{"_id":"58e7db474f1c1bbf7a5b3dd5","slug":"father-son-imprisonment-for-life","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्या में पिता-पुत्र को उम्रकैद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हत्या में पिता-पुत्र को उम्रकैद
औरैया
Updated Sat, 08 Apr 2017 12:02 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : Pintrest
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यायालय सत्र न्यायाधीश हसनैन कुरैशी ने हत्या के मामले में दोषी पिता-पुत्र को उम्रकैद की सजा सुनाई है। एक लाख 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
जानकारी के अनुसार बिरारी इकदिल इटावा निवासी सुमित नरायन पुत्र रामचंद्र ने फफूंद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि सगा भाई ललित कुमार ग्राम सहनगरा में गंगाराम दोहरे के मकान में किराए कमरा लेकर पाता प्लांट में नौकरी करता था। उसी के साथ इटावा के लालपुर भर्थना निवासी मोहनलाल पुत्र नवाब सिंह भी रहता था।
18/19 अगस्त 2014 की रात को ढाई बजे ललित कुमार के मोबाइल फोन से काल आई कि उसका मकान मालिक और इनका लड़का जान से मारने के लिए ढूंढ रहे हैं। वह जीने के नीचे छिपा हुआ है। इसके बाद करीब साढ़े तीन बजे काल आई कि इन लोगों ने उसे पकड़ लिया है। जल्दी आ जाओ। इसके बाद फोन बंद हो गया। प्रार्थी ने बताया कि वे लोग सुबह गंगाराम के घर पहुंचे। यहां उसकी पत्नी ने बताया कि तुम्हारा भाई अभद्रता कर था। इसके बाद भाग गया।
ललित कुमार के परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। दोपहर बाद पता चला कि उसके ललित की लाश रेलवे लाइन के सामने पड़ी है। पुलिस ने गंगाराम व सरमनलाल के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को जिला जज हसनैन कुरैशी ने गंगाराम व उनके लड़के सरमनलाल को ललित कुमार की हत्या का दोषी माना और उम्रकैद व एक लाख 10 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार बिरारी इकदिल इटावा निवासी सुमित नरायन पुत्र रामचंद्र ने फफूंद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि सगा भाई ललित कुमार ग्राम सहनगरा में गंगाराम दोहरे के मकान में किराए कमरा लेकर पाता प्लांट में नौकरी करता था। उसी के साथ इटावा के लालपुर भर्थना निवासी मोहनलाल पुत्र नवाब सिंह भी रहता था।
18/19 अगस्त 2014 की रात को ढाई बजे ललित कुमार के मोबाइल फोन से काल आई कि उसका मकान मालिक और इनका लड़का जान से मारने के लिए ढूंढ रहे हैं। वह जीने के नीचे छिपा हुआ है। इसके बाद करीब साढ़े तीन बजे काल आई कि इन लोगों ने उसे पकड़ लिया है। जल्दी आ जाओ। इसके बाद फोन बंद हो गया। प्रार्थी ने बताया कि वे लोग सुबह गंगाराम के घर पहुंचे। यहां उसकी पत्नी ने बताया कि तुम्हारा भाई अभद्रता कर था। इसके बाद भाग गया।
विज्ञापन
ललित कुमार के परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। दोपहर बाद पता चला कि उसके ललित की लाश रेलवे लाइन के सामने पड़ी है। पुलिस ने गंगाराम व सरमनलाल के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को जिला जज हसनैन कुरैशी ने गंगाराम व उनके लड़के सरमनलाल को ललित कुमार की हत्या का दोषी माना और उम्रकैद व एक लाख 10 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया।
विज्ञापन