{"_id":"585971ba4f1c1b8e03e39730","slug":"crop-insurance-is-not-interested-in-cash-crisis","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगदी संकट से फसल बीमा में रुचि नहीं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगदी संकट से फसल बीमा में रुचि नहीं
auraiya,amar ujala beauro
Updated Tue, 20 Dec 2016 11:30 PM IST
विज्ञापन
किसान
- फोटो : ANI
नगदी संकट का असर फसल बीमा योजना पर भी पड़ा है। ज्यादातर किसानों ने फसल बीमा में रुचि नहीं दिखाई है। अब तक गैर केसीसी धारक तीन हजार 261 किसानों ने ही फसल बीमा कराया है।
रबी की सीजन वाली फसलों गेहूं, सरसों, आलू और मटर का बीमा किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 765 रुपये जमा करने हैं। बीमा से फसल तबाह होने पर किसान को क्लेम मिल जाएगा। साथ ही फसल की बुवाई के लिए किसान ने कर्ज लिया है तो उसे भी चुकाया जा सकता है। नोटबंदी की समस्या से परेशान किसानों ने इस बार फसल बीमा योजना में रुचि नहीं दिखाई।
योजना के तहत किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले किसानों केे लिए फसल का बीमा कराना अनिवार्य है। उनके खाते से फसल बीमा के लिए बैंक प्रीमियम ले लेती है। जिले में एक लाख से अधिक किसान हैं। इनमें से 52 हजार 341 क्रेडिट कार्ड धारक हैं। इनमें से 23 हजार 512 किसानों का ही फसल बीमा हो पाया है। सभी क्रेडिट कार्ड धारकों की फसलों का बीमा नहीं हो पाया है। विभाग का दावा है कि फसल बीमा की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। इस तारीख तक सभी कार्डधारकों की फसलें बीमित हो जाएंगी। विभाग की मानें तो अब तक गैर केसीसी धारक तीन हजार 261 किसानों ने ही फसल बीमा कराया है।
विज्ञापन
औरैया ब्लाक के किसान राम सिंह का कहना है कि खेत की बुवाई के लिए तो रुपये हैं नहीं, फसल बीमा कहां से कराएं। धान की फसल कम दाम में बिकी। उसका भी अब तक भुगतान नहीं हो पाया है।
अंतिम तिथि तक बीमा कराने वालों की संख्या और बढ़ेगी। प्रचार प्रसार किया जा रहा है। करेंसी की समस्या कुछ हद तक दूर हो रही है। सर्वेयर अधिक से अधिक किसानों की फसलों को बीमित करने के प्रयास में लगे हैं।
विजय कुमार
उप कृषि निदेशक
विज्ञापन
रबी की सीजन वाली फसलों गेहूं, सरसों, आलू और मटर का बीमा किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 765 रुपये जमा करने हैं। बीमा से फसल तबाह होने पर किसान को क्लेम मिल जाएगा। साथ ही फसल की बुवाई के लिए किसान ने कर्ज लिया है तो उसे भी चुकाया जा सकता है। नोटबंदी की समस्या से परेशान किसानों ने इस बार फसल बीमा योजना में रुचि नहीं दिखाई।
विज्ञापन
योजना के तहत किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले किसानों केे लिए फसल का बीमा कराना अनिवार्य है। उनके खाते से फसल बीमा के लिए बैंक प्रीमियम ले लेती है। जिले में एक लाख से अधिक किसान हैं। इनमें से 52 हजार 341 क्रेडिट कार्ड धारक हैं। इनमें से 23 हजार 512 किसानों का ही फसल बीमा हो पाया है। सभी क्रेडिट कार्ड धारकों की फसलों का बीमा नहीं हो पाया है। विभाग का दावा है कि फसल बीमा की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। इस तारीख तक सभी कार्डधारकों की फसलें बीमित हो जाएंगी। विभाग की मानें तो अब तक गैर केसीसी धारक तीन हजार 261 किसानों ने ही फसल बीमा कराया है।
विज्ञापन
औरैया ब्लाक के किसान राम सिंह का कहना है कि खेत की बुवाई के लिए तो रुपये हैं नहीं, फसल बीमा कहां से कराएं। धान की फसल कम दाम में बिकी। उसका भी अब तक भुगतान नहीं हो पाया है।
अंतिम तिथि तक बीमा कराने वालों की संख्या और बढ़ेगी। प्रचार प्रसार किया जा रहा है। करेंसी की समस्या कुछ हद तक दूर हो रही है। सर्वेयर अधिक से अधिक किसानों की फसलों को बीमित करने के प्रयास में लगे हैं।
विजय कुमार
उप कृषि निदेशक