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80 हजार खातों की जांच शुरू

Sat, 10 Feb 2018 10:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Sat, 10 Feb 2018 10:38 PM IST
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80 thousand accounts begin scrutiny
दिबियापुर मुख्य डाकघर की बिल्डिंग - फोटो : amarujala

दिबियापुर(औरैया)। एनटीपीसी परिसर में स्थित उपडाकघर में 1316920 रुपये गबन का मामला पकड़ा गया। अब विभाग ने एनटीपीसी उपडाकघर एवं दिबियापुर के मुख्य डाकघर के लगभग 80 हजार खातों की जांच शुरू कर दी है। डाक कर्मियों का मानना है कि जांच में किसी बड़े रैकेट और बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। 13 लाख रुपये गबन होने की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जहां डाकघर में हड़कंप मचा रहा। वहीं उपभोक्ता भी परेशान रहे। इस मामले में एक तथ्य यह भी है कि गबन का खुलासा होने पर दोनों आरोपियों ने रुपये भी जमा कर दिए हैं।

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शुक्रवार की शाम डाक निरीक्षक योगेश कुमार की तहरीर पर एनटीपीसी टाउनशिप में स्थित डाकघर में उप डाकपाल पद पर तैनात रहे विवेक कुमार एवं सहायक उप डाकपाल पद पर दिबियापुर तैनात रहे जयप्रकाश के खिलाफ विभिन्न जमा खातों के अभिलेखों में हेरफेर कर 1316920 रुपये के गबन की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जहां शनिवार को डाकघर कर्मियों में हड़कंप मचा रहा। वहीं उपभोक्ता भी अपने खातों को लेकर बैचेन दिखे।
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इस संबंध में डाकनिरीक्षक योगेश कुमार ने बताया कि एनटीपीसी स्थित उपडाकघर के लगभग 10 हजार एवं दिबियापुर मुख्य डाकघर के लगभग 70 हजार खातों की जांच शुरू की गई है। यदि किसी भी बंद या स्थानांतरित खाते में इस तरह का घोटाला सामने आया तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि खाता धारक परेशान न हों। क्योंकि यह गबन डाकघर का किया गया, न कि  किसी उपभोक्ता के खाते से हुआ। लोगों का मानना है कि आरोपी उप डाकपाल जयप्रकाश दिबियापुर पोस्ट आफिस में लंबे समय से कार्यरत रहे। इसलिए यहां पर और भी खातों की जांच में गबन का मामला सामने आ सकता है।
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी शक के घेरे में
गबन में प्रयोग हुए अधिकतर खाते चतुर्थ श्रेणी कर्मी के रिश्तेदारों या परिचितों के हैं। एनटीपीसी के उपडाकघर में 13 लाख रुपये गबन के मामले में एनटीपीसी उपडाकघर में तैनात एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की भूमिका को संदेह के घेरे में देखा जा रहा है। जिन स्थानांतरित एवं बंद खातों में यह गबन हुआ। उनमें से अधिकतर खाते इसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रिश्तेदारों या परिचितों के बताए जा रहे हैं। बताते हैं कि इसकी जांच रिपोर्ट डाक निरीक्षक योगेश कुमार ने उच्चाधिकारियों को भेजी थी।

डाकघर के कोर बैंकिंग होने के बाद खुला मामला
दिसंबर 2015 से बंद हो चुके एवं स्थानांतरित हो चुके खातों से गबन का सिलसिला अक्टूबर 2016 तक चलता रहा। कई बार आडिट होने के बावजूद इसका खुलासा नहीं हुआ। मामला तब खुला जब अक्टूबर 2016 में दिबियापुर डाकघर सीबीएस श्रेणी में तब्दील हुआ और सभी डाटा कंप्यूटर में चढ़ने लगे। डाक निरीक्षक योगेश कुमार के अनुसार मामला खुलासा होने के बाद अक्टूबर 2017 तक संबंधित कर्मियों ने अपना गला फंसता देख पूरा रुपया भी डाकघर में जमा करा दिया।


स्थानांतरित खातों को दोबारा चालू दिखाकर किया घोटाला  
दिबियापुर(औरैया)।  डाक निरीक्षक योगेश कुमार द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट के अनुसार चार अगस्त 2014 को एमआईएस खाता धारक राजकुमार के दो खाते बंद हो चुके थे। उपडाकपाल विवेक कुमार ने 12 दिसंबर 2015 को सीबीएस माइग्रेशन के दौरान इन्हीं खातों को ज्योति प्रकाश के नाम से एमआईएस स्कीम में माइग्रेट करके दो बार में 108108 रुपये का भुगतान ज्योति प्रकाश के सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया। 11 एवं 15 जनवरी 2016 को ज्योति प्रकाश ने यह रुपया निकाल भी लिया। 13 सितंबर को पूरन सिंह ने 10 रुपये से आरडी खाता खोला। सीबीएस माइग्रेशन के दौरान यह खाता राजेश कुमार के फर्जी नाम से 10 हजार रुपये मूल्यवर्ग पर माइग्रेट किया गया। 20 नवंबर 2015 को 44833 रुपये राजेश कुमार के एसबी खाता में ट्रांसफर कर दिए गए। जबकि 23 नवंबर को ही खाता धारक ने 44500 रुपये की निकासी कर ली। जबकि राजेश कुमार ने अपने बयान में कहा कि उसका कोई खाता ही नहीं है। तीन अप्रैल 2010 को अर्नव राय एवं अयान राय के नाम से खाते खोले गए। दोनों खातों का स्थानांतरण एक अक्टूबर 2014 को आनंद बिहार दिल्ली के लिए किया गया। परन्तु खातों को एनटीपीसी दिबियापुर में ही सीबीएस के दौरान माइग्रेट किया गया। दोनों खातों को बंद कर मोहित कुमार पुत्र मिथलेश कुमार एवं आदेश कुमारी पत्नी मिथलेश कुमार के एसबी ज्वाइंट खाते में 90339 रुपये ट्रांसफर भी किए गए। 28 नवंबर 2015 को विवेक कुमार के अवकाश पर जाने पर दिबियापुर मुख्य डाकघर पर तैनात जयप्रकाश द्वारा एनटीपीसी उपडाकघर में काम किया गया। 25 जुलाई 2015 को आदेश कुमारी एवं मोहित कुमार के दिबियापुर संयुक्त खातों में नौ लाख रुपयों की फर्जी इंट्री उपडाकघर दिबियापुर में की गई थी। इस इंट्री को डाकघर लेखा के हिसाब में नहीं लिया गया था। जयप्रकाश ने इस खाते में आदेश कुमारी के नाम से 28 नवंबर 2015 को एक वर्षीय टीडी खाता उपडाकघर एनटीपीसी में खोला गया। खाते के एक वर्ष से पहले ही 28 अक्टूबर 2016 को यह खाता जयप्रकाश ने बंद भी कर दिया। इसकी रकम 933000 रुपये संबंधित खाताधारक के बचत खाते में स्थानांतरित भी कर दिए गए।

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