंकड़े दिखाकर जिले को ओडीएफ कर दिया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
विज्ञापन
ब्लॉक बिधूना की ग्राम पंचायत पसुआ में बेस लाइन सर्वे के हिसाब से 20 लाख 52 हजार रुपये की धनराशि से 171 शौचालयों का निर्माण का दावा कर ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। छूटे लाभार्थियों के लिए पांच लाख 88 हजार रुपये की धनराशि 49 शौचालयों के लिए भेजी जा चुकी है।
ग्रामीणों के मुताबिक अधिकांश शौचालयों का निर्माण प्रधान द्वारा स्वयं कराया गया है। इससे इनकी गुणवत्ता खराब है। बड़ी तादाद में शौचालय अपूर्ण पड़े हैं। भगवानपुरा पसुआ व भैसलोट लखनहारा में लगभग एक साल से लाभार्थियों के शौचालय अधूरे पड़े हैं, जिनका निर्माण कराया गया है।
वह भी जर्जर हो गए हैं। पसुआ में कई शौचालयों में पटान नहीं हुआ है, सीट भी नहीं लग सकी है। भगवानपुरा में कई शौचालय बिना सीट के अधूरे पड़े हैं। कमोवेश यही स्थिति भैसलौट व लखनहारा की है। लाभर्थियों का आरोप है कि प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने आश्वासन देकर टरका दिया, लेकिन अभी तक शौचालय पूर्ण नहीं हो सके हैं।
ग्राम पंचायत पसुआ व उसके मजरों में शौचालय अधूरे होने की जानकारी मिली है। ग्राम पंचायत का स्थलीय निरीक्षण कर शौचालयों का निर्माण पूरा कराया जाएगा, ताकि लाभार्थियों को कोई असुविधा न हो। -पंकज तिवारी, एडीओ पंचायत बिधूना
ग्रामीणों की ओर से फिलहाल कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन अपने स्तर से इसकी जांच कराएंगे। यदि मामला सही पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -राजेश चौरसिया, डीपीआरओ