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16 साल पुरानी मोहब्बत का सफर मौत पर आकर रुका
अमर उजाला ब्यूरो, औरैया
Updated Thu, 03 Nov 2016 11:36 PM IST
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श्वेता व रूपेंद्र की शादी की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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श्वेता और रूपेंद्र की मोहब्बत 16 साल पुरानी थी। दोनों एक ही मोहल्ले में रहते थे। एक ही कालेज में पढ़ाई की। पढ़ने के दौरान ही इनकी एक दूसरे के घर में आवाजाही थी। धीरे-धीरे दोनों प्रेम में बंध गए। यह बात परिजनों सहित पूरे मोहल्ले को पता थी। वर्ष 2013 में रूपेंद्र ने श्वेता से शादी की इच्छा जताई। सजातीय होने से दोनों परिवार सहमत हो गए। कानपुर में दोनों परिवारों ने धूमधाम से विवाह किया।
भरथना के पास ग्राम हथनौली के मूल निवासी रूपेंद्र का परिवार 1992 से दिबियापुर में रह रहा है। रूपेंद्र के पिता आर्मी में थे। श्वेता के पिता राकेश रोडवेज में परिचालक के पद पर तैनात थे। वह कंचौसी के पास प्रसाद पुर्वा के रहने वाले हैं। वर्ष1995 में वह भी दिबियापुर में रहने लगे। श्वेता व रूपेंद्र एनटीपीसी के केंद्रीय विद्यालय में साथ-साथ पढ़ते थे। इसी बीच दोनों में मोहब्बत हो गई। इंटरमीडिएट के बाद श्वेता अपनी ननिहाल कानपुर चली गई। मामा के यहां रहकर उसने पढ़ाई पूरी की। इस बीच श्वेता व रूपेंद्र के बीच बातचीत और मुलाकातों का सिलसिला जारी रहा। तीन वर्ष पूर्व श्वेता का परिवार यहां से मकान बेचकर चला गया। यह कानपुर के विकास नगर में रहने लगे। श्वेता के पिता वर्तमान में लोनी डिपो गाजियाबाद में रोडवेज में परिचालक हैं। वर्ष 2013 में रूपेंद्र ने श्वेता से शादी करने की इच्छा जताई। सजातीय होने से दोनों परिवार सहमत हो गए।
काल बन गया झगड़ा
कालेज के समय से ही रूपेंद्र और श्वेता के बीच नोकझोंक चलती रहती थी। इनके बीच कई बार झगड़े भी हुए । बाद में फि र से दोस्ती हो गई। इस बार इनकेे बीच का झगड़ा ही दोनों के लिए काल बन गया।
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भरथना के पास ग्राम हथनौली के मूल निवासी रूपेंद्र का परिवार 1992 से दिबियापुर में रह रहा है। रूपेंद्र के पिता आर्मी में थे। श्वेता के पिता राकेश रोडवेज में परिचालक के पद पर तैनात थे। वह कंचौसी के पास प्रसाद पुर्वा के रहने वाले हैं। वर्ष1995 में वह भी दिबियापुर में रहने लगे। श्वेता व रूपेंद्र एनटीपीसी के केंद्रीय विद्यालय में साथ-साथ पढ़ते थे। इसी बीच दोनों में मोहब्बत हो गई। इंटरमीडिएट के बाद श्वेता अपनी ननिहाल कानपुर चली गई। मामा के यहां रहकर उसने पढ़ाई पूरी की। इस बीच श्वेता व रूपेंद्र के बीच बातचीत और मुलाकातों का सिलसिला जारी रहा। तीन वर्ष पूर्व श्वेता का परिवार यहां से मकान बेचकर चला गया। यह कानपुर के विकास नगर में रहने लगे। श्वेता के पिता वर्तमान में लोनी डिपो गाजियाबाद में रोडवेज में परिचालक हैं। वर्ष 2013 में रूपेंद्र ने श्वेता से शादी करने की इच्छा जताई। सजातीय होने से दोनों परिवार सहमत हो गए।
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काल बन गया झगड़ा
कालेज के समय से ही रूपेंद्र और श्वेता के बीच नोकझोंक चलती रहती थी। इनके बीच कई बार झगड़े भी हुए । बाद में फि र से दोस्ती हो गई। इस बार इनकेे बीच का झगड़ा ही दोनों के लिए काल बन गया।
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